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Dec
10

रामडा तल्ला (गैरसैण , चमोली ) में दरबान सिंह की खोली गढ़वाली शैली की काष्ट कला अलंकरण अंकन

 

 

रामडा  तल्ला (गैरसैण , चमोली ) में दरबान सिंह की खोली   गढ़वाली  शैली की   काठ  कुर्याणौ ब्यूंत‘ की काष्ठ कला  अलंकरण अंकन  

House Wood Carving Art  from  Ramda  Talla  , Gairsain  Chamoli

गढ़वाल, कुमाऊं की भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली , खोली , मोरी, कोटि बनाल ) में  गढ़वाली   शैली की   ’काठ  कुर्याणौ ब्यूंत‘ की काष्ठ कला  अलंकरण अंकन, - 358

(अलंकरण व कला पर केंद्रित)

 

संकलन – भीष्म कुकरेती   

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चमोली व रुद्रप्रयाग में ब्रिटिश काल में खोलीनुमा (आंतरिक सीढ़ी का प्रवेशद्वार ) भवनों का प्रचलन में वृद्धि हुयी. और खोली को बहुत अधिक महत्व दिया गया।  इसी क्रम में आज रामडा तल्ला  (गैरसैण , चमोली ) में डरबन सिंह के भवन की खोली में काष्ठ कला अंकन पर चर्चा होगी।

खोली के दोनों ओर  मुख्य सिंगाड़ /स्तम्भ  पांच पांच उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हैं।  उप स्तम्भ दो प्रकार के उप स्तम्भ हैं।  एक प्रकार के उप स्तम्भों में  आधार से ही सांकळ /spiral /लता  कला युक्त हैं व ये स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड /header के स्तर बन जाते हैं।

दूसरे भांति के उप स्तम्भों के आधार में  अधोगामी पद्म पुष्प से कुम्भी /घट निर्मित होता है।  कुम्भी के ऊपर ड्यूल  /गोल छल्ला है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी कमल पुष्प खिला अंकन हुआ है।  यहां एक ड्यूल है व पुनः सीधा कलम  पुष्प खिला है।  यहां से उप स्तम्भों में सांकळ /लता /spiral  प्राकृतिक कला शुरू हो जाती हैं।  सभी उप स्तम्भ ऊपर जाकर  खोली के मुरिन्ड /मथिण्ड के स्तर बन जाते हैं।  इस तरह खोली के मुरिन्ड /सिरदल मके स्तरों में लता /सांकळ  नुमा कला अंकन हुआ है।

खोली के मुरिन्ड के  तीन भिन्न भाग हैं।  खोली के मुरिन्ड /सिरदल के तल भाग में आंतरिक तोरणम /arch/ मेहराब  निर्मित हुआ  है। तोरणम के स्कन्धों में फर्न नुमा पत्तियों  का आकर्षक अंकन हुआ है।

मुरिन्ड /सिरदल के तोरणम के   ऊपर  चतुर्भुजीय , आभूषण युक्त गणेश मूर्ति अंकित है।  मुरिन्ड /सिरदल के मध्य भाग में अशोक चक्र  स्थापित है।

मुरिन्ड / सबसे ऊपर  किनारों   पर हाथी  अंकित   हैं व मध्य में   पुष्प  गुच्छा व गुच्छे के ओर  चलते पत्तियों का अंकन हुआ है।

रामदा तल्ला में दरबान सिंह की खोली  उच्चकोटि की है जिसमे तीनो प्रकार का अलंकरण हुआ है।

खोली के शिल्पकार  औतारु थे।

सूचना व फोटो आभार: नरेंद्र बरमोला 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी

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