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Oct
23

छै तरां की निंद छह प्रकार की नींद

छै   तरां  की   निंद 
छह प्रकार की नींद 
चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  
 खंड – १  सूत्रस्थानम ,  इक्कीसवां   ध्याय  (  अष्टौनिंदितीय अध्याय   )   पद  ५८  बिटेन   ६२ तक 
  अनुवाद भाग -  १७३ 
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 
निंद छै तरां की हूंदी -तमोजन्या ,कफ जन्य निंद , मन अर सरैलक थकण से  आगन्तुकी रोग ( सन्निपात , जौर आदि  )  से , रात्रि क स्वभाव कारण जनित निंद। यूं छै निंद मदे रात्रि स्वभाव जनित निंद धाय जन हूंद अर्थात मनिख पोषक हूंद।  तमो गन जनित नींद पापक मूल कारण च।  शेष निंदों  गणत रोग म इ हूंद।  ५८ -५९।
निन्दित व्यक्ति ( अति म्वाटो -पतळु ) , बिंडी निन्दित ( जु नि चयेंद ) ,निन्दित हूणो कारण , दुयुं दोष , औसध , जौंकुण निंद हितकारी हूंद , जौंकुण अहितकारी च , अति निंद -अनिद्रा का कारण , औषध अर जौँ कारणों से नींद आंदि , यूं सब बातों तै  आत्रेय ऋषिन  २१ वां अध्याय (अष्टौनिंदितीय अध्याय) म बोली याल।  
२१ वां अध्याय समापन 
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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ    २५५
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम 
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