«

»

Aug
08

कोयलपुर डांगी (अगस्तमुनि , रुद्रप्रयाग ) के एक खोली में काष्ठ कला अंकन , लकड़ी नक्काशी

कोयलपुर डांगी (अगस्तमुनि , रुद्रप्रयाग ) के एक खोली में  काष्ठ कला अंकन , लकड़ी नक्काशी

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली   , खोली , छाज  कोटि बनाल  ) काष्ठ कला अंकन , लकड़ी नक्काशी-244

Traditional House wood Carving Art of  Koyalpur Dangi, Rudraprayag

संकलन – भीष्म कुकरेती

-

खोली , तिबारियों , निमदरियों के मामले में रुद्रप्रयाग भाग्यशाली जिला है।  रुद्रप्रयाग से  कई खोलियों  , तिबारियों , निमदरियों की सूचना मिली हैं।  इसी क्रम में आज  दर्शन सिंह रौतेला द्वारा भेजी गयी सूचना आधार पर   कोयलपुर डांगी (अगस्तमुनि , रुद्रप्रयाग ) के एक खोली में  लकड़ी नक्काशी पर  चर्चा होगी।

कोयलपुर डांगी (अगस्तमुनि , रुद्रप्रयाग ) के एक खोली  के दरवाजों के दोनों ओर मुख्य स्तम्भ   दो  दो   प्रकार के उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से निर्मित हैं।  प्रत्येक दोनों प्रकार के उप स्तम्भ देहरी के ऊपर बड़े पत्थर के चौकोर सुडौल आधार पर टिके हैं। किनारे वाला  उप सिंगाड़/स्तम्भ के आधार पर कटान  से घुंडी नुमा आकृति बनी है जहां से उप सिंगाड़ सीधे  ऊपर मुरिन्ड की और बढ़ते हैं  व  इस उप स्तम्भ में मुरिन्ड  से नीची वीएस ही कटान है जैसे आधार।  यह उप सिंगाड़ /स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड (शीर्ष ) का एक स्तर (layer ) बन जाता है।

दुसरे प्रकार का सिंगाड़  वास्तव में दो युग्म से बने हैं।  यह अंदर वाला    सिंगाड  पत्थरके आधार पर  टिका  है उप सिंगाड़ /स्तम्भ    का   आधार ड्यूल नुमा  है । दो ड्यूल हैं।  फिर दोनों  चौड़े  उप स्तम्भों की आकृति बदल जाते हैं।  इस स्थान में पौधों के कोशिका जैसे आकृति बनी हैं।  कोशिकाओं के अंदर हाथ , प्राग नलिका जैसे कुछ आकृति बनी हैं जो बारीक नक्काशी का उदाहरण पेश करते हैं।  तीन कोशिकाओं के ये उप स्तम्भतीन तीन फाडों में बदल सीधे ऊपर मुरिन्ड की और बढ़ते हैं।  यहां से उप स्तम्भों  में बेल -बूटों  की सुंदर नक्काशी हुयी है।  ऊपर जाकर इस उप स्तम्भ के  छह  के छह  फाड़  मुरिन्ड के स्तर बन जाते हैं।  मुरिन्ड चौखट है व उसमे देव आकृति अंकित हुयी है।

मुरिन्ड के ऊपर छप्परिका  से दोनों दरवाजे के बाहर नीची की   ओर  दो दो दीवालगीर हैं।  दीवाल गीर के आधार में चिड़िया चोंच है जो (चोंच )  केले का फल जैस ेदीखता है।  चोंच फल के ऊपर कला आकृति के आधार गुटके हैं व  एसबीएस ेऊपर चिड़िया की आकृति है।  चिड़िया की चोंच तोते की चोंच जैसे ही है। चिड़िया के पैर  भी अनोखे हैं।  चिड़िया के पंख भी कलयुक्त हैं।

निष्कर्ष निकलता है कि  कोयलपुर डांगी (अगस्तमुनि , रुद्रप्रयाग ) के एक खोली  में मानवीय , प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण अंकन हुआ है।  कला बारीक हुयी है।

सूचना व फोटो आभार:  दर्शन सिंह रौतेला 

 

* यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag    Garhwal  Uttarakhand , Himalaya

रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण , नक्काशी  श्रृंखला

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली   ) काष्ठ अंकन लोक कला ( तिबारी अंकन )  -

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी , जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला, नक्काशी  ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला अंकन, नक्काशी  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रपयाग में दरवाजों में नक्काशी , रुद्रप्रायग में द्वारों में नक्काशी ,  स्तम्भों  में नक्काशी

 

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.