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Feb
24

जागिये ! कुमाऊंनी -गढ़वाली साहित्यकारो !

      

 जागिये ! कुमाऊंनी -गढ़वाली साहित्यकारो  ! 

 

          वेबिनार को आज ही  अपनाओ! 

 

गढ़वाली -कुमाऊंनी  भाषाओं के साहित्यकारों हेतु  प्रसिद्धि वृद्धि हेतु वेबिनार  एक श्रेष्ठ माध्यम है।  

 

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 आलेख : विपणन विशेषज्ञ /  व्यक्तिगत छविबृद्धि  विशेषज्ञ - भीष्म कुकरेती 

 

  प्रत्येक साहित्यकार साहित्य संसार में प्रसिद्धि पाने ही आया है व प्रसिद्धि पाना साहित्यकार का जन्म सिद्ध अधिकार है।  साहित्यकार को  अपने साहित्य के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से भी आमना सामना करना पड़ता है और अपनी प्रसिद्धि /Personal branding  हेतु कई परम्परागत  रणनीतियों व  परम्परागत माध्यमों कई नए   रणनीतियों माध्यमों को अपनाना पड़ता है।  

वर्तमान में इंटरनेट सर्वथा नया माध्यम है व  कई ऐसे साहित्यकार प्रकाश में आएं हैं जो पारम्परिक माध्यम में  अज्ञात ही थे जैसे गढ़वाली गजलों में पयास पोखड़ा , कविताओं में भी बालकृष्ण ध्यानी , जयाड़ा , वीरेंद्र जुयाल आदि।  हिंदी में इंटरनेट सुविधा का लाभ उठाते युवा कवि नरेश उनियाल ने झंडे गाड़े। 

  इंटरनेट ने साहित्यकारों हेतु  बिनव्यय के यी माध्यम प्रदान किये हैं जिससे  साहित्यकार व्यक्तिगत छवि वृद्धि . करने में सफल हुए हैं।  वेबिनार अथवा इंटरनेट द्वारा सम्मेलन आयोजन  भी न्य माध्यम है और गढ़वाली साहित्य में  उदाहरण हैं कि कई नए संयोजक  वेबिनार  माध्यमों से चमके हैं यथा – ऋषिकेश के डा सुनील थपलियाल।  इसी तरह से युवा  आश्विन गौड़ , वीरेंद्र जुयाल व मनोज भट्टने जताया कि  वे कवि के अतिरिक्त संयोजन में भी कुशल हैं महेंद्र ध्यानी पारम्परिक माध्यमों में जाने माने सम्मेलन संयोजक है उन्होंने भी सिद्ध किया कि  वे वेबिनार में भी सिद्ध हस्त  संयोजक हैं    

    संक्षेप में वर्तमान में वेबिनार से अपने  साहित्य व  विद्वता का परचम फहराना साहित्यकारों हेतु एक  नया व क्रांतिकारी माध्यम है।  इसी क्रम में   कुमाऊंनी   संस्कृति संबंधी वेबिनारों में  ‘ म्योर पहाड़ मेरी पछ्यांण संस्था  ने अब तक 69 वेबिनार आयोजित कर लिए हैं।  

                  -: वेबिनार क्या है ? ;:- 

वेबिनार  की  सरल परिभाषा  है इंटरनेट द्वारा सम्मेलन।  सम्मेलन दो व्यक्तियों मध्य भी हो सकता है और सौ व्यक्तियों का भी।  

 

         -:साहित्यकार वेबिनार से क्या क्या लाभ उठा सकते हैं ;-

  साहित्यकार वेबिनार से जग प्रसिद्ध भी बन सकते हैं।   साहित्यकार वेबिनार द्वारा उन ऊंचाइयों  तक पंहुचने में सफल हो सकते हैं  जिन उंचाईयों की आम साहित्यकार ने सपने भी न देखे हों।  

१- वेबिनार से साहित्यकार अपनाी व्यक्तिगत छवि  निर्माण कर सकता है या छवि वृद्धि कर।  अथवा जो छवि है उसे स्थिर भी रख  सकता है।  

२-  वेबिनार से साहित्यकार अपनी छवि वृद्धि व व्यक्तिगत छवि प्रसारण कर सकने में सक्षम हो सकता है।  जैसे अपनी पुस्तक लोकार्पण वेबिनार से  करवाकर अथवा अपनी कृतियों पर विद्वानों मध्य चर्चा करवाकर व दर्शकों से मूलयवान विचार /सलाह मंगवाकर (पाठकों को अपने साहित्य में अंतर्भूत करना  आदि )।  

