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Feb
26

भरत को नाटक म बिघ्न बाधा

 

  भरत को नाटक म बिघ्न बाधा 

भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय १ , पद /गद्य भाग   ६४  बिटेन ७६  तक

(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)

पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   ८४

s = आधा अ

( ईरानी , इराकी , अरबी  शब्द  वर्जना प्रयत्न )

पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार -   स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित

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गढ़वळि  म सर्वाधिक अनुवाद करण वळ अनुवादक   आचार्य  – भीष्म कुकरेती   

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अब जब नाटक म दैत्यों  ार दानवों हत्त्या  संबंधी दृश्य मंचन शुरू ह्वे तो जु बिनबुलयां  दैत्य अपण  नेता बीरुपक्ष दगड़  अयां  छा ऊंन बिघ्न  आत्माओं तै  उकसाण  शुरू कर दे अर  वीरुपक्षन बोलि, “  अगनै  आवो ! हम  तै  ये नाट्य मंचन सहन  नि  करन।  ६४, ६५ . ।  .

तब बिघ्न करण  वळ  आत्मा अर दैत्यों न  अभिनेताओं /नाट्य कर्मियों क  संभाषण, गति अर  यादास्त  तै  पक्षाघात करवाई दे ।  ६६  ।

यूं  घाटों /घावों तै देखिक  इंद्र ध्यम म बैठ अर क्या द्याख कि सूत्रधार अर  अभिनेता बेसुध  व जड़ पड्यां  छन जु   बिघ्न करता /बुरी आत्माओं से घिर्यां  छा।  ६७, ६८  ।

तब इंद्र क्रोध म उठ अर  गहणो  से युक्त ध्वज उठायी अर तब  इन्द्रन दस्यु अर  बिघ्न कराउ  आत्माउं जु उख  पण  छा तो  तै  जरजरा से मार।  ६९ , ७०  ।

जब सब बिघ्नकर्ता आत्मा अर  दैत्य मारे गेन , तब देवताओंन पुळे क (प्रसन्न ) बोलि ,” हे भरत ! त्वे तैं  एक दिव्य शस्त्र मिल गए ये से सब नाटक का दुश्मन मारे गेन  तो एक नाम बि  जरजरा नाटक बुले जाल।  ७१ -७३ ।

” अन्य शत्रु , ! जु  बि  अभिनेताओं तै  डराल ऊंक  बि  यी हाल होलु। ” ” देव गण !  यु जरजरा  शस्त्र अभिनेताओं रक्षा कारल “। ७५- ७६  ।

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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

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