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Feb
26

स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में ‘ कुमाऊँ शैली’ की ‘काठ कुर्याणौ ब्यूंत ‘की काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन

स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में ’ कुमाऊँ  शैली‘   की  काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत की  काष्ठ कला अंकन अलंकरण, उत्कीर्णन   

Traditional House Wood carving Art of  Swala, Champawat, Kumaun

कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ‘ कुमाऊँ  शैली‘   की  ’काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत ‘की  काष्ठ कला अंकन ,  अलंकरण, उत्कीर्णन  -420

( लेख में इरानी , इराकी अरबी शब्दों की वर्जना प्रयास हुआ है )

संकलन – भीष्म कुकरेती   

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स्वाला गाँव भुतहा गांव नाम से जाना जाता है।  यहां के कुछ जीर्ण शीर्ण भवनों की सूचना फेसबुक मित्रों से मिली है।  इसी क्रम में आज स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में ’ कुमाऊँ  शैली‘   की  ’काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत ‘की  काष्ठ कला अंकन ,  अलंकरण, उत्कीर्णन   पर चर्चा की जाएगी।

प्रस्तुत सूचित  जीर्ण शीर्ण भवन  एक बाखली (सामूहिक भवन )  है जिस पर पहले तल में  सामन्य कुमाऊं शैली के छाज /झरोखे  स्थापित नहीं हुए हैं अपितु  गढ़वाली शैली की तिबारी (बरामदा  स्तम्भों से ढका होना )  स्थापित है।  पहले तल में छज्जा भी पौड़ी गढ़वाल के भवनों जैसा ही है जबकि कुमाऊं में पारम्परिक भवनों में इस प्रकार छज्जा नहीं मिलता है।  भवन दुपुर -दुघर है।

स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में भ्यूंतल में कक्षों में जो भी है वः ज्यामितीय कटान की कटाई से दरवाजों स्तम्भों में सपाट काष्ठ है।

स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में पहले तल पर  तीन  अथवा चार तिबारियों के चिन्ह मिलते हैं ।   चित्र में एक तिबारी अभी भी अध्ययन लायक है।  तिबारी सात  मुख्य स्तम्भों /सिंगाड़ों  से निर्मित हुयी है।  प्रत्येक मुख्य स्तम्भ उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हुए हैं।  उप स्तम्भ आयताकार तो हैं किन्तु आधार में कटान से काट कर कमल दल की  घुंडियां /कुम्भियाँ निर्मित हुए हैं।  सातों सिंगाड़ /स्तम्भ ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड/header  की कड़ियों से मिलते हैं।  मुरिन्ड कड़ियाँ में प्राकृतिक लता नुमा कला अंकित हुयी है।

आश्चर्य है कि स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में कोई मानवीय (जंतु , देव मूर्ती जैसे ) कोई अलंकरण कला दृष्टिगोचर नहीं होती है।

निष्कर्ष निकलता है कि स्वाला (चम्पावत ) के एक जीर्ण भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण कला उत्कीर्णन हुआ है।

सूचना व फोटो आभार : चंदन सिंह   चौधरी (फेसबुक से ) 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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