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Jan
15

दान कुंडी (रानीखेत , नैनीताल ) के एक पारम्परिक भवन में कुमाऊं शैली की ‘काठ कुर्याणौ ब्यूंत’ की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण

 

 

 

दान  कुंडी  (रानीखेत , नैनीताल )  के एक पारम्परिक भवन में  कुमाऊं शैली  की  ’काठ कुर्याणौ ब्यूंत’ की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण

 

Traditional House Wood Carving Art in   Daan Kundi,  Ranikhet, Nainital;

कुमाऊँ, गढ़वाल,  उत्तराखंड के भवन ( बाखली,  तिबारी, निमदारी, जंगलादार  मकान,  खोली , कोटि बनाल)  में कुमाऊं शैली  की  ’काठ कुर्याणौ ब्यूंत’ की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण -386

संकलन – भीष्म कुकरेती 

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नैनीताल आदि स्थलों से भवनों की सूचना सोशल मीडिया से मिलती जा रही है।  आज इसी क्रम में  दान कुड़ी , रानीखेत के एक पारम्परिक भवन  में  काष्ठ कला अंकन,अलंकरण  पर चर्चा होगी।  रानीखेत का विवेच्य भवन  दुपुर व दुखंड /दुघर है।

भवन में काष्ठ कला  अंकन , उत्कीर्णन  हेतु  खोली के सिंगाड़ों /संगाड़ /स्तम्भ, खोली के मुरिन्ड/मथिण्ड /header , खोली के तोरणम , छाजों  (झरोखे ) के संगाड़ /स्तम्भ , छाजों  के ढुड्यारों (झरोखे/छेदों ) के पटिलों/तख्तों/panels में क्या क्या काष्ठ  कला , अलंकरण उत्कीर्णन हुआ है।

भवन के  भ्यूं /भू तल  (Ground  Floor )  में कक्षों /खिड़कियों के द्वारों व  सिंघाड़ों में ज्यामितीय कटान की सपाट कला दृष्टिगोचर होते हैं. उत्कीर्णन दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है।  खोली  भ्यूंतल से नहीं अपितु कुछ ऊपर है अर्थात भवन का जीर्णोद्धार हुआ है।  खोली आधे भ्यूंतल से ऊपर पहले तल (first floor ) तक गयी है।  . खोली के संगाड़ /सिंगाड़   दो प्रकार के उपस्तम्भों के योग से निर्मित हैं। दोनों प्रकार के स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड के स्तर बनाते हैं।   एक प्रकार के स्तम्भों में सर्पीली लता उत्कीर्णन (प्राकृतिक अलंकरण )  हुआ है।  दूसरे   में कमल दल कला उत्कीर्णन से घुंडियां /कुम्भियाँ निर्मित हुयी है।

दुसरे प्रकार के उप स्तम्भ के आधार में उल्टे कमल  पंखुड़ियों  से कुम्भी निर्मित होती है जिसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर सीधा कमल दल अंकन हुआ है. यहां से स्तम्भ /संगाड में प्राकृतिक अलंकरण उत्कीर्ण हुआ है।  खोली के मुरिन्ड मे  स्तम्भों का स्तर है।  मुरिन्ड के आंतरिक भाग में तोरणम (arch ) है व तोरणम के स्कन्धों में जालनुमा अंकन हुआ है।   इस मुरिन्ड में धातु का देव मूर्ति जड़ी हैं।  इस आधारिक मुरिन्ड के ऊपर चौखट है जिस पर कुछ उत्कीर्णन हुआ है जो संभवतया पशु चित्र हैं।  मुरिन्ड के ऊपर छप्परिका से बेलन नुमा काष्ठ आकृतियां (लट्टन ) लटके हैं।

छाजों के मुख्य स्तम्भ भी कई उप स्तम्भों के जोड़ से निर्मित हुए हैं।  छाजों  के उप स्तम्भों के आधार में कमल दलों का उसी प्रकार प्रयोग हुआ है जैसे   खोली के उप स्तम्भों में है।  किन्तु छाजों  के उप स्तम्भों व खोली के उप स्तम्भों में बड़ा अंतर् है कि  छज्जों के उप स्तम्भ में सीधे कमल दल के ऊपर उप स्तम्भ लौकी आकार धारण करता है ऊपर बढ़ता है व कुछ ऊपर कमल दलों के अंकन दुहराव से कुम्भियाँ /घुंडियां निर्मित होती हैं जैसे कि  आधार में।  छाजों  के ढुड्यार अंडाकार हैं व नीचे तख्ते/पटिले  हैं तो ऊपर तोरणम आर्च अंकन हुआ है।  छाजों  के मुरिन्ड भी उप स्तम्भों से निर्मित हैं व चौखट नुमा है।

भवन उत्कृष्ट शैली का गिना जायेगा व कला उत्कृष्ट है।

निष्कर्ष निकलता है कि   दान कुड़ी , रानीखेत , का प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण कला उत्कीर्णण हुआ है।

सूचना व फोटो आभार: शोभित पांडे

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

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