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Jul
11

कड़ती (ढांगू ) में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी में काष्ठ कला अलंकरण अंकन, नक्काशी

कड़ती (ढांगू ) में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में काष्ठ कला अलंकरण अंकन नक्काशी 

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , खोली  , कोटि बनाल  ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन,  नक्काशी 215  -

Traditional House wood Carving Art of  Kadti, Karti , Silogi , Pauri Garhwal

संकलन – भीष्म कुकरेती

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पौड़ी गढ़वाल में ढांगू में कड़ती  एक प्रसिद्ध  गांव है और  सिलोगी स्कूल हेतु  जमीन देने हेतु आज भी  कड़ती गाँव याद किया जाता है। कड़ती व  बजारी कठूड़  दो गाँव क्षेत्र फल हिसाब से  मल्ला ढांगू में बड़े गांव माने जाते हैं।  कड़ती का सिलसू देवता तो मल्ला ढांगू के कई गाँवों का लोक देवता है।  ये गाँव धन कटने बाद पूजा हेतु धान व दूध कड़ती पँहुचाते थे।

मकानों में लकड़ी पर  हुनर या नक्काशी  संबंधी सिलसिले में आज कड़ती के सिलस्वाल बंधुओं (स्व सिद्ध नंद सिल्सवाल , स्व दौलत राम सिल्सवाल व मोहन लाल सिल्सवाल )  की निमदारी अथवा जंगलेदार मकान में काष्ठ  कला पर चर्चा होगी।

अपने समय में सिलस्वाल बंधुओं की  निम दारी  की अपनी पहचान व  सामाजिक  उपयोग था।  कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  गढ़वाल की आम निमदारियों जैसे ही पहली मंजिल पर स्थापित हैं लकड़ी के चौड़े छज्जे के ऊपर स्थापित है।   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  की गिनती भव्य निमदारियों में होती थी।   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में सोलह स्तम्भ हैं व पंद्रह ख्वाळ हैं। स्तम्भ छज्जे की कड़ी से चलते ऊपर बड़ी कड़ी से मिल जाते हैं।    कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में  प्रत्येक स्तम्भ के आधार  पर दोनों ओर  से पट्टिकाएं लगी हैं।  जिससे आधार पर स्तम्भ मोटे व सुंदर लगते हैं।    कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी के आधार से दो फ़ीट ऊपर रेलिंग कड़ी है व इस कड़ी व छज्जे की कड़ी पर लोहे की  छड़ियों से जंगला बनाया गया है।

कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  की लकड़ी में ज्यामितीय ढंग से ही कटान हुआ है व अन्य कोई अलंकरण निमदारी में नहीं दीखता है।

निष्कर्ष  निकलता है कि   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  लम्बी व सोलह सत्रह  काष्ठ स्तम्भों के कारण भव्य निमदारी है और निमदारी में केवल ज्यामितीय कटान हुआ है।  इस निमदारी के शिल्पकार स्थानीय ही थे (कड़ती व कख्वन  व आसपास ) .

सूचना व फोटो आभार:  विशेश्वर सिल्सवाल कड़ती 

यह लेख  भवन  कला,  नक्काशी संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:   वस्तुस्थिति में अंतर      हो स कता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

Traditional House wood Carving Art of West South Garhwal l  (Dhangu, Udaypur, Ajmer, Dabralsyun,Langur , Shila ),  Uttarakhand , Himalaya

दक्षिण पश्चिम  गढ़वाल (ढांगू , उदयपुर ,  डबराल स्यूं  अजमेर ,  लंगूर , शीला पट्टियां )   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलियों  ,खोली , कोटि बनाल  में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण,  नक्काशी  श्रृंखला  -

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,  बाखली , खोली, कोटि बनाल   ) काष्ठ अंकन लोक कला , नक्स , नक्काशी )  -

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya -

Traditional House Wood Carving  (Tibari ) Art of, Dhangu, Garhwal, Uttarakhand ,  Himalaya; Traditional House Wood Carving (Tibari) Art of  Udaipur , Garhwal , Uttarakhand ,  Himalaya; House Wood Carving (Tibari ) Art of  Ajmer , Garhwal  Himalaya; House Wood Carving Art of  Dabralsyun , Garhwal , Uttarakhand  , Himalaya; House Wood Carving Art of  Langur , Garhwal, Himalaya; House wood carving from Shila Garhwal  गढ़वाल (हिमालय ) की भवन काष्ठ कला , नक्काशी  , हिमालय की  भवन काष्ठ कला  नक्काशी , उत्तर भारत की भवन काष्ठ कला , लकड़ी पर नक्काशी , नक्श , नक्काशी

 

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