३-  पाठकों को का आकर्षण वृद्धि हेतु भी वेबिनार सशक्त माध्यम है।  कई वेबिनारों में प्रमुख व अपने देव दूत सरीखे पाठकों को सम्मलित कर अपने प्रशंसा भी करवाई जाती है।  

              वेबिनार द्वारा व्यक्तिगत छवि सुधर 

 बहुत से समय साहित्यकार किसी  नकारात्मक छवि  का शिकार होता है।  ऐसे में वेबिनार आयजित कर व्यक्तिगत छवि को सुधारा जा सकता है या साहित्यकार अपना  विचार ठीक से रख सकता है। 

              वेबिनार वास्तव में वीडिओ मार्केटिंग का एक भाग है :-

 वेबिनार द्वारा अपनी ब्रैंडिंग करना अर्थात वीडिओ विपणन करना है।  अतः  वेबिनार विपणन में व्ही तकनीक व रणनीति अपनायी जाती हैं जो वीडिओ मार्केटिंग में आवश्यक हैं। 

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वेबिनार विपणन वेबिनार मार्केटिंग हेतु कुछ टिप्स - 

              वेबिनार का दिन व समय पक्का करना – वेबिनार हेतु दिन व समय पक्का करने हेतु चर्चा में भाग लेने वालों की अग्रिम सहमति तो आवश्यक है ही अपितु  अधिक से अधिक पाठकों का जुड़ने का आकलन भी आवश्यक है। 

                वेबिनार का प्रचार प्रसार आवश्यक है – वेबिनार का इतना प्रचार प्रसार होना चाहिए कि  वेबिनार से बाहर   अन्य संबंधित साहित्यकारों    पाठकों को सूचना  मिलनी आवश्यक नहीं अपितु वेबिनार में शामिल होने  की  बाध्तयता भी आवश्यक है।  पाठक व अन्य साहित्यकारों की बाध्यता वेबिनार विषय पर निर्भर करता है।  प्रचार प्रसार में दैनिक समाचार पत्र , इंटनेट मेलिंग, मेसैज, व्हट्सप, फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया आवश्यक है।  व्यक्तिगत फोन भी आवश्यक हैं।  

        सही वेबिनार  प्लेटफार्म  चुनना जो कि  सोशल मीडिया में भी प्रसारित हो सके को चुनना एक शर्त है। 

   प्रत्येक तरह से वेबिनार से पाठकों को शामिल कीजिये व देवदूत जस पाठकों  (Evangelists  ) को उत्साहित करना आवश्यक है  . 

    वेबिनार में पाठक संबंधी विषय भी उठाये   जाएँ।  

    वेबिनार का संयोजन ऐसा हो कि  व्यवधान  हीन  से हीं हों व  दर्शकों पाठकों का आकर्षण बना रहे।  (तकनीक। ध्वनि  सही रखनावेबिनार में शामिल विद्वानों का  वेबिनार  तकनीक से से परिचय , यदि चर्चा में व्यवधान हो तो कोई एक विद्वान गति को बढ़ाने में सक्षम हो, संयोजक का शब्दों पर सही नियंत्रण होना आदि  ) 

    पाठकों तक पंहुचने का विश्लेषण कीजिये। 

    वेबिनार में पाठकों , दर्शकों व अन्य विद्वानों हेतु कुछ ना कुछ कार्य अवश्य निर्धारित कीजिये कि  वे इस वेबिनार को यूट्यूब माध्यम में बार बार देखें।  

  सदा ही पाठक देव दूतों पर समुचित ध्यान दीजिये . 

   वेबिनार के उपरांत पर्याप्त मात्रा में प्रचार प्रसार कीजिये कि  दर्शक वेबिनार वीडिओ को देखने को बाध्य हो जांय (वीडिओ मार्केटिंग अपनाईये ) 

   वेबिनार के उपरांत वीडिओ मार्केटिंग के स्तर पर अपनी प्रसिद्धि वृद्धि का विश्लेषण अवश्य कीजियये।   .     

प्रत्येक साहित्यकार को webinar platform  application APP  अपने लैपटॉप या मोबाइल में संजो लेना ही श्रेयकर है। 

 

 Copyright @ भीष्म कुकरेती २०२१ 

कवियों हेतु वेबिनार का महत्व ;   गद्य साहित्यकारों  हेतु वेबिनार का महत्व्यंग्यकारों   हेतु वेबिनार का महत्संयोजन विशेषज्ञों   हेतु वेबिनार का महत्;   उपन्यासकारों   हेतु वेबिनार का महत्कथाकारों   हेतु वेबिनार का महत्पुस्तक विमोचन   हेतु वेबिनार का महत्;  

 

 

 

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