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Feb
23

डौर ना ! हिन्दुस्तान आतंक्युं कुण चारागाह च

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

सौज सौजम मजाक-मसखरी

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा

डौर ना ! हिन्दुस्तान आतंक्युं कुण चारागाह च

चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती

(s =आधी अ )

” खाला ! वधाई हो ! अंतर्राष्ट्रीय दहसतगर्दी संगठनन जावेद तै आतंक फैलाणो चुनि अर वै तै नेपालो रस्ता हिन्दुस्तान भिजे जालो ।”

” पण बुबा !म्यार जावेद त मजहब रक्षा बान जिहादि बौण अर तू दहसत गर्दी संगठन को नाम लीणि छे।”

“ओ खाला इख मजहबी जिहाद्युं तै क्वी घास नि डाऴदो पण दहसत गर्दी संगठन का नाम से खूब रुपया कट्ठा होन्द।”

” ओ होलु क्वी नयो टुटब्याग। ह्यां वैन हिन्दुस्तान जैक करण क्या च?”

” कुछ जादा ना! द्वी चार भीड़ वाळ जगौंम जिहाद को नाम पर टाइम बम फुड़णन अर क्या?”

” पण बुबा इन मा बेकसूर लोगुं ज्यान नि जालि?”

” वो हो ! खाला! अचकाल जेहाद को काम दहसत सौराण (फैलाण) च अर इन मा बेकसूर लोगुं ज्यान लीण भौत जरूरी होंद।”

” पण बुबा मि तै भौत डौर लगणु च बल यु जिहादि जावेद नेपाल सीमा से हिन्दुस्तानै सीमा पर पकड़े ग्यायि त। उखम हिन्दुस्तानो खुफिया विभाग काम करदो होलो कि ना?”

” खाला त्वी बि ना! उखम हिन्दुस्तानो खुफिया विभाग कारगर होंदु मजाल च नेपालो रस्ता क्वी तस्कर, ड्रग ट्रैफिकर-ट्रांसपोर्टर अर दहसत गर्दी हिन्दुस्तानs धरतीम घुसी सकदा।”

” पण यां! फिर बि कखि पकड़े गे तो ?”

” क्यांक पकड़े गे ! उख सीमा पर इनि जि चौकस धर पकड़ होंदि त हिन्दुस्तानाम इथगा आतंकवादी हमला होंदा?”

” ह्यां पण पुलिस?”

” ओहो खालाजान! हिन्दुस्तानी पुलिस ले इथगा जि इमानदार होंदि त हिन्दुस्तानम अपराध बढ़दा क्या? याद च त्वै तैं जब मामूजान ड्रग का नाम से इख बिटेन हिन्दुस्तान आर. डी. एक्ष. लीग्या छा अर फिर वापस बि ऐ छया त याद च वापस ऐक क्या बोलि छौ उन ?”

” हाँ! वूंको बुलण छौ बल हिन्दुस्तानम पुलिस का आँखों पर घूस की पट्टी बांधि द्यावो त पुलिस फिर कुछ नि दिखदि। पण बुबा! वो बात त सन उन्नीस सौ तिराणे की छे तब बिटेन हिन्दुस्तानन कुछ ना कुछ त इंतजाम कौरि आल होला।”

” हां सन तिराणे बिटेन राजनीतिज्ञोंन लाखों दें दहसतगर्दी खतम करणै सौं जरूर घटिन पण असलियतम कुछ नि कार। उखाक राजनीतिज्ञों आँख पर हिन्दुस्तान बचाणों चस्मा नि लग्युं बल्कणम वोट खुज्याणो ऐना लग्युं च,आतंक खतम करणों जजबा कें बि राजनैतिक पार्टीम नी च त हम लोगुं कुण हिन्दुस्तानम आतंक सौराण (फैलाना) सरल च।”

” पण मीन सूण बल उख हिंदुस्तानम कथगा इ खुफिया ऐजेंसी छन जो पता लगांदन बल हिन्दुस्तानक दुश्मन क्या करणा छन।”

” हाँ हिन्दुस्तानम कथगा इ केन्द्रीय खुफिया ऐजेंसी छन अर इनि राज्यों अपण अपण दुन्या भौरक खुफिया ऐजेंसी छन।”

” जै देसम इथगा तरां खुफिया ऐजेंसी ह्वावन त उख तुम सरीखा दहसतगरदी दहसती काम तै कनै अंजाम दींदा भै?”

