«

»

Jan
21

सुकरात कु पेरी पोएटिक्स कु गढ़वाली अनुवाद ( शब्दानुवाद )

 

सुकरात  कु  पेरी पोएटिक्स कु  गढ़वाली अनुवाद  ( शब्दानुवाद ) 

 

-

(ईरानी, अरबी उर्दू शब्दों क वर्जना को प्रयत्न करे गे )

[Garhwali Translation of  Peri poietikes  by  Aristotle (on  the Art of poetry )

Based on the Translation by INGRAM BYWATER (oxford 1920) ]

भाग -   १

अनुवादक – भीष्म कुकरेती

( (ईरानी, अरबी उर्दू शब्दों क वर्जना को प्रयत्न करे गे )

-

क्वी बि भाषा तब समग्र रूप म विकसित हूंद जब भाषाक साहित्य म बनि बनी प्रकार का साहित्य भंडार हो I एक साहित्य वो बि हूंद जु अन्तराष्ट्रीय स्तर का साहित्यकार , दार्शनिकों व आध्यामिक विचारकों ण रची हो . in विचारकों विचरो अनुवाद बि भाषा कुण आवश्यक हूंद . ये इ विषय तैं केंद्र म रखी मी इखम सुकरात का पेरी पोएटिक्स का गढवाली अनुवाद , Garhwali Translation of  Peri poietik कु अनुवाद प्रस्तुत करणों छौन I तुम लोखुं प्रतिक्रिया आवश्क च . मैं पूरी आशा ch मी अपर उद्येश म सफल होलू .
प्रतिक्रिया अवश्य दें .

—-सुकरात परिचय -

यूनानी  दार्शनिक   सुकरात  (३८४ – ३२२ BC ) प्लेटो क च्याला  अर सिकंदरौ गुरु छौ।  सुकरात को साहित्यिक रचनाओं म   वै  बगतौ  यूनानौ   राजनैतिक वातावरणो  क्वी विशेष छाप नि  मिलदी।

सुकरातौ साहित्य कार्य (पेरी  पोएटिक्स  ३३० BC ) म राजनीति विषय नी  च।   ये ग्रंथ कु  कुछ इ भाग बच्यूं  च या मील।  काव्य सिद्धांत प्लेटो तैं  उत्तर च।  वास्तव म सुकरातौ  कविता सिद्धांत  वैको अपण  च।   पेरी पोएटिक्स वास्तव म नाटक सबंधित च।

— पेरी पोएटिक्स कु अनुवाद भाग १  -

हमर विषय कविता पोएट्री च।  म्यार प्रस्ताव केवल  साधारण रूपम कला  से संबंधित नी च , अपितु यांक   भौत सा   उपश्रेणी  अर ऊंको  सक्यात /गुण  पर बि :  कथानकौ  (muthos /plot )  संरचना कविता कुण  आवश्यकता हूंद; कविता  संरचनौ भागुं  संख्या अर ऊंको प्रकृति; अर  ये प्रकार से हौर   विषय  बि  परखे जाल।  आवा प्राकृतिक अनुक्रम तै दिखला अर  पैल  प्राथमिक तत्वों  से शुरू करला।

महाकाव्य , त्रासदी , अर प्रहसन )कॉमेडी )   देव पूजा कविता बि ,  रौद्र स्तोत्र , विलाप जन सब छन ,  जु समग्र रूप से दिखे जाल, यी सब  अनुकरण ( mimesis नाटक ) का   साधन छन।  ,अर  दगड़म यी यी एक हैंक से  तीन प्रकार से अलग छन,  या तो अर्थ कु  कारण विशेष /अलग छन या उद्देश्य का कारण विशेष / अलग छन  या अनुरकरण से विशेष /अलग ह्वे  जांदन।

जन कुछ रूप (form ) अर  रंग तै साधन बणांदन , जु   यूंको  सहायता से अनुकरण ( नाटक , नकल करदन ) , या चित्रांकन करदन ,अर  कुछ  ध्वनि  प्रयोग करदन;  मथ्याक कला समोहः म बि ,  समग्र रूप से ऊंको  साधन छन पद्य (rhymes ), भाषा अर राग (melody ) , यद्यपि इखुलि  या दगड़ /जुंटा म।   पद्य अर  राग कु  दगुड़ पाइप प्लेइंग   कु  साधन च अर गीत गाण या  हौर  कला बि  ह्वे  सकदन , उदाहरणार्थ अनुकरण  वळ  बांसुरी वादन।  रागहीन पद्य नचाड़ कुण  अनुकरणीय  हूंद; इख तलक कि  वेक  व्यवहारौ तरंग, लोगुं स्वभावो प्रतिनिधित्व  करद , इख तलक कि  वु  क्या करदन  अर   ऊंको  दुःख (बि ) I  यांसे  अगनै , एक इन  कला बि  च जु   केवल भाषा से इ  अनुकरणीय )नकल ) हूंद ,  बिना राग का ,पद्य या गद्यम, अर  जु  कविता रुपम  च त ,  कै क्वी   एक रुपम  या  कई  मीटरुं म ।    , यी अनुरक्त कला को आज क्वी  नाम नी  च (संभवतया तब यूनान म स्वांग या नाटक नाम नि छौ। )

 

हाँ अंतम , कुछ ऑवर कला छन जखम  तुकबंदी वळ पद्य /rhymes, राग /melody  अर कविताओं /verses  प्रयोग करे जांद।  अर्थात हमम उद्धत /dithyrambic अर  आर्थिक।/नोमिक कविता, त्रासदी/tregedy , प्रहसन /comedy  छन; विशेषता का दगड़ , तथापि, यी तीन प्रकारौ साधन कुछ स्थलों म इकदगड़ी , कुछ स्थलुं  म अलग अलग, एक का पश्चात हैंक प्रयोग हूंदन।  यी तत्व  मथ्याक  कलाउं म अलग हूंदन  म्यर अर्थ च नकल /स्वांग / imitation करदा  दैं

 

शेष अग्वाड़ी  भागम

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती २०२१

First Authentic Garhwali Translation of Peri Poetikses by Aristotle, First Ever Translation of   Peri Poetikses by Aristotle in Garhwali Language; First Ever Garhwali Translation of a Greece Classics; गढ़वाली भाषा में प्रथम बार सुकरात /अरिस्टोटल के पेरी पोएटिक्स का सुगढ़ अनुवाद  , यूनानी साहित्य का प्रथम बार गढ़वाली में अनुवाद ,

 

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.