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Jan
20

उन्माद भाव अभिनय: उन्माद भावौ पाठ खिलण

उन्माद भाव अभिनय: उन्माद  भावौ पाठ खिलण 

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण

Performing  Insanity   Sentiment  in Garhwali Dramas 

( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न ) 

  

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 56

s  = आधी अ

भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती 

ततनिमित्तहसितरुदितोत्क्रुष्टासंबद्धप्रलापशयितोपविष्टोत्थितश्चेष्टानुकरणादिभिरनुभावैरभिनयेत्।

( ७ , ८३ कु  परवर्ती गद्य )

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या -

 

अनुवाद -उन्माद (बौळ्याण )  भावौ पाठ खिलणो  कुण  कबि  हंसण , कबि  रूण , कबि  बैठण , कबि उठण  या पौड़  जाण  या अंसगत चेष्टा करणो  करतब दिखाए जांदन।

व्याख्या -  प्रिय जन क वियोग हूण , आकस्मिक कारणों से या द्रिव्य नष्ट हूण  पर , चोर या शत्रु आक्रमण हूण पर , कफ , पित्त कुपित हूण पर मनिख कबि कबि बौळ्याण  मिसे जांद।  या चित्त वृति उन्माद  च।  इखम  मनिख कुछ बि  करण लग जांद जन हंसण , चिरड़ेण , कुछ बि  निरर्थक बुलण  आदि

गढ़वाली म  उन्माद भाव  उदाहरण -

एक  दैं  मीन  मित्रग्राम (ढांगू , पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ) म बादयूं  लोक नाटक देखि छौ जखम   हीरा  बादीन एक मनिखाक  पथ खेली छौ जैक चोरी ह्वे  अर  वै  मनिख पर अचाणचक बौळ  चढ़ गे।  बौळम उ  कबि  हॅंसो , कबि  र् वावो , कबि  डाळ म चढ़णो  स्वांग कारो तो कबि  भागणो  स्वांग कारो।  उन्माद भावो सुंदर प्रदर्शन छौ।

स्वरूप ढौंडियाल कृत ‘मंगतू बौळ्या ‘ नाटक म तो मुख्य चरित्र मंगतू बौळ्या  च अर  नाटक म भौत दैं  मंगतू व्यवहार म उन्माद भाव दिखाए गेन।

 रत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

गढ़वाली काव्य म   उन्माद भाव ; गढ़वाली नाटकों म  उन्माद भाव ;गढ़वाली गद्य म  उन्माद  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   उन्माद भाव

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