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Aug
15

Let Us Learn Garhwali Part- 59

Let Us Learn Garhwali Part- 59 आवा गढवाळी सिखला , फड़की ५९

(Learn Garhwali, Learn Kumauni, Learn Himalayan Languages, Learn Uttarakhandi Languages)

तकनिकी युग अपने चरम पर है…कैसे…तो ज्ञान बढ़ने के लिए निम्नलिखित साधारण, फिर भी ठीक-ठाक चुट्कुलें पढ़ें और ठीक लगे तो मुस्कराएं….

सल्ली पट्टी (तकनीक) जुग चंख मा च . कनकैक ….त …’ ज्ञान बढोणो बान कुछ चबोड़ इ ह्व़े जाओ . रौंस/मजा आओ त मूल मूल हैन्सी जैन हाँ !!!!!!

हिंदी – श्री केशर सिंग बिष्ट

गढ़वाळी अनुबाद -भीष्म कुकरेती

१. भिखारी :बीबीजी कुछ खाने को हो तो दे दो

मंगत्या : ये ! ठकुर्याणि ! कुछ खाणो बणयूँ ह्वाऊ ट द्याव्दी
बीबीजी :अभी खाना बना नहीं है

ठकुर्याणि – ह्यां ! मीन अबि रस्वै नि पकै
भिखारी :ओके बन जाये तो एफबी पे उपडेट कर देना …मैं आ जाऊंगा

मंगत्या: भलो ! भलो ! जब रस्वै पाकी जाली त मैं तैं फेसबुक (FB ) मा रैबार दे दियां हाँ ! .. मी चाट घाळीक ऐ जौलू

२. औरत एक भिखारी से-
मैंने तुम्हे कहीं देखा है?

२- एक कज्याण मंगत्या देखिक : ए ! इन लगद, मीन त्वे तैं कखी दिख्युं च ?

भिखारी – क्या मैडम कल ही तो FB पर CHATTING की थी और आपने मेरी
फोटो पर Comment भी दिया

मंगत्या: क्या ! ए ठकुर्याणि जी ! तुम बि त ! ब्याळी त हम दुयूंन फेस बुक मा मिसैक छ्वीं (चैट) लगैन अर तुमन मेरी फोटकौ बड़ें बि कार बल मी क्त्गा बिगरैल छौं .. ….

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