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Jan
15

अमर्ष भाव अभिनय: अमर्ष भावौ पाठ खिलण

 अमर्ष भाव अभिनय:  अमर्ष भावौ पाठ खिलण 

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण

Performing Indignation  Sentiment  in Garhwali Dramas 

( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न ) 

  

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 51

s  = आधी अ

भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती 

तमभिनयेच्छिर:कम्पनप्रस्वेदनाधोमुखचिंतनध्यानाध्यवसायोपायसहायान्वेषणादिभिरनुभावै:। ७. ७७ परवर्ती गद्य  ।

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गढ़वाली अनुवाद – -

अमर्ष पाठ खिलणो  कुण  मुंड कम्पण, पसीना दिखाण , मुख तौळ लटकाण , चिंतन ध्यान दिखाण  , ध्यान दिखाण , उपाय सुचण , सहायता जन करतब दिखाये जांदन।

 गढ़वाली म अमर्ष  भाव  उदाहरण – - –

एक गढवाली नाटक  बखरों  ग्वेर स्याळ    अमर्ष    भाव

जवान ग्राम प्रधान -क्या भै काऴया ! क्या चयाणु च ?अदबुडेड़ काऴया- प्रधान बेटा ! एक सटिफिकेट  चयाणु च

ग्राम प्रधान - सूण ! काका बाड़ा ड्यारम हूंद . क्यांक सटिफिकेट ?

काऴया - म्यार नौनु किलास  मा फस्ट आयि।  गरीबी सटिफिकेट चयाणु च।

ग्राम प्रधान बेइजती करणो भाव मा - हूँ ! अबे त्यार नौनु कथगा बि नंबर लैजालु।  करण त वैन मजदूरी ही च।  अबि जा भोळ ली जै सटिफिकेट …. काऴया (भैर जांद जांद ,  कुछ देर ध्यान मग्न रौंद , भगवान  जिना  दिखुद , गुस्सा मा  स्वत:  ) - मी  बि अपण बुबाक  काऴया नीछौं जु मि अपण नौनु तैं बीए पास नि करौं !

 

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

गढ़वाली काव्य म  अमर्ष  भाव ; गढ़वाली नाटकों म  अमर्ष भाव ;गढ़वाली गद्य म   अमर्ष भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   अमर्ष भाव, भीष्म कुकरेती  कु  गढ़वाली नाटक म अमर्ष भाव

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