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Nov
30

घनशाली (टिहरी गढ़वाल ) में एक भवन में विशेष गढवाली शैली की काष्ठ कला

 

 घनशाली  (टिहरी गढ़वाल ) में एक भवन में विशेष गढवाली शैली की काष्ठ  कला,अलकंरण, उत्कीर्णन , अंकन

Traditional House Wood Carving Art of  Ghanshali ,Tehri

गढ़वाल, कुमाऊँ, देहरादून, उत्तराखंड भवन  (तिबारी, जंगलेदार, निमदारी ,बाखली, खोली, मोरी, कोटि बनाल  ) में गढवाली शैली की काष्ठ  कला,अलकंरण, उत्कीर्णन , अंकन- 349

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संकलन - भीष्म कुकरेती  

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टिहरी गढ़वाल से निरंतर काष्ठ कला युक्त भवनों की  सूचना  मिलती रहती है।  ऐसे ही घनशाली (टिहरी )  से एक भव्य भवन की सूचना मिली  जो गढ़वाली शैली  काष्ठ  कला अंकन की सृष्टि में  उच्च स्तर का भवन है।  घनशाली (टिहरी )  का  प्रस्तुत  भव्य भवन  दुपुर , दुखंड /दुघर /तिभित्या  है।

भवन में गढ़वाली शैली की काष्ठ कला विश्लेषण हेतु भवन के भ्यूंतल (ground floor ) में खोली व पहले तल (first floor ) में तिबारी व  भव्य जंगले  पर ध्यान  है।

घनशाली (टिहरी )  के  प्रस्तुत  भव्य भवन  के भ्यूंतल में भव्य खोली (आंतरिक सीढ़ी  का प्रवेश द्वार )  है।  खोली   पूर्वी उत्तराखंड जैसे  भ्यूंतल  से पहले  तल तक नहीं अपितु  भ्यूं तल में ही है।  खोली के  दोनों ओर मुख्य सिंगाड़  हैं जो उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से निर्मित हुए हैं।  उप स्तम्भ के आधार में अधोगामी  पद्म  पुष्प दल से कुम्बी निर्मित है जिसके ऊपर ड्यूल है व  ड्यूल के ऊपर  उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल है।  यहां से  उप स्तम्भ ऊपर बढ़ते हैं व शीर्ष से कुछ पहले  यही कुम्भियाँ प्रकट होती है इसके ऊपर उप स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड / सिरदल के स्तर  बन जाते हैं।  सिरदल के ऊपर भी एक संरचना है।  यह संरचना तोरणम नुमा है।   तोरणम के अंदर के चाप में सूर्यमुखी पुष्प व परं लता का अंकन हुआ है व मध्य में  चतुर्भुज देवमूर्ती स्थापित है।  तोरणम के स्कन्धों मे भी सूर्यमुखी पुष्प और लता -पर्ण का अंकन हुआ है।  तोरणम के उपर भी अलंकृत कड़ियाँ हैं।

खोली के सिरदल के उभय दिशाओं मे उपर छज्जे के दासों से दीवालगीर  आये हैं।  दीवाल्गीरों मे  सिपाही  अथवा  पक्षी चोंच /केले के पुष्पनुमा जैसे कुछ आकृतियाँ अंकित हुयी है।

घनशाली (टिहरी )  के  प्रस्तुत  भव्य भवन  में पहले तल में भव्य तिबारी स्थापित हुयी है।  घनशाली (टिहरी )  के  प्रस्तुत  भव्य भवन की तिबारी नौ खम्या /नौ सिंगाडया /नौस्तम्भी  है जिसमे  आठ ख्वाळ  हैं।  ख्वाळ  में जंगल भी स्थापित है।

प्रत्येक स्तम्भ का  आधार  पर अधोगामी पद्म पुष्प दल अंकन है जो कुम्भी निर्माण।   कुम्भी के ऊपर ड्यूल है , ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल है व यहां से स्तम्भ लौकी नुमा आकार ले कर ऊपर बढ़ता है।  जहां स्तम्भ की मोटाई सबसे कम है वहां  उल्टा कमल दल , ड्यूल व सीधा कमल दल अंकन हुआ है।   यहां से स्तम्भ ऊपर जाते थांत  रूप आकर धारण करता है व ऊपर शीर्ष /सिरदल /मुरिन्ड से मिल जाता है।  यहीं से स्तम्भ से अर्धचाप भी प्रकट होता है व सामने वाले स्तम्भ से निकलने वाले अर्ध चाप से मिलकर तोरणम करती है।  तोरणम /चाप के स्कन्धों के त्रिभुजों  में सूर्यमुखी नुमा पुष्प  व  पर्ण  लता का अंकन हुआ है।

 

ख्वाल के आधार में डेढ़ फिट के लगभग रेलिंग में  I X I  की आकृति  स्थापित हुयी हैं।

निष्कर्ष निकलता है कि  घनशाली के भव्य भवन में   काष्ठ कला में प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण अंकन  हुआ है।  भवन भव्य व उच्च स्तर की कोटि में आता है।

सूचना व फोटो आभार:  भक्त  सिंह कंडारी    

यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I

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