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Sep
18

दियारी (नैनीताल ) के एक जीर्ण शीर्ण मकान में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी

 दियारी (नैनीताल )  के एक जीर्ण शीर्ण मकान में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी
कुमाऊँ , गढ़वाल, हरिद्वार उत्तराखंड , हिमालय की भवन  ( बाखली  ,   तिबारी , निमदारी , जंगलादार  मकान ,  खोली  ,  कोटि बनाल   )  में  ‘काठ  लछ्याण , चिरण ,  कुर्याणौ पाड़ी  ब्यूंत’ की   काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी-  295संकलन – भीष्म कुकरेती

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ग्रामीण नैनीताल  में  काष्ठ   अंकन युक्त मकानों की सूचना मिलती रहती है।   आज इसी क्रम में  कोस्या कुटौली  के दियारा  गाँव के एक मकान की सूचना उपलब्ध हुयी हैं।

मकान दुपुर -दुघर है।  मकान ईंटों से निर्मित हुआ है किन्तु लकड़ी की नक्काशी पारम्परिक है।   प्रस्तुत मकान में लकड़ी की नक्काशी (जिसे लिखाई कला नाम दिया गया है ) समझने हेतु मकान की खोली , पहली मंजिल में शहतीर , शहतीर के ऊपर झरोखो/छाजों  व  छत आधार की लंबी कड़ी में काष्ठ अंकन का अध्ययन आवश्यक है।

मकान की खोली  (आंतरिक  सीढ़ियों का प्रवेश द्वार ) तल मंजिल से  उठकर ऊपर पहली मंजिल तक गयी है।  खोली  देहरी के ऊपर स्थित है।  खोली के  दोनों ओर के मुख्य स्तम्भ  तीन तीन उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से बने हैं।  दो उपस्त्म्भों  के मध्य एक  कड़ी है जिसपर सर्पीली  लता अंकन हुआ है।  कड़ी ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड /शीर्ष का स्तर बन जाता है।   दोनों किनारे के दोनों उप स्तम्भों के आधार में अधोगामी पद्म दल अंकित हो कुम्भी बनता है ,  कुम्भी के ऊपर  ड्यूल (घड़े का मुँहनुमा )  है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी कमल दल अंकन हुआ है ; फिर ड्यूल है।  दल के ऊपर बड़ा उर्घ्वगामी कमल  फूल है जिसकी पंखुड़ियों  पीछे की  ओर  मुड़ी हैं।  यहां से  दोनों उप स्तम्भ कड़ी रूप धारण करते हैं , कड़ियाँ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड   का   स्तर  बनते हैं।  ध्यान देने वाली बात है कि बाह्य  उप स्तम्भ की कड़ियों में  पत्तियां अंकित हैं   जब की आंतरिक उप स्तम्भ की कड़ियों में  नाना प्रकार के सर्पीले लताओं का अंकन हुआ है।    कड़ियाँ हैं जो ऊपर जाकर मुरिन्ड के स्तर बनते हैं व मुरिन्ड में कला उतपन्नकरते हैं।  मुरिन्ड  में स्तरों में वही अंकन हुआ है जो सीधे कमल के बाद उप स्तम्भों की कड़ियों में हुआ है।

मुरिन्ड के नीचे अंदर की ओर  आकर्षक तोरणम (मेहराब )  बना है।   मेहराब के ऊपर के स्कंध  के त्रिभुजों में एक एक  त्रिदलीय पत्ती  का अंकन हुआ है।

खोली के मुरिन्ड के ऊपर  एक चौखट कड़ी   (शहतीर ) है जिस पर  अंकन हुआ है  या नहीं स्पष्ट नहीं है।  इस शहतीर /कड़ी के ऊपर एक अन्य चौड़ी  कड़ी है जिसपर नाड़ी समेत  पत्तियों का अंकन हुआ है।  पत्तियों की नाड़ी से साफ पता चलता है अंकन में बारीकी है।

तल मंजिल में खोली के समानांतर एक बड़ा  कमरा या भंडार है जिसके दरवाजे नहीं दिख रहे हैं।  पहली मंजिल में इस कमरे  का  मुरिन्ड  ही शहतीर है। इस शहतीर / चौखट चौड़ी कड़ी  के कई परते हैं।  तल किनारे व ऊपर तल किनारों की परतों में ज्यामितीय अंकन हुआ है जब की मध्य की  चौड़ी पार्ट में सीधे फूल पत्तियों व उलटे फूल पत्तियों का आकर्षक अंकन हुआ है।  इस शहतीर के ऊपर  दो कड़ियाँ जो वास्तव में छाजों /झरोखों  के आधार कड़ियाँ है ।  झरोखे के आधार वाली कड़ी में  छ्यूँती  (चीड़ का फल )  की पंखुड़ियों जैसा अंकन हुआ है।  इस कड़ी के ऊपर सपाट कड़ी है जिस पर  तीन छाज /झरोखे स्थापित हैं।  प्रत्येक छाज /झरोखे   के मुख्य स्तम्भ दो दो उप स्तम्भों के मेल से बने हैं व   इस तरह किनारे में दो ही उप स्तम्भ हैं किन्तु मध्य में दो जगह चार चार उप स्तम्भ हैं।  कला  दृष्टि से छाजों   के  उप स्तम्भों में लगभग खोली  क ेउप स्तम्भ जैसे ही कला अंकन हुआ है।  छाजों  के निम्न भाग में दुं ळ /छेद  /ढुड्यार/ झरोखे     तत्ख्तों से ढके हैं।  ऊपरी भाग के दुंळ  /ढुड्यारों  में छेद  खाली हैं व इन  झरोखों के ऊपरी भाग में  तोरणम है व  कला दृष्टि से लगभग खोली के तोरणम  ही लगते हैं. झरोखों /छाजों  में मुरिन्ड में उतने ही स्तर हैं जितने उप स्तम्भ व मुरिन्ड में  वही कला अंकन  है जो  उप स्तम्भों में हुआ है।

मुरिन्ड के ऊपर छत आधार की कड़ी है।  छत आधार की इस कड़ी पर भी  नाड़ी युक्त पत्तियों   हुआ है।

मकान जीर्ण शीर्ण है किंतु  कला  तक बचा।  है।   इस भाग में काष्ठ पर ज्यामितीय व प्राकृतिक    कला अलंकरण  अंकन हुआ है।  मानवीय अलंकरण प्रस्तुत भवन में नहीं मिला।

सूचना व फोटो आभार: अलाप , FB 

 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

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