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Mar
02

धूम्रपान विधि व चिलम नळिका लम्बाई विधान

 

 

धूम्रपान विधि व चिलम नळिका लम्बाई विधान  

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 

(महर्षि अग्निवेश व दृढ़बल प्रणीत)

 खंड – १  सूत्रस्थानम , पंचौं  अध्याय ४४   बिटेन  – ५०  तक 

अनुवाद भाग -   ४५ 

गढ़वाली म सर्वाधिक  अनुवाद करण  वळ अनुवादक - भीष्म कुकरेती 

  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )

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!!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

धूम /धुंवां कन पीण  चयेंद -

विरक्तादि से भिन्न, बारा वर्ष से उब, नयाणो समय आदि म नासिका दोष वळ या आँख म आश्रित हूण पर नासिका /नाक से धूम्रपान कारो।  कंठ या गौळ  दोष म मुख से धूम्रपान करण  चयेंद। जु धुंवा नाक से लिए गे हो वै तै मुख से भैर गडण  चयेंद अर नाक से ना।  किन्तु मुख से धुंवा पीण पर धुंवा नाक से भैर  नि गडण।  मुख से लियुं  धुंवा मुख से ही भैर  गडण  किलैकि  नाक से भैर गडणम आंखों पर हानि हूंद।  ४४ -४५।

 धूम्रपानौ  आसन -

अकुटिल सरैल  आंख , हथ पाँव सर, पीठ , ग्रीवा , सीध रखिक , धूम्रपानम मनोयोग  करि  भल प्रकार से , शांत बैठिक तीन तीन सुट्टा /दम  एक दगड़ी मरण  चयेंद।  कुल नौ समय  पीण  चयेंद , पींद समय नाकौ एक दुंळ बंद कर लीण , ये प्रकार से द्वी नासिकौं  से  हीन  से हीन  समय  धुंवा लीण  चयेंद।४६।

धूम्रपान नळिका / नळी -

वैरेचनिक  धूम्रपान म  नेत्र नळी  २४ अंगुळ  हूण  चयेंद।   स्नेहिक धूम्रपान  कुण  नळी  ३२ अंगुळ की हूण  चयेंद।  प्रायोगिक धूम्रपान की नळी ३६ अंगुळ की हूण  चयेंद।  ४७।

नळिका  की संरचना -

पर्व गाँठ गिरह सीधे तीन सीधी गिरह वळि गिरहों  पर ठीक प्रकार से मिलीं हो , अर अगनै   मुख पर बेर सामान नळिका हूण  चयेंद।  नळिका  बणाण  वळो  द्रव्य बि वस्ति की नळिका  जन ही हो।  ४८

चौबीस या छतीस अंगुळ लम्बी नळिका  म दूर से आणौ कारण तीन गिरह गांठ  हूणौ  कारण धूम्र को तीक्ष्णता /कटास  हीन  ह्वे जांद अर  बेर जन मुख से धुंवा एकदम वेग से नि आंदो।  अर उचित समय व मात्रा म लियुं  धुंवा इन्द्रियों तै हानि नि पंहुचांदो।

उत्तम प्रकार  का धूम्रपान का लक्षण -

जब उरस्थल (छाती ), गौळ म ,सरम हळ्को पन  आयी जावो व कफ पतळु  ह्वे जावो तो धामंडपाण तै उचित समजण  चयेंद।  ४९, ५०।

*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

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