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Nov
08

एक आम गुंडे का आत्मसमान

मेरा देश महान है आज कल एक एड चला है ” इंडिया इस इन्करैडिबल ” जिसके तहत मुझे क्या दुनिया के तमाम फारन टुरिस्टो को कई दफा इतनी भयंकर तकलीफों का सामना करना पड़ता है की क्या बताये तब पता लगता है की कितना एनक्रैडिबल है ! खैर भारत महान है इन सब मामलो में , मान लेते है !

मेरे भारत के जन्म भूमी में बड़ी बड़ी हस्तीयो ने जन्म लिया है ! बड़े बड़े आचार्य , बड़े बड़े संत , बड़े बड़े राज नेता , बड़े बड़े अभिनेता ,बड़े बड़े बाबा , मौलबी हुए वही अगर कोई नामी गुंडा पैदा हो जाता है तो पुलिस , राजनीतक दल , आम आदमी के कान क्यों खड़े हो जाते है ,, न, न एक सवाल है ?

अरे श्रीमान गुंडे दो प्रकार के होते है एक राजनैतिक और दुसरा आम ! ये कौन है ? क्यूँ है ? और क्यों बनते है या बनाये जाते है ? ये हम से पूछिए , हम, आम जनता से ! जो समाज सेवा करते है और अपने को सामज सेवी कहते है उसका समाज में उतना ही बड़ा रुतवा है ! जो
मुह में राम राम और बगल में छुरी लिए फिरता है जिसके इशारे पर कितने ही क़त्ल किये जाते है वो एक राजनैतिक एक गुंडा है एसे गुंडे में और उस आम गुंडे में अगर अंतर देखना हो तो, ये समाज सेवी गुंडा जो सामज सेवक बनता है जिसकी पहिचान पुलिस और ऊपर सरकार तक होती है जो आये दिन सरकार के हित में काम करता है वो तो पार्टी ने बनाया होता है और आम गुंडा जिसे पुलिस ने मार मार कर बनाया हुआ होता है वो अपने ऊपर हुए अत्याचार और अपने इर्द गिर्द होते अत्याचार के बिरुद्ध लड़ता है ! खैर गुंडा तो गुंडा ही है ना !गुंडा औ राजनैतिक उर्फ़ समाँजसेवी गुंडा के आत्मसमान की बात कीजाये तो दोनों में बहुत अंतर है .समाज सेवी गुंडे का कोइ आत्मसमान नहीं होता है वो तो बड़े नेता के छत्र छाया के तहत जीता है जिसकी अपनी कोई पहिचान नही होती ! अगर वो नेता, उसके ऊपर से अपना हाथ उठा दे , तो ओ कुछ भी नही ! उसके बाद वो चिलाये या रोये उसको कोइ सुनने वाला नहीं होता जबकि आम गुंडा अपने गैंग और उसके आत्म समान के लिए कुछ भी , कुछ भी करने को हमेशा तयार रहता है उसे किसी से पूछने के जरूरत नही पडती और नहीं ओ किसिसे डरता है ! उसका आत्मसमान उसका गैंग है और उसका गुर्गा ! उसके लिए गैंग और गैंग का रुतुवा सबसे बड़ा है ! वो कहने को गुंडा जरुर है लेकिन वो नेताओं की तरह जनता को झूठे अहस्वाश्न नही देता ! वो अगर वादा करता है वो उसे तो पूरा करता है ! इनकी तरह से को आयोगा नहीं बिठाता ! उसे किसी कोठी . किसी मत्रालय के चक्कर नही काटता वो बाबुओ के तलवे नही चाटता ! उसे जो करना होता है वो तुरँत करता है ! वो कोइ जातिबाद , भाषाबाद , अलगावबाद का राग नही अपनाता ! उसका एक मात्र बाद है तो वो है गुन्ड़ाबाद !

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