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Aug
08

गराउ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं की बाखली में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी

 

गराउ  (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं की बाखली में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी

 

House Wood Carving Art  in  Garaun , Berinag  house of   Pithoragarh

गढ़वाल,  कुमाऊँ , हरिद्वार उत्तराखंड , हिमालय की भवन  ( बाखली  ,   तिबारी , निमदारी , जंगलादार  मकान ,  खोली  ,  कोटि बनाल   )  में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी -243

संकलन – भीष्म कुकरेती

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पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट , बेरीनाग व धारचूला क्षेत्र से कई  कुमाउँनी शैली के मकानों व बाखलियों की अच्छी संख्या में सूचना मिली हैं।  आज   गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं की बाखली में  काष्ठ कला , अलंकरण की चर्चा की जाएगी।

गराऊं (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  का मकान तिपुर व दुखंड शैली का मकान है।  मकान  बाखली शैली    का ही है।  गराऊं (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं की बाखली  में काष्ठ  कला विवेचना हेतु तीन मुख्य भागों में टक्क लगाना आवश्यक है -

गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं के मकान  के तल मंजिल में  खोळी /खोली में काष्ठ कला व अलंकरण

गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  के मकान में पहला व दूसरी मंजिल में बड़े छाजों  ,  में काष्ठ कला व अलंकरण

गराऊं(बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं की बाखली  के तीनों मंजिलों में मोरी / खिड़की या लघु छाजों में लकड़ी नक्काशी  विवेचना।

————: गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं के मकान  के तल मंजिल में  खोळी /खोली में काष्ठ कला व अलंकरण  :——–

गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं के मकान  के तल मंजिल में  दो  काष्ठ कलायुक्त खोली दृष्टिगोचर हो रही हैं।  खोली के दोनों ओर  के  लकड़ी के मुख्य सिंगाड़ों /स्तम्भों  व ऊपर दोनों मुरिन्ड तलों में  काष्ठ कला दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  जैसे कि  कुमाऊं में प्रचलन है कि  खोली का मुख्य सिंगाड /स्तम्भ उप स्तम्भों  के युग्म /जोड़ से निर्मित हैं  . उप स्तम्भ दो प्रकार के हैं एक प्रकार के उप स्तम्भों के आधार में उल्टा कमल , फिर ड्यूल व फिर सीधा कमल फूल कटान हुआ है। सीधे कमल फूल उपरान्त स्तम्भ सीधे हो ऊपर चौखट रूपी  मुरिन्ड का एक स्तर बन जाता है।  कमल फूल से व मुरिन्ड स्तर तक पर्ण -लता (बेल बूटे ) की नक्काशी हुयी है।  दुसरे प्रकार के बेल बूटेयुक्त उप स्तम्भ सीधे आधार  से मुरिन्ड की ओर  बढ़ कर बाद में मुरिन्ड के स्तर बन जाते हैं।  स्तम्भों से बना हुआ मुरिन्ड एक चौखट नुमा आकृति है।  अंदरूनी  उप स्तम्भ ऊपर जाकर  मेहराब /तोरणम आकृति में बदल जाते हैं।  मेहराब /तोरणम तिपत्ति नुमा है।  मुरिन्ड के ऊपर एक अन्य मेहराब /तोरणम आकृति है।  इस मेहराब /तोरणम  में देव आकृतियां खुदी है जो बहुत बारीकी से खुदी हैं।

————-: गराऊं (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  के मकान में पहला व दूसरी मंजिल मोरियों /खिड़कियों  में काष्ठ कला व अलंकरण :————

