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Aug
02

द्यूका ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल सिंह रौथाण के जुड़वां मकानों में आकर्षक काष्ठ कला , अलकंरण , अंकन, लकड़ी नक्काशी

 

द्यूका  ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल सिंह रौथाण के जुड़वां मकानों में आकर्षक काष्ठ  कला , अलकंरण अंकन, लकड़ी नक्काशी

गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी , कोटि बनाल   ) में काष्ठ  कला , अलकंरण , अंकन, लकड़ी नक्काशी-238

Traditional House Wood Carving Art of  Dyuka , Hindolakhal  , Tehri

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संकलन – भीष्म कुकरेती

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टिहरी गढ़वाल से अलग अलग रूप   की तिबारियों की सूचना मिल रही हैं जो इस बात का द्योत्तक है कि काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण के मामले  में टिहरी क्षेत्र भाग्यशाली क्षेत्र रहा है।  ऐसी ही एक तिबारी की  सूचना  द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के मकान में दो तिबारियों की सूचना मिली , मकान व तिबारी भव्य हैं व कुछ विशेष भी हैं।

द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के मकान  में काष्ठ  कला समझने हेतु दो भागों में विशेष ध्यान देना आवश्यक है।  द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के मकान के तल मंजिल में लकड़ी पर नक्काशी व पहली मंजिल में दोनों तिबारियों में लकड़ी नक्काशी।   द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के दोनों  मकान   एक दूसरे से बिलकुल सटे हैं दोनों मकान  दुपुर व दुघर हैं।  पहले पहली मंजिल में जाने की खोली थी व अब सीढ़ियां बाहर हैं।

द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के मकान में कमरों के बड़े बड़े दरवाजों में ज्यामितीय कटान से  अंकन हुआ है।  मकानों के तल मंजिल में पहली मंजिल में जाने हेतु  मुख्य प्रवेशद्वार  खोली थी।  खोली  के स्तम्भ नक्काशीदार हैं व  खोली मुरिन्ड में मेहराब हैं।  मेहराब भी आकर्षक हैं।

द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के दोनों  मकानों  पहली मंजिल में तिबारी स्थापित हैं।  द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के एक  मकान की एक तिबारी  में साथ स्तम्भ व छह ख्वाळ  हैं।  द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के  दूसरे मकान में  बारह  सिंगाड़ /खाम स्तम्भ  हैं व ग्यारह ख्वाळ  हैं।  प्रत्येक सिंगाड़ /खाम /स्तम्भ आकार , आकृति व कला अंकन के हिसाब से बिलकुल सामान हैं।   तिबारी का प्रत्येक खाम /सिंगाड़ /स्तम्भ  देहरी के ऊपर  एक चौकोर पत्थर डौळ  के ऊपर स्थापित हैं।  तिबारी के स्तम्भ के आधार में उल्टे  कमल फूल से कुम्भी आकृति बनी  है , फिर ड्यूल के ऊपर सीधा कमल दल है जहां से स्तम्भ लौकी  आकर लेकर कड़ी रूप (shaft of  column ) ले ऊपर चलता है व जहां  खाम की सबसे कम मोटाई है वहां उल्टा कमल है जिसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म दल (कमल फूल ) है।  यहां से स्तम्भ  दो भागों में विभक्त होता है।  सिंगाड़ /स्तम्भ का  एक  भाग   थांत बन  ऊपर मुरिन्ड (शीर्ष ) से मिलता है व दूसरा भाग से अर्ध चाप निकलता है जो दूसरे स्तम्भ के अर्ध चाप से मिल पूर्ण तोरणम (मेहराब ) बनता है।   तोरणम के ऊपर मुरिन्ड बड़े चौड़ा  है व खूबसूरत नक्काशीदार है।

निष्कर्ष निकलता है कि द्यूका   ( हिंडोलाखाळ, टिहरी ) में कुशाल  सिंह रौथाण  के दोनों  मकान  भव्य हैं ,  दोनों  मकानों में  भव्य तिबारियां हैं तिबारियों में छह से अधिक  खाम स्तम्भ  स्थापित है जो अपने आप में विशेष (exclusive ) हैं।   काष्ठ कला दृष्टि से ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण सामने आये हैं।

 

सूचना व फोटो आभार :   जगमोहन जयाड़ा

 

यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटी  संभव है I

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गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल     ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला ( तिबारी  -

Traditional House Wood Carving Art (in Tibari), Bakhai , Mori , Kholi  , Koti Banal )  Ornamentation of Garhwal , Kumaon , Dehradun , Haridwar Uttarakhand , Himalaya -

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of  Tehri Garhwal , Uttarakhand , Himalaya   -

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