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Oct
28

गुंडा -राज

( ये कबिता महाराष्ट्र के बिधान सभा में उस घटना पर है जिस में में हिन्दी में शपथ लेने पर एक उमीदवार को पीटा गया था )

मैंने , देखा –

उसने देखा
हम सब ने देखा
हिन्दी को अपमानित होते
अपने से नहीं,
अपनों से ,
महाराष्ट्र के बिधन सभा में
सबके सामने
सबके आगे
भरी सभा में द्रोपदी के तरह

वो , रोई नहीं
सडको में,चौराहों में
वो रोई.वहाँ –
जहाँ कानून बनते है
लागु होते है
वो गिडगिडाई –एस युग के
सभ्य कह जाने वाले इन्सानो के आगे
जहां,
सब मौन थे
महा भारत के भीष्म के तरह !

वो उसे 13 थे
कहने को वे ..
ना तीन में थे ना तेरह में थे
कहते तो वे …
अपने को नेता थे
अक्ल से/ शक्ल से , नेता कम
गुंडे ज्यादा लग रहे थे !
भरी सभा में ..
बिस उगल रहे थे जातीबाद का
कंस के तरह !

हाथापाई / गुन्डागिर्दी / मारधाड
जो कल तक–
सडको में किया करते थे
आज वो —
बिधान सभा में कर रहे है
बिना झिझक / बिना रोके
सरे आम /सबके सामने
माइक तोड़ते है
थपड मारते है
वो भी —-
एक चुने हुए उमीदवार पर !

जो —
राष्ट्र को गौरबबिन्त करते हए
हिन्दी में शपथ ले रहे है
हिन्दी वनाम मराठी के
किसी पार्टी से जुड़े के चंद मवाली
उस शक्श के साथ मार्म मारी कर रहे है !

इस काण्ड के पीछे
जरुर कोई है
जो कर रहा है / करवा रहा है
ये गुंडा – राज ..नहीं तो
और क्या है ?

12 नमाम्बर 2009

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