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Dec
04

मझली कोट ( भिकियासैण अल्मोड़ा ) के एक भवन में कुमाऊं शैली की ‘काठ कुर्याणौ ब्यूंत’ की काष्ठ कला अंकन , अलंकरण

 

मझली कोट ( भिकियासैण अल्मोड़ा ) के एक भवन में  कुमाऊं  शैली की   काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण

Traditional House Wood Carving art of , Majhali Kot , Bhikiyasain  Almora , Kumaon
कुमाऊँ ,गढ़वाल, उत्तराखंड  के भवन ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )  में  कुमाऊं  शैली की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण,-   353

संकलन – भीष्म कुकरेती 

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प्रसन्नता का विषय है कि  अल्मोड़ा से भी अच्छी संख्या में  कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला युक्त भवनों की सूचना नरंतर मिलती जा रही है।

इसी क्रम में आज मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के एक  पुनर्जीवित भवन में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण का विश्लेषण किया जायेगा।  भवन में पुरातन पण  संरक्षित रखा गया है।

मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  के  कुमाऊं की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण  विश्लेषण   हेतु तीन स्थलों पर ध्यान देना आवश्यक है -

१- मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  की  खोली में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण

२- मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  के छाजों में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण

३- मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  के लघु मोरियों /खिड़कियों में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण

शेष स्थलों अर्थात अकमरो के दरवाजे सपाट  है।

भवन दुपुर , दुखंड।/तिभित्या  है।  संभवतया भवन किसी महा बाखली का अंग रहा होगा।

१- मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  की  खोली में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण :-

प्रस्तुत भवन में खोली  भ्यूंतल (ground floor ) से चल पहले तल (first floor ) तक गयी है।   खोली की विशेषता खोली दोनों ओर  चार से अधिक  उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित मुख्य स्तम्भ /सिंगाड़ हैं।   उप स्तम्भ /सिंगाड़  दो प्रकार के हैं।  एक प्रकार के उप  सिंगाड़/ स्तम्भ आधार से ही पज्यामितीय कटान से निर्मित सिंगाड़ हैं जिनमे उभर -गहराई (flute -Fleet ) का कटान हुआ है।  ये स्तम्भ ऊपर जाकर सिरदल / मुरिन्ड /मथिण्ड /Header  का अंग बन जातेहैं।  दूसरे प्रकार के उप स्तम्भों के आधार में उल्टे कमल फूल से कुम्भी /घट  निर्मित होता है , इसके ऊपर ड्यूल है ड्यूल के ऊपर सीधा कमल पुष्प दल अंकन हुआ है।  यहां से स्तम्भ   उभार  -गहराई युक्त हो सीधा हो ऊपर मुरिन्ड /सिरदल /header  के अंग बन जाते हैं।

सिरदल /मुरिन्ड /header  चौखट आकार का है जिस पर एक देव आकृति स्थापित की गयी है।

२- मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  के छाजों में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण   :-

भवन में खोली के दोनों ओर  एक एक छाज झरोखा /गवाक्ष/ ढुड्यार  हैं।  छाज  के दोनों  ओर  मुख्य स्तम्भ /सिंगाड़  है।   उप स्तम्भ दो ही प्रकार के हैं जैसे खोली के उप स्तम्भ।  उप स्तम्भों में कुम्भी /घट निर्माण उसी तरह है जैसे खोली के उप स्तम्भों में।  केवल एक अंतर् है कि  छाज के उप स्तम्भों में उलटे कमल दल व सीधे कमल दल की पुनरावृति होती है।  छाज  का  मुरिन्ड /मथिण्ड  भी खोली की प्रतिलिपि ही है।  चाजों के आधार पर जंगला (लघु स्तम्भों से निर्मित  रेलिंग ) है।  जल के लघु स्तम्भ बेलन नुमा हैं।  भवन की विशेषता है कि  आम कुमाउँनी शैली के स्थान पर खोली व छाज के मुरिन्ड /header  तोरणम विहीन हैं।

३ – मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  के लघु मोरियों /खिड़कियों में कुमाऊं शैली  की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत‘  की काष्ठ कला , अंकन , अलंकरण  : -

 

भवन की विशेषता  इसके प्रत्येक तल (floor ) में   तीन तीन  मोरियाँ लघु खिड़कीयाँ  हैं।  खिड़की के बाह्य ऊपर  मिटटी पत्थर के तोरणम   हाँ तो आंतरिक तोरणम कष्ट का है।  खड़की के दरवाजों पर  व ऊपर तोरणम स्कन्धों में देवीय आकृतियां अंकित हैं।  यह एक विशेष्ता भवन की है।  तोरणम में देव आकृति चतुर्भुज लगती है।

निष्कर्ष निकलता है कि   मझली कोट (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत भवन  में  कुमाऊं काष्ठ  अंकन शैली में प्राकृतिक, ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण अंकन हुआ है।  भवन की कला उच्च स्तर की मानी जाएगी।

सूचना व फोटो आभार : जगदीश तिवारी  

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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Traditional House Wood Carving art of , Kumaon ;गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली, कोटि  बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन, लकड़ी पर नक्काशी

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