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Jan
23

अरस्तु कु पेरी पोएटिक्स कु गढ़वाली अनुवाद ( शब्दानुवाद ) भाग – ३

अरस्तु   कु  पेरी पोएटिक्स कु  गढ़वाली अनुवाद  ( शब्दानुवाद )  भाग – ३

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(ईरानी, अरबी उर्दू शब्दों क वर्जना को प्रयत्न करे गे )

[Garhwali Translation of  Peri poietikes  by  Aristotle (on  the Art of poetry )

Based on the Translation by INGRAM BYWATER (oxford 1920) ]

 

अनुवादक – भीष्म कुकरेती

( (ईरानी, अरबी उर्दू शब्दों क वर्जना को प्रयत्न करे गे )

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यूं  कलाओं म एक तिसर  भिन्नता  बि हूंद ,  शैली  जैमा  कला   उद्देश्य प्रतिनिधित्व हूंद।    एक इ साधन अर अनुकरण कुण  एकि उद्देश्य  हूण पर या तो कथा द्वारा या चरित्र उदाहरण से व्यक्त कर सकद जन कि होमर करद , या सब स्थलों म  बिन परिवर्तन कु एक सामान रावो या  अनुकरणकर्ता /रचनाकार सरा कथा तैं  नाटकीय रूप म बताई /प्रतिनिधत्व सकद जन बुल्यां  यि  सच्ची ह्वे ह्वावन।

जनकि  पैली बतै  याल बल , इलै , यूं  अनुकरणों म  यी तीन भेद /विशेषता हूंदन – ऊंको  साधन , ऊंको उद्देश्य  अर ऊंकी  शैली।

अतः  , अनुकरणकर्ता  (रचनाकार)  रूपमा  एक ओर सोफ़ोकलस च अर दुसर  ओर  होमर , द्वी भला लोगन चित्रण करदन , अर  दुसर ओर  अरिस्टोफोन्स च , चूंकि द्वी अपण चरित्रों तै इन प्रस्तुत करणा  छा जन  पाठ खिलण  हो /ऐक्टिंग हो अर कर्म।  वास्तवम, कुछुं अनुसार यो इ  कारण च बल क्रीड़ा तेन स्वांग /ड्रामा  बुले जांद,  किलैकि  प्ले म चरित्र कथा म जीवित हूंदन।  (charcters atc the  story )  I . इलै   ग्र्रीक का  द्वी  डोरियन्स  ट्रेजिडी अर  कॉमेडी  अपण  अन्वेषण बुल्दन तो मेगारियन कामदी पर स्वत्व बथान्दन , मेगारियन  सिसिलियन मेगारियन से अलग  प्रजातन्त्री  खंड ह्वे , अर ऊँन  बोली बल  कवि इपीकारमस  ऊंको  देस कु  च जु चिओनाइड्स अर मैग्नेस से पैल  छा; इख तलक कि  कुछ पेलेपोन्नेसिई  डोरियन्स बि त्रासदी पर स्वत्व बथांदन।  अपण  समर्थन म सि  लोक बुल्दन बल सि  दूरस्थ गाँव कुण ‘कोमायी ‘ (komai ) बुल्दन , जब कि  ऐंथस  वळ ‘डेमेस (demes, demoi  ) बुल्दन ,  अर्थात  प्रहसन कवि तै komoi  से नाम नि  मील , अपितु एक गांव से हैं गांव परिभ्र्रमण से मील, सि  अभिनय (act ) कुण ‘ड्रान ‘ (dran, प्रहसन करण  ) बुल्दन तो एथेंस वळ प्राटेन (prattein,   ) बुल्दन।

संख्या व प्रकृति अनुसार अनुकरण म भौत भेद हूंदन।

शेष अग्वाड़ी  भाग – ४ म

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती २०२१

First Authentic Garhwali Translation of Peri Poetikses by Aristotle, First Ever Translation of   Peri Poetikses by Aristotle in Garhwali Language., First Ever Garhwali Translation of a Greece Classics; गढ़वाली भाषा में प्रथम बार अरस्तु  /अरिस्टोटल के पेरी पोएटिक्स का सुगढ़ अनुवाद  , यूनानी साहित्य का प्रथम बार गढ़वाली में अनुवाद , एक या तो

 

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