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Oct
17

नागलिंग (पिथौरागढ़ ) भवन में काष्ठ कला


 

नागलिंग ( दारमा  घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १ में भवन काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन

   Traditional House Wood Carving Art  of  Nagling  , Pithoragarh

कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन -530

 

 

संकलन – भीष्म कुकरेती 

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नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १ ,  तिमंजिला  है व ऊपरी भाग देख लगता है जैसे भवन ऊपरी पश्चमी उत्तरकाशी या जौनसार बाबर का भवन ही हो।  भवन का तीसरा मंजिल पूरा लकड़ी का है।  भवन के तल मंजिल में दो कमरे व दो खोली नुमा द्वार हैं।  खोलियों , कमरों के  द्वारों के स्तम्भ /सिंगाड़ों  की संरचना एक जैसे ही है।  सिंगाड़ों के आधार में अधोमुखी व उर्घ्वगामी  कमल दल के अंकन से कुम्भी निर्मित हुए हैं।  कमरों के मथिण्ड /मुरिन्ड  चौकोर हैं व लहरों जैसे चित्रांकन का उत्कीर्णन हुआ है।

खोली के शेरश में तोरणम हैं व तोरणम के स्कन्धों में भी कला कृति उत्कीर्णन हुआ है।

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  के पहली मंजिल में दो जोड़ी छाज  हैं व  छाजों के स्तम्भ (सिंगाड़ ) व तोरणम में  वही की वही  कला उपस्थित है जो खोली के सिंगाड़ों /तोरणम में विद्यमान है।

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  तीसरी मंजिल में भवन की दीवारें सभी ज्यामितीय कटान से निर्मित कड़ियों , XX  जाली व तख्तों से निर्माण हुआ है।

 

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  में प्रकृतिक व ज्यामितीय कला अलंकरण विद्यमान है।

सूचना व फोटो आभार:  जय दसौनी 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

 

कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

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