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Oct
22

निंद रुकणो उपाय व निंद नि आणो कारण

 

निंद रुकणो उपाय व निंद नि  आणो कारण 
 नींद रोकने उपाय व निद्रा नाश के कारण 
चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  
 खंड – १  सूत्रस्थानम ,  इक्कीसवां   ध्याय  (  अष्टौनिंदितीय अध्याय   )   पद  ५२  बिटेन ५७   तक 
  अनुवाद भाग -  १७२ 
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 
हर्चीं निंद लाण -
तैलमर्दन, उबटन नयांण,ग्राम्य वा जलचर प्राण्युं  मांश सुरवा चौंळ , दही ,घी तेल, मद्य ,मन प्रिय  वस्तु , मनोकूल सुगन्धि, शब्द , मुट्ठी भरण , आंख्युं तर्पण , शिर व मुख, शरीर पर चंदनापि लेप , अच्छा दिसाण, सुंदर घर अर उचित समय पर यी वस्तु कै कारण से हुईं नष्ट हुईं  (हर्चीं ) निंद उतपन्न कर दींदन। ५२-५४।
निंद नि आण दीणो  कारण  -
शरीर विरेचन, शिरो विरेचन , वमन ,भय , चिंता , क्रोध , कथा सुणन ,मैथुन , सर छेदन , उपवास, दुःखदिँदेर दिसाण , सत्वगुण की अधिकता , तमोगुण पर विजय , यी कारण निंद नि आण दींदन।  इलै व्यक्ति तै अहितकारी, अबांछनीय  निंद  रुकणों  बान यूंतै वर्तण चयेंद।  ५५ -५६।
निद्रा नाशक हौर कारण -
कार्यं व्यस्त रौण, बुढ़ापा, विकार , शूल डाउ , सुभाव से इ कम निंद , वायु या वात रोग , उन्माद , आदि निद्रा नाशक कारण छन। ५७।
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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   २५४-२५५
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम 
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