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Aug
08

रिखोली (सहसपुर , देहरादून ) के एक मकान में काष्ठ अंकन लोक कला अलंकरण, नक्कासी

 

रिखोली (सहसपुर , देहरादून ) के एक मकान में  काष्ठ अंकन लोक कला  अलंकरण, नक्कासी 

 

गढ़वाल, उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार ,बाखली  , कोटि बनाल , खोली , मोरी    ) में  काष्ठ अंकन लोक कला  अलंकरण, लकड़ी  नक्कासी -246

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of  Rikholi, Sahaspur, Dehradun , Garhwal , Uttarakhand , Himalaya -

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संकलन – भीष्म कुकरेती

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रिखोली सहसपुर में  500  जनसंख्या वाला गाँव है।  रिखोली  (देहरादून ) से   भी पारम्परिक मकाओं की सुचना मिली है।  आज पत्रकार विजय भट्ट  द्वारा भेजे गए एक पारम्परिक मकान की काष्ठ  कला, अलंकरण  पर  विचार होगा।  अनुमान  लगता है कि मकान की  दीवारें कोटि बनाल शैली में चिनी गयी हैं (लकड़ी के लट्ठ व बिन मिट्टी के पत्थरों के योग से।   )  मकान की पहली मंजिल में  आम गढ़वाली शैली की तिबारी स्थापित है व  मकान प्यूरी तरह से जौनसारी शैली का नहीं है।

रिखोली गांव के इस मकान की  तिबारी में  पांच स्तम्भ हैं व मकान की दीवाल भाग लकड़ी की बड़ी चौड़ी  पसूण (wood log ) पर टिके  हैं।  पांच सिंगाड़ /स्तम्भ  से चार ख्वाळ  बने हैं।  प्रत्येक स्तम्भ का आधार की कुम्भी  उल्टे कमल दल से बनी है। कुम्भी आम गढ़वाली  तिबारी के स्तम्भ कुम्भी से कुछ लम्बी है।   कुम्भी के ऊपर  ड्यूल है। ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प है।  कमल पंखुड़ियों में पर्ण -लता अंकन हुआ है।  सीधे कमल फूल अंत के बाद सिंगाड़ /स्तम्भ लौकी  ऊपर बढ़ता है।  यहां स्तम्भ में बांसुरी - गड्ढे शैली  अंकन  (flute -flitted )  हुआ है।  जहां पर स्तम्भ सबसे  कम मोटा है वहां उल्टा कमल फूल है , उल्टे कमल दल के ऊपर ड्यूल है जिसके ऊपर खिला सीधा कमल फूल है।  कमल दलों पर भी नक्काशी हुयी।   यहां से स्तम्भ के दो विशेष भाग हैं।  एक सीधा ऊपर का थांत जो मुरिदं (शीर्ष ) से मिलता है व थांत  से मेहराब (तोरणम ) का आधा चाप निकलता है जो सामने वाले स्तम्भ के अर्ध चाप से मिल पूर्ण महराब (तोरणम ) बनता है।   तोरणम /मेहराब के स्कन्धों ( त्रिभुजों )  में बेल -बूटों  की नक्काशी हुयी है।  नक्काशी से ही मेहराब की दो तीन स्तर निर्मित हुए हैं। तिबारी का  मुरिन्ड/मथिण्ड/शीर्ष  सपाट कड़ी से बना है   जिस पर कोई विशेष कला अंकन नहीं दिखता है।

निष्कर्ष निकलता है कि प्रस्तुत    रिखोली (सहसपुर , देहरादून ) के  मकान की तिबारी में काष्ठ  कला दृष्टि से   ज्यामितीय , प्राकृतिक कला अलंकरण अंकन हुआ है व मानवीय (पशु -पक्षी , देव आकृति ) का अंकन नहीं हुआ है।

सूचना व फोटो आभार : विजय भट्ट  

यह लेख कला संबंधित है न कि मिल्कियत संबंधी ,. सूचनायें  श्रुति माध्यम से मिलती हैं अत:  मिल्कियत  सूचना में व असलियत में अंतर हो सकता है जिसके लिए  संकलन कर्ता व  सूचनादाता  उत्तरदायी नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

देहरादून , गढ़वाल में तिबारी , निमदारी , जंगलेदार, बाखली , कोटि बनाल  मकानों में काष्ठ कला , अलंकरण , नक्कासी  श्रृंखला जारी रहगी

Traditional House Wood Carving of Dehradun Garhwal , Uttarakhand , Himalaya  will be continued -

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