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Jan
22

त्रास भाव अभिनय: त्रास भावौ पाठ खिलण

त्रास भाव अभिनय:  त्रास भावौ पाठ खिलण 

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण 
Performing  Terror  Sentiment  in Garhwali Dramas 
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जना  प्रयत्न ) 
  

 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - ५८ 

s  = आधी अ

भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती 

तमभिनयेत्संक्षिप्तंगोत्कम्पनवेपथुस्तम्भरोमांचगद्गदप्रलापादिभिरनुभावै:।

 

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  –

अनुवाद -

त्रास भावो पाठ खिलणो  कुण अंग बटण /अंग संकुचित करण , कमण , खड़ा -खड़ी -बैठ्या बैठी (जख्म च तखमी) /स्तम्भित हूण , रोमांचित हूण , कंठ  अवरुद्ध  हूण  अर लम्बो रूणो करतब दिखाए जांदन।

व्याख्या -

भंयकर बादल गिरजणि , बाघौ गिरजणि , बिजली चमकण , आदि सूणि , गैणा भ्यूं पड़न देखि जु  डौर -भौ  पैदा हूंद वो त्रास च।  डौरन मनिख अपण अंग बौटि /संकुचित लीन्दो , मुट्ठी बौटि  लींद , जगा जगा रै जांद , अर जीब लड़खड़ाइ  जांद .

गढ़वाली म त्रास  भाव  उदाहरण

रणभूतों ,  भादों मास म जब बरखा , बिजली कड़कणी  हो तब कृष्ण जन्म जन लोक  नाटकों म  त्रास भाव दिखाएं जांद।  या जब कबि  गाँव म बाग़ आतंक का लोक नाटक खिले जावन जन कि  गोठम बाग़  आण अर  बागौ गिरजणि  लोक नाटक खिले जावो तो त्रास भाव को अभिनय करे जांद  . 

 

 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   

गढ़वाली काव्य म  त्रास  भाव ; गढ़वाली नाटकों म  त्रास भाव ;गढ़वाली गद्य म   त्रास भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   त्रास भाव 

 

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