«

»

Feb
25

आंखुं दोष दूर करणो अंजन व्याख्या

 

आंखुं  दोष दूर करणो अंजन व्याख्या 

 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 

(महर्षि अग्निवेश व दृढ़बल प्रणीत )

 खंड – १  सूत्रस्थानम , पंचौं  अध्याय १३  बिटेन  – तक 

अनुवाद भाग -  ४१   

अनुवादक - भीष्म कुकरेती 

  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )

-

!!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

(आँख अग्नि रूप च इलै आंख्युं तै सरैलौ  दोष  वात , पित्त अर कफ से भय बण्युं  रौंद।  विशेषकर कफ से )

सौवीरांजन प्रतिदिन आंख्युं  पर लगाण  चयेंद किलैकि यु आंख्युं कुण  हितकारी च ।   ये से आंख्युं तेजौ रक्छा  हूंदी ,येसे  आंखुं  दोष दूर नि हूंद।  आंख्युं  दोष दूर करणो अर आंखुं पाणी  दोष दूर करणो कुण  पांच अठौं  राति बलबल की अपेक्षा से रसांजन रातम प्रयोग करण  चयेंद।  १३ ।

आँख तेजोमय छन वूं  तैं  कफ से भय हूंद। इलै दिनम  तीक्ष्ण अंजन प्रयोग नि करण  चयेंद। तीक्ष्णांजन से दृष्टि दुर्बल ह्वे जांद। इलै सूरज तै नि सुहांदी

श्लेष्मा क निकळणो उपरान्त श्लेष्मा घटाण वळ  अर आंखुं  तै स्वच्छ करण वळ प्रयोग करण  चयेंद। जै प्रकार से धूळ  आदि ह्यूयं स्वर्ण मैलो हूंद तो तेल , वस्त्र आदि घुसण  से स्वर्ण  स्वच्छ  ह्वे जांद ऊनि मनिखौं आँख स्रोतांजन से निर्म्मल (वात  आदि से दूर ) आँख अगास तरां  चमकण लग जांद। १४ से १७ ।

 

 

*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली

Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charka  Samhita,  First-Ever Garhwali Translation of Charak Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charak Samhita

 

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.