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Nov
12

दीप जलाने हो तो ?

दीप जलाने हो तो
मन के दीप जलाये
नफरत की तिमर हटे
चेहरों पे मुस्काने आये !

तम का तमस हटे
बिश्वासों का शुत्रपात हो
जन मांनस के उर में जागे
प्रेम मिलन की लो हो
जगमग जग हो उजियारा
लौ दूर से दिये दिखाये !

बिघ्नो के लौ जले
क्षितीज पर नया सबेरा हो
इन्द्र – धनुषसा बिखरे प्यार
शान्ति मिलन के अवसर हो
दिशा दिशाओ से हटे अंधियारा
उजियारा उभर के आये !

पुलकित हो दिन-रात
हर्षित स्याम-सबेरा हो
आशाओं की बाती में
कल के सपनों का घर हो
थके न मनके भाव —-
भावनाओं के दीप जलाये !

द्वे रहित हो मानव
मानव मानव का सहचर हो
कटुता मिट जाय मन से
लग्न प्यार की हो ——
धरा, गगन और मन
तब सब मिलकर जोत जलाये !

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