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Sep
25

जगथाना ( कपकोट , बागेश्वर ) में खिमसिंह के भवन में काष्ठ कला

 

जगथाना ( कपकोट  , बागेश्वर ) में खिमसिंह के भवन में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी

Tradiitional House Wood Carving Art in Jagthana, Kapkot  Bageshwar , Uttarakhand

 

कुमाऊँ , गढ़वाल, हरिद्वार उत्तराखंड , हिमालय की भवन  ( बाखली  ,   तिबारी , निमदारी , जंगलादार  मकान ,  खोली  ,  कोटि बनाल   )  में  ’काठ  लछ्याण , चिरण ,  कुर्याणौ पाड़ी  ब्यूंत’ की   काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी नक्काशी-   296

संकलन – भीष्म कुकरेती 

  मित्रों व हितैषियों से  विभिन्न तरहों से  ग्रामीण उत्तराखंड में परंपरागत भवनों की अच्छी सूचना मिल रही हैं।   बागेश्वर से भी भवनों की सूचना मिलने लगी हैं।  आज इसी क्रम में  जगथाना  (कपकोट , बागेश्वर ) में खिम सिंह  के भवन  में काष्ठ  कला , अंकन पर  चर्चा होगी।

जगथाना  (कपकोट , बागेश्वर ) में खिम सिंह का भवन बाखली का हिज्जा है।   पस्तुत भवन दुपुर ०दुघर है।  भवन में तल मंजिल में  खोलियाँ व भंडार गृह हैं।  पहली मंजिल छाज /झरोखे हैं।  दोनों मंजिलों में खिड़कियां भी हैं।

कला सृष्टि से भवन की खोली व छाजों  में टक्क  लगानी आवश्यक है क्योंकि बाकी भागों में ज्यामितीय कटान से कटान हुआ है।

तल मंजिल में  दो खोलियों  (आंतरिक  सीढ़ी   मार्ग प्रवेश द्वार )  हैं व दोनों माप व कला दृशहती से एक सामान हैं।  खोली तल मंजिल से शुरू हो  पहली मंजिल की छत से कुछ कम ुंचयी तक गयी हैं।  खोली के दोनों ओर  मुख्य स्तम्भ  तीन उप स्तम्भों के जोड़ से बने हैं।   दो  उप स्तम्भों में घट नुमा अंकन हुआ है तो एक उप स्तम्भ सीधा जड़ से मुरिन्ड तक एक सा ही है और उस पर पर्ण -गुल्म का अंकन हुआ है।  बाको दोनों उप स्तम्भों के आधार में  उल्टे कमल दल से कुम्भी निर्मित है जिसके ऊपर ड्यूल है ाव जिसके ऊपर बड़े रूप में सीधा कमल दल अंकन हुआ है। इस जगह से ड्यूल व फिर कुम्भी है।  ऊपरी कुम्भी से उप स्तम्भ    पर्ण - गुल्म य नक्काशी युक्त  सीधे बन मुरिन्ड की एक सतह बन जाते हैं यान ेछ के छह उप स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड /शीर्ष के स्तर  बनते हैं।  मुरिन्ड  में देव मूर्ती होनी चाहिए किन्तु छाया चित्र में दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है।

पहली मंजिल में  अकेले व युग्म में छाज /झरोखे हैं।   सभी छाज  तल मंजिल के भंडार या कमरे के ऊपर शहतीर के ऊपर स्थापित हैं।  छज्जों के स्तम्भ उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से बने हैं।   छाजों  /झरोखों के उप स्तम्भ में वही काष्ठ  कला अंकन हुआ है जैसे खोली के उप स्तम्भों में हुआ है।  केवल माप में अंतर् है।

अनुमान लगाना सरल है कि जगथाना  (कपकोट , बागेश्वर _ के  खिमसिंह  के  मकान भव्य है व अपने युवाकाल में  अति भव्य श्रेणी का भवन था।   काष्ठ  कला , अलंकरण अंकन दृष्टि से  भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक  कला अलंकरण  अंकन हुआ है।

सूचना व फोटो आभार: पद्म सिंह बिष्ट 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

कांडा तहसील , बागेश्वर में परंपरागत मकानों में लकड़ी नक्काशी (काष्ठकला अंकन ) ;   गरुड़, बागेश्वर में परंपरागत मकानों में लकड़ी नक्काशी (काष्ठकला अंकन ) ; कपकोट ,  बागेश्वर में परंपरागत मकानों में लकड़ी नक्काशी (काष्ठकला अंकन ) ;

 

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