मकान में कुल 18 मोरी या खिड़की हैं।  खिड़कियों के  ऊपर बाहर गारे -मिटटी के मेहराब  से साफ़ पता चलता है कि मकान पर ब्रिटिश शैली (colonial house art ) का पूरा प्रभाव है और खिड़कियां छाज जैसे भी नहीं हैं।  खिड़की के स्तम्भ  आधार में बिन कमल के हैं व बाकी सब खोली जैसे ही हैं – उप स्तम्भों का मुरिन्ड का स्तर बनना व मुरिन्ड के ऊपर मेहराब /तोरणम।  कहा जा सकता है कि खिड़की की कला लगभग खोली जैसे ही है केवल उप स्तम्भों के आधार में कमल फूलों से बनी कुम्भियाँ नहीं है। व  अंदरूनी स्तम्भ  ऊपर मेहराब भी नहीं बनाते हैं।   खिड़की के ऊपरी मेहराब में देव आकृति भी नहीं खुदी हैं।

———–: गराऊ (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  के मकान में पहला व दूसरी मंजिल में बड़े छाजों  ,  में काष्ठ कला व अलंकरण :————-

गराऊं(बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  के मकान  /बाखली में पहली मंजिल में चार व दूसरी मंजिल में  कलायुक्त चार  छाज /झरोखे है।    सभी झरोखे /छाज  कला रूप में एक जैसे ही हैं।  केवल दूसरी मंजिल के छाजों /झरोखों में चौखट , जाली नुमा कलयुक्त आधार  नहीं हैं।

गराउ  के पंत  बंधुओं  के मकान में पहली मंजिल एक  छाजों  /झरोखों  जालीनुमा कलाकारी: —  गराऊं (बेरी नाग , पिथौरागढ़ ) में पंत बंधुओं  के मकान  के पहली मंजिल के छाजों /झरोखों में  चौखट आधार हैं जिन पर  कई स्तर के चौखट हैं।  मध्य चौखट में प्राकृतिक कलाकारी हुयी है जो कुछ कुछ  अवध नबाबाब के झरोखों से मिलती जुलती है।  अन्य चौखटों या आयतों में भी प्राकृतिक अलंकृत कला का कटान हुआ है।

गराउ  के पंत   बंधुओं  मकान में पहली मंजिल एक  छाजों  /झरोखों  में मुख्य स्तम्भ – गराउं  के पंत   बंधुओं  मकान में पहली मंजिल एक  छाजों  /झरोखों  में  तीन मुख्य स्तम्भ हैं जो ख्वाळ /छाज/झरोखे बनाते हैं।  प्रत्येक उप स्तम्भ के उप स्तम्भ हैं। किनारे के उप स्तम्भ के आधार में उलटे कमल फूल  , ड्यूल व सीधे कमल फूल से घुंडियां।/कुम्भियाँ बनी हैं ऊपरी सीधे कमल फूल के ऊपर से स्तम्भ सीधा ऊपर जाता है किन्तु  मुरिन्ड  से कुव्ह्ह नीचे फिर से कमल घुंडियां बनती हैं।  मुरिन्ड  से पहले अंदरूनी सिंगाड की तरफ मेहराब /तोरणम बनता है।  केंद्रीय मुख्य स्तम्भ के एक उप स्तम्भ में  बीच में एक बड़ी पत्ती उभरी है जिसके अंदर नसों का  कटान हुआ है।

प्रतीक ढड्यार /छेद /झरोखे  के दो तल हैं एक ऊपर खुला ढुड्यार /छेद  व नीचे  नक्काशी युक्त जंगला।  जंगले  के उप स्तम्भ कुछ कुछ हुक्के की कड़ी जैसे कलायुक्त हैं या कलाकृत चारपाई के पाए जैसे हैं। याने नीचे लम्बी कुम्भी  फिर ड्यूल ड्यूल से उप स्तम्भ लौकी आकार लेते हैं व  जहां पर कम मोटाई है वहां स्तम्भ कुछ कुछ चौकोर सजला/चिलमों  का रूप सा ले लेता है।

छाजों  का मुरिन्ड चौखट है।

निष्कर्ष निकलता है कि  गराउ  के पंत   बंधुओं  मकान में  भव्य कलाकृति  अंकन हुआ है व तीनों प्रकार का ंकन हुआ है – ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण।

सूचना व फोटो आभार : राजेंद्र रावल  , जाजारा 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  .  भौगोलिक , मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी ;  House wood Carving art in Pithoragarh  to be continued

 

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