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Mar
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नाटकों लक्षण , लाभ

 

नाटकों लक्षण , लाभ 

भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय १ , पद /गद्य भाग   ९८  बिटेन  ११०  तक

(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)

पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   ८६

s = आधा अ

( ईरानी , इराकी , अरबी  शब्द  वर्जना प्रयत्न )

पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार -   स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित

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गढ़वळि  म सर्वाधिक अनुवाद करण वळ अनुवादक   आचार्य  – भीष्म कुकरेती   

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इथगाम  शरीर मध्य देवोंन बह्मा श्री से बोलि – तुम तै विघ्न तै समझायी बुझैक शांत करण  चयेंद।  ये शाम  विधि बाद दाम (प्रलोभन आदि )  अपनाये जांद ।  अर यदि यि  विधि असफल होवन तो दंड विधि अपनाये जांद। ९८, ९९।

दिबतैं सलाह सूणि  ब्रह्मा श्रीन  दुष्ट आत्मा बुलैन अर पूछ बल -तुम नाट्य मंचन तै नष्ट किलै करणा  छा ? १००।

ब्रह्मा बथ सूणि विरिपक्षा, दैत्य अर विध्न दगड़ी बुलण मिसे गेन – तुमन जु नाट्य कला  देवों  क बुलण  पर पैलो  बार परिचय कराई वे नाट्य कलान हम तै असहज स्थिति म लै दे।  अर यु तुमन देवों  बान कार जबकि तुम पितामह छा  डिवॉन अर हमर बि।  १०१ , १०३

विरिपक्ष  द्वारा यी शब्द बुलण पर ब्रह्मा श्रीन बोली – भौत  ह्वे गे रोष , हे दैत्यों ! अपण परिवेदना /शिकैत  छ्वाड़ो, यु नाट्यवेद देवों कुण  ही ना भाग्यशाली होलु अपितु दैत्यों कुण बि उनी होलु।  १०४, १०५।

ये मा (नाट्य ) अकेला देवों  या दैत्यों विषय नी अपितु तीन संस्कारों अभिव्यक्ति च।  १०६।

ये मा  कुछ म  कर्तव्य वोध च , कुछम खेल छन , कबि धन , कबि शान्ति छ्वीं , तो कबि हौंस /खौंकळ्याट , कबि   द्वन्द ,-युद्ध , कबि प्यार तो कबि हत्त्या दिखाए जांद।  १०७।

यु (नाट्यवेद ) कर्तव्य वोध सिखांदु , जु प्रेम करण  चांदन प्रेम (विधि ) सिखांद , अर वूंको विरोध /दंड दीणो प्रवाधान बि सिखांद  जो  असत्य वाचन /विधि से अनुशं विरोधी या सत्य विरोधी छन।  कायरों तै शक्ति दिंदेर , वीरों तै उर्जा देंदेर च, हीनबुद्धि वलों तै आत्म प्रकाशितकरद, अर बुद्धिमता लांदो/सिखांदो ।  १०८ , १०९।

यु राजा तै विविधता दीन्दो, जु दुखी  छन ऊँ तैं  मानसिक स्थिरता दींदो।  जौ तै धन चयेणु  च , जौंक मन उच्चाट  हुयुं  च उख  शान्ति दींदो।  ११०।

 

 

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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

 

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