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Oct
15

एकाकी पन

मत पूछो मुझ से

एकाकी पन क्या होता है
न गुजरे किसी पर ऐसा छण
मेरा मन कहता है !

दिखने मै तो वो यूँ
इस युग का लगता है
भावनाओं में खोया खोया
वो तो , जड चेतन से उखडा उखडा रहता है !

जीवित है वो, जीवित है बस
इतना काफी है
प्रशन पूछने हो अगर
जबाब उसकी आँखों में होता है !

कभी कहीं अगर
यादों के परत खोल जाए
पल भर के लिए नैनो में नया पन
पर चेहरा तो , मौन को ओडे होता है !

चाह मरी होती है उसकी
दृषटी पथराई सी …
संसार उखडा -उखडा उसका
वो तो बैरागी जीवन जीता है !

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