«

»

Mar
01

जाखनी (गंगोलीहाट , पितरागढ ) में उप्रेती परिवार के पारम्परिक भवन में में कुमाऊं शैली

 

 जाखनी  (गंगोलीहाट , पितरागढ ) में उप्रेती परिवार के  पारम्परिक भवन में में कुमाऊं शैली की  ’काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत’ की  काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन

Traditional House Wood Carving Art  of   Jakhani ,  Gangolihat  Pithoragarh

गढ़वाल,कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की  ’काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत’ की  काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन – 421

(प्रयत्न है कि ईरानी , इराकी व अरबी  शब्दों  की वर्जना हो )

संकलन – भीष्म कुकरेती 

-

पारम्परिक भवनों में कुमाऊं शैली की काष्ठ उत्कीर्णन  संदर्भ में आज  जाखनी  (गंगोलीहाट , पितरागढ ) में उप्रेती परिवार के  पारम्परिक भवन में में कुमाऊं शैली की  ’काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत’ की  काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन पर चर्चा होगी।

प्रस्तुत  जाखनी  (गंगोलीहाट , पितरागढ ) में उप्रेती परिवार का   पारम्परिक भवन तिपुर (तीन तल floors  वळ )  है व दुखंड /दुघर/तिभित्या  है।  भवन बाखली /सामूहिक वसाहत  वाला पारम्परिक भवन है।

जाखनी  (गंगोलीहाट , पितरागढ ) में उप्रेती परिवार के  पारम्परिक भवन/ बाखली में काष्ठ कला दृष्टि से निम्न स्थल महत्वपूर्ण हैं -

१- भ्यूं तल /ground floor में  काष्ठ कला -

-

भ्यूं तल /ground floor  के कक्षों के द्वारों, द्वार के  सिंगाड़ों, मुरिन्ड /header में व ऊपरी तलों के  कुछ झरोखों /छाजों  के निम्न तल के पटिलों  में ज्यामिति कटान से निर्मित सपाट पन  है।

२- कमल दल उत्कीर्णन कला -

-

खोली , सभी छाजों /ढुड्यारों /झरोखों/ग्वाख /वातायनम्   के सिंगाड़ों /स्तम्भों या उप सिंगाड़ /स्तम्भों  में  अधोगामी (उल्टे ) पद्म  पुष्प दल अंकन, ड्यूल उत्कीर्णन , उर्घ्वगामी  (सीधे ) पद्म पुष्प दल उत्कीर्णन  से कुम्भियाँ /घुंडियां या घटपेट निर्मित हैं।  कुछ सिंगाड़ों में कुम्भी निर्माण का दुहराव है कुछ में नहीं है।   खोली , ढुड्यारों, गवाक्षों में अधिसंख्य सिंगाड़ों /columns  में कुम्भी  उपरांत स्तम्भों /सिंगाड़ों  के उपरांत स्तम्भों /सिंगाड़ों  में प्राकृतिक कला उत्कीर्णन (लता नुमा या गुंथी लताएं )

तोरणम में काष्ठ कला -

-

खोली व प्रत्येक ढुड्यार /छाज/गवाक्ष के ऊपरी   भाग  में अंदर की ओर तोरणम / arch निर्मित हुए हैं।  तोरणम स्कन्धों में या तो प्राकृतिक कला उत्कीर्णन हुआ है या सपाट  दृष्टिगोचर हो रहे हैं।

खोली के मुरिन्ड /header ऊपर के चौखट में काष्ठ कला उत्कीर्णन -

-

खोली के मुरिन्ड /header के ऊपर छपरिका  के नीचे एक आयताकार काष्ठ आकर है जिसमे  ६   वर्गाकार चौखट  के अंदर ६ भिन्न भिन्न चतुर्भुज डिवॉन की प्रतिमाएं स्थापित हैं।  ये देव सुरक्षा (जैसे हनुमान ) , सुख के प्रतीक हैं।

बौळी / शहतीर में काष्ठ कला -

-

पहले तल के छाज /गवाक्ष /ढुड्यार  शक्तिशाली चौखट , आयाताकार  काष्ठ कड़ी  /बौळी   पर स्थित  हैं।  इस तरह की दो बौळियां  हैं।  बौळि  के अंदर आयातकार अंडाकार रूप में  गुंथे लता लड़ियों  का आकर उत्कीर्णन हुआ है व लकीरों का भी उत्कीर्णन हुआ है।  बौळी /girder  के किनारे दो दो लघु स्तम्भ भी स्थापित हुए हैं जिन पर  कमल पुष्प दल उत्कीर्णन  से कुम्भी निर्मित हुयी हैं।

छाज /ढुड्यार /गवाक्षों के निम्न ढक्क्नों में कला -

-

पहले तल के छाज /ढुड्यार /गवाक्षों के निम्न ढक्क्नों में सपाट कला है।

दूसरे तल के छाज /ढुड्यार /गवाक्षों के निम्न ढक्क्नों में भिन्न भिन्न प्रकार की कला उत्कीर्णन हुआ है।  एक ढक्क्न में  चार हृदयाकार पीपल पत्तियों जैसी आकृतियां अंकित हुयी हैं।  दूसरे ढक्क्न में घड़े के अंदर पत्तियों का जैसा अंकन हुआ है व बाहर लम्बी पत्तियां दृष्टिगोचर हो रही हैं।  तीसरे ढक्क्न में ज्यामितीय आकृतियां अंकित हई हैं संभवतया आकर्षण हेतु।  चौथे ढक्क्न में  लघु पत्तियों का सुंदर अंकन हुआ है।

पहले व दूसरे तल की मोरियों /खिड़कियों के स्तम्भ सपाट  ही दृष्टिगोचर हो रहे हैं।

निष्कर्ष निकलता है प्रस्तुत भवन /बाखली भव्य है व भवन में भव्य , आकर्षक काश्त कला उत्कीर्णन हुआ है जिसमे ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण  प्रयोग हुआ है।

-

सूचना व फोटो आभार: जगदीश चंद्र 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

 

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.