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Feb
21

गैंड -सौड़ (तल्ला ढांगू ) में लोक कला व भूले बिसरे कलाकार


गैंड -सौड़ (तल्ला ढांगू ) में लोक कला व भूले बिसरे कलाकार 



 ढांगू गढ़वाल संदर्भ में हिमालय , उत्तराखंड  गढ़वाल की  लोक कलाएं व भूले बिसरे कलाकार श्रृंखला  -27

Folk Arts  and Artisans of Gaind, Dhangu Garhwal ,Folk  Artisans of Dhangu Garhwal  , Himalaya 27

(आलेख अन्य पुरुष में हैं )

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संकलन – भीष्म कुकरेती 

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 गैंड -सौड़ तल्ला ढांगू में दूसरा ब्राह्मण बहुल गाँव है जहां गौड़ जाती के ब्राह्मण निवासी है तथा बिष्ट व नेगी जाति भी निवास करते हैं।  गैंड (तल्ला ढांगू ) के निकटस्थ गाँव कुंटी , उच्चाकोट , सिरकोट , जुंकळ , माळा बिजनी  आदि हैं।  

कृषि प्रधान गाँव होने के नाते कृषि संबंधी काष्ठ।  रेशा , पाषाण कला में प्रत्येक व्यक्ति पारंगत (स्व -जीवकोपार्जन ) ही था जैसे सेळु बटना, न्यार आदि बटना  , हौळ -जोळ -निसुड़  जुआ निर्माण , पगार लगाना , टाट पल्ल  , मुणुक निर्माण फौड़ में भोजन बनाना अदि कलाएं विकसित थीं। 

   कुछ अन्य कलाएं व कलाकारों का ब्यौरा इस प्रकार है। 

 दास या ढोल वादकव दर्जी  – झिरणखाळ के  शीतल दास , भरोसा दास 

लोहार – गैंड के ही भद्वा , सतर्वा , टं खु , कीड़ू 

ओड , मकाननिर्माण  मिस्त्री – सिरकोट के दौलत सिंह नेगी 

टमटा – नए बर्तन हेतु ऋषिकेश पर निर्भरता  किन्तु घांडी व हुक्का निर्माण हेतु जसपुर पर निर्भरता 

सुनार – उच्चा कोट के शिल्पकार परिवार या पाली गाँव पर निर्भर 

पंडित – झैड़ (तल्ला ढांगू ) के मैठाणी परिवार जैस जनार्दन  प्रसाद मैठाणी 

वैद्य – गैंड के भैरव दत्त गौड़ , महीधर प्रसाद गौड़ 

जागरी – झैड़ के मैठाणी या ढौंर से 

बादी – -बिजनी के तूंगी बादी 

रामलीला कलाकार – एक ही बार रामलीला खेली गयी थी। 

1980 तक गाँव में चार पांच तिबारियां थीं अब सम्भवतया ध्वस्त हो चुकी हैं या अभी पूरी सूचना आनी बाकी  है 



सूचना आभार -  रमेश गुड़ ( गैंड )

Copyright @ Bhishma Kukreti , 2020 

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