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Sep
23

तीनि कचांग लगाई अर त्वी ऐ गे मलम लगाणो ?

गढ़वाली हास्य, व्यंग्य साहित्य

चबोड़ इ चबोड़ मा , हौंस इ हौंस मा

तीनि कचांग लगाई अर त्वी ऐ गे मलम लगाणो ?

चबोड्या: भीष्म कुकरेती

[हास्य-व्यंग्य; जसपुर वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; ढांगू वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; गंगासलाणी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य;सलाणी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; गढ़वाल वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी गढ़वाल वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; उत्तराखंड वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी उत्तराखंडी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य;मध्य हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी मध्य हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी उत्तर भारतीय द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; भारतीय द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; दक्षिण एशियाई द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; एशियाई द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; पूर्वी महाद्वीपीय साहित्यकार द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य लेखमाला]

तीनि कचांग लगाई अर त्वी ऐ गे मलम लगाणो ?

ओहो ! मंमोहान जी ! परसी बड़ो घंघतोळ ह्व़े ग्याई जब आपन राष्ट्र तै रैबार द्याई. क्या बात च जी ? आपौ खुणि त लोग बाग़ बुल्दा छया बल आप एक गैर राजनैतिक मनिख छन . पण इ सौब बेकार कि बात बुल्दन. आप से बड़ो राजनीतिग्य अबि कवी नी च. आपि त ये रिफौर्म का तूफान लै छ्या अर जैन इथगा रगड़ बगड़ करी दे अर अब आपि तूफ़ान से बचणो बान मनरेगा जन टेंट का कील घटणा छया. तुम्ही ने दर्द दिया क्या तुमि दवा भी दोगे ?

वाह मनमोहन जी ! तुमसे बड़ो राजनीतिग्य कु ह्व़े सकदु जु पैल अपण मंत्र्युं तै , मुख्मंत्र्युं तै , एम्.पीयुं तै घूसखोरी करण दीन्दा अर फिर बुल्दां कि कोंग्रेस अर मेरी सरकार घूसखोरी रुकणा बान जमानो से कटिबद्ध च. वाह मनमोहन जी ! क्वी तुम मांगन सीखो कि पैल कैकी अंगुळि काटो अर फिर कट्या पर अफिक मूतो बि. वाह साब क्या बात च हैं ! पैल जनता क अंग भग कारो अर फिर भसभसो /रीतो (खोखला) भाषण से सर्जरी कारो हैं! आप तै त इंटरनेशनल मेडिकल कौंसिल से नई डाक्टरेटकि डिग्री मिलण चयेंद कि जु दूसरों जिकुड़ी पर खुद चीरा लगान्द अर फिर भाषण का पेन रिलीवर बि दींदु. मनमोहन जी ! आप यीं भसभसी पेन रिलीवर कि दवा क पेटेंट करी द्याओ .अब जब इतिहास मा आप तै बड़ो बेकार प्रधान मंत्री ही माने जालो त ह्व़े सकुद च ये भसभसो पेन किल्लर /रिलीवर की इजाद का बान इ सै आप अमर त ह्वेल्या. तुमि ने डा दिया तुम इ दवा भी दोगे ?

अहा आपक भाषण बि क्या छौ हैं! भड़यइं चखुलि उड़ाण मा आप त धूर्त से बड़ो धूर्त राजनीतिग्य तै बि मात दे सकदवां भै! कुज्याण कतगा दिन, कथगा मैना , कथगा साल ह्व़े गेन धौं! आपन बोलि छौ कि बस भोळ आण द्याओ मैंगाई खतम इ समजो .वाह मनमोहन जी पैल आपि मंहगाई क एसिड कि बरखा करदवां अर फिर द्वी चारो तै मंहगाई को एसिड से बचणो छत्रा बंटदा . अर मजा या च कि आप एंटी ऐसिडौ छत्रा बंटद दै दगड मा डीजल पेट्रोल का बढया रेट का लूण-मर्च बि घाव पर घसोड़ दीन्दा. मनमोहन जी ! मारी अर वां पर महामारी क खेल सिखाणो बान आप एक इंटरनेशनल स्कूल खोलि इ द्याओ . इतिहास आप से सीखल कि कन पैल दर्द दिए जांद अर फिर दर्द मिटाणो मलम से दर्द हौरी बि बढ़ए सक्यांद. हे महापुरुष ! जनता कु नयो दर्द से पुराणो दर्द बिसराणै /भुलाणो कौंळ /तकनीक अन्वेषण का बान आप तै त भारत रत्न अर नोबल पुरुष्कार मिलण इ चयेंद. आप ब्वालो त मि सोनिया बैणि से भारत रत्न क बान आपकी सिफारस कौरी द्यूं?

आप पैल इन करतब करदवां कि मंहगाई उभारी खुण दौड़ण लगी जांद अर फिर आप वीं मंहगाई तै रुकणो बान आप फौरेन इन्वेस्टमेंट, उद्योगतियुं तै सब्सिडी दीणो तंतर मंतर, झाड ताड़ करदवां पण या निर्भागण मंहगाई इन च कि आपक तंतर, मंतर, झाड ताड़ कु फरक यि बिथ्या पर हुंदी इ नी च . उल्टा आपक रिफौर्मी जंतर मंतर से या मंहगाई उड़ण बिसे जांद .

इन च मनमोहन जी ! जब क्वी बि डा पुटुक मा ह्वाओ अर दुसर मिल्कौं सकासौरि मा मलम हत खुटों पर लगैल त पुटकौ दरद त नि जालो हाँ हत खुटो पर नै बीमारी सौरि जाली . भैर मुल्कों सकासौरि जगा आप क्वी भारतीय हिसाबन रिफौर्म लांदा त ह्व़े सकुद च कि आप सचेकि इतिहास पुरुष बौणि जांदा. सकासौरी मा लौड़ गौड़ लमडाण इ छयाई, अनर्थ करण इ छयाई त ये मनमोहन जी ! आपन किलै अर्थशाश्त्र मा पी.एच डी. कार. पी एच.डी करणो असली मकसद हुंद नई खोज करणो ढब . पण आपन त नकलची बौणिक अपण नाम बि गुवाई अर भारत को बि अनिष्ट कार , सबी जगा, सबि दर्दों कि , सबी बीमार्युं की एकी दवा नि होंदी माराज. भारतीय मरज कि नई दवा खुज्याओ अर छ्वाड़ो ये नकलची रिफौर्म कि रट माराज ..

Copyright@ Bhishma Kukreti 23/9/2012

गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; जसपुर वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; ढांगू वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; गंगासलाणी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य;सलाणी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; गढ़वाल वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी गढ़वाली वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; उत्तराखंड वासी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी उत्तराखंडी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; मध्य हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी मध्य हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य;प्रवासी हिमालयी द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; प्रवासी उत्तर भारतीय द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; भारतीय द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; दक्षिण एशियाई द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; एशियाई द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य; पूर्वी महाद्वीपीय साहित्यकार द्वारा गढ़वाली में हास्य-व्यंग्य लेखमाला जारी …

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