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Dec
01

स्थायी भाव अध्याय -1

 

 

स्थायी भाव अध्याय  -1 

   Sthaayi Bhava 

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6: रस व भाव समीक्षा - 18

भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद शास्त्री  – भीष्म कुकरेती 

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रतिहसिसश्च शोकश्च क्रोधोत्साहौ भयं तथा ।

जुगुप्सा विस्मयश्चेति स्थायी भावा: प्रकीर्तिता: ।

अध्याय 6 , 17 ।

स्थायी भाव आठ छन – रति, हास्य शोक , क्रोध , उत्साह , भय  अर  विस्मय।

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

The Permanent Sentiments in dramas and Poetries a Garhwali Translation of Bharat Natya Shastra

 

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