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Jan
24

दीर्घज्जीवितीय अध्याय सारांश

दीर्घज्जीवितीय अध्याय सारांश 

 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 

(महर्षि अग्निवेश व दृढ़बल प्रणीत  )

 खंड – १  सूत्रस्थानम पैलो अध्याय १३६  बिटेन  -  १४० तक 

अनुवाद भाग -   18 

अनुवादक - भीष्म कुकरेती 

  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )

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!!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

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आयुर्वेद क मर्त्य लोक म आण , हेतु रोगों  उत्पन्न हूण , भारद्वाज मुनि द्वारा मर्त्त्यलोक म प्रचार , अग्निवेशादि  कु  तंत्र बणान , अग्निवेशादि द्वारा बणायूं  तंत्रो कुण  ऋषियों द्वारा दियीं आज्ञा , हिताहित आदि लक्षण रुप सामान्यादि छह कारण, कार्य्य धातुओं तै सामन्य समान करण आयुर्वेद प्रायोजन च , संक्षेप म रोगुं कारण , काल , बुद्धि , इन्द्रियार्थ  क अतियोग , अयोग , मित्थ्ययांग दोष , बात , पित्त , कफ , यूंकि  औषध , आकाश , तीन , द्रव्य , जल अर पृथ्वी , यूंक दगड़  रस मधुर आदि , द्रव्य संग्रह; शमन आदि ; एवं जंगम आदि म भेद से  ; मूलनि हस्तिदन्ति आदि सोलह ; फलनि -शंखनी आदि उन्नीस , स्नेह घी अदि चार ; महासनेह ; लवण- सौबर्चल अदि पांच ; मूत्र आठ ; क्षीर आठ , दूध वळ वृक्ष , छल वळ स्नेही पुतिक आदि छह वृक्ष; यूंको वमनविरेचन  आदि कर्म्म ;  औषध कु  सम्यक गुण अर असम्यक योग से जु दुर्गुण छन; मूर्ख वैद्य की निंदा अर सब गुणों से युक्त श्रेष्ठ वैद्य लक्षण ; यी सब ‘दीर्घज्जीवितीय’ अध्याय म महर्षि भगवान आत्रेय न सम्यक प्रकार से बताई।

 

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद

Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charka  Samhita,  first-Ever Garhwali Translation of Charak Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charak Samhita

 

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