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Jan
17

फलनि पादप अर ऊंक कर्म

 

 फलनि पादप अर  ऊंक  कर्म 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 

(महर्षि अग्निवेश व दृढ़बल प्रणीत  )

 खंड – १  सूत्रस्थानम पैलो अध्याय ८१  बिटेन  – ८५ तक 

अनुवाद भाग -   ११ 

अनुवादक - भीष्म कुकरेती 

  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )

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!!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

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फलनी  पादप -

शंखनी , बिडंग , त्रपुष (ककड़ी , खीरा ), मदन , आनूप   क्लीतक, सतलज क्लीतक ,(मुलैठी ), धमर्गव ( बड़ी  , तोरई ), इक्ष्वाकु, (कड़ी तोरई ), जीमूत , कृतवेधन (तोरई )  , प्रकीर्या व उदकीर्य्या , प्रत्यक पुष्पा , अभया , अन्तःकोटरपुष्पी , शारदा हस्तपर्णी , कम्पिल्ल्क, आरग्व ध , कुटज  ये १९ फलनि वनस्पतियां  छन।  ८१ -८३

फलनि पादपों कर्म -

धामार्गव , इक्ष्वाकु , जामूत , अमलतास , मैनफल , कुड़े फल, खीरा , अर  शरद हस्तपर्णी  यी  आठ शरद ऋतू क फल , उकाई/उल्टी , आस्थापन्न म अर  निरुह  करण   चयेंद।

आपामार्गौ  फल नस्य कर्मों म प्रयोग हूंद।  अर  शेष फलनियुं  प्रयोग विरेचन कार्यों म करण  चयेंद।  ये प्रकार से १९  फलनि अर  यूंक  कर्म क बड़ा म बुले  गे  . ८४- ८५

 

 

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल )

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद ;

Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charka  Samhita,  first-Ever Garhwali Translation of Charak Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charak Samhita

 

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