” ह्यां! दस तरां खुफिया ऐजेंसी हूण से अपराध खतम नि होंदन। उख हिंदुस्तानम एक खुफिया ऐजेंसी तै पता इ नि चलदो बल हैंकि खुफिया ऐजेंसीम क्या क्या सूचना छ्न. फिर केन्द्रीय खुफिया विभाग अर राज्यों खुफिया विभागों मा आपस मा तालमेल नाम को क्वी ठिकाणो नी च उल्टां वो आपसम अपण अधिकारों अहम का झगड़ा लॆकि जादा चिंतित रौंदन। इनमा अपराध्युं अर हम दहसतगर्दयुं सूचना एक विभाग बिटेन दुसर विभाग तलक आन्दि-जान्दि नी च।”

” ह्यां पण मीन सूण बल उख केन्द्रीय गृह मंत्री कुछ दिन पैलि राज्यों तै सूचना दींदु च बल क्वी दहसतगरदी कारनामा हूण वळ च।”

“हां पण इन सूचना बाद राज्यों पुलिस खानापूरी करणों गस्त बढ़ाई दींदी अर खालाजान जब खाली खानापूर्ति बान पुलिस गस्त ह्वावो त हम शातिर दहसतगर्दी थोड़ा पकड़े जांदवा, छ्वटा -छ्वटा चोर लपेटामा ऐ जांदन बस।”

” पण मीन सूण उख भीड़ वळ जगौंम क्लोज सर्किट कैमरा लग्यां रौंदन।”

” खाला तू बि ना भौत इ सीधि मनखिण छे। क्लोज सर्किट कैमरों तै क्वी नि दिखुद, इ कैमरा बि खानापूर्ति बान लग्यां छन। छै छै मैना बिटेन क्लोज सर्किट कैमरों तार टुट्यां रौंदन, कैमरों लेंस पर कीच लग्युं रौंद अर क्वी कैमरों देख भाळ करण वाळ नी हॊन्द।”

“पण बेटा दहसत गर्दी कांड हूणो परांत त पकड़ा-पकड़ी होलि कि ना?”

” हूंदी च पण हम पर कुछ जादा फरक नि पड़दो किलैकि हम लोग उखाकि धर्म की राजनीति का फायदा उठैक भाजिक अपण देस ऐ जांदा।”

” पण ब्यटा! उखाक संसद आदि छन। सांसद विधायक बि त कुछ कारल कि ना?”

” हां ! प्रजातंत्र को धरम निभाणों बान विपक्षी सांसद या विपक्षी विधायक सरकारी राजनितिक दल पर बड़ी बड़ी भगार लगांदन अर राजकीय राजनैतिक दल विपक्षी दलों पर उथगा इ जोर से लांछन लगांदन। अर इन मा असली मुद्दा कखि कुण्या जोग ह्वे जांद।”

” पण फिर बि डौर ! द्वी चार दिन अखबार नेताओं बयानों से भर्यान्दन अर फिर सौब बिसरि जान्दन कि क्या ह्वे छौ ”

” ओहो खालाजान ! भारत की धरती दहसतगरदी बान एक नजीलो -उपजाऊ धरती च। हिन्दुस्तानम दहसत से लड़णो रणनीति रिऐक्टिव च ना की प्रोऐक्टिव त इन मा हम टेर्रीरिस्टों तै क्यांक डौर?”

” ब्यटा जु कूड़ इथगा खपचयुं ह्वावो, आज ना भोळ इन कूड़ भ्युं पोड़ल ही। वै पर बमग्वाळा दागणै क्या जरूरत?”

” हां उन त हम तै इन कूड़ पर बमग्वाळा फिंकणै जरूरत नी च पण हम बि अपणि आदत से मजबूर छंवां हमर बि त दहसतगर्दी नामो नयो धरम च त हम दहसत फैलान्दा।”

” हां त इन कौर वो फरीद, मुरीद आदि खालि छन वन तै बि भर्ती करी दे. ”

“ठीक च”

Copyright@ Bhishma Kukreti 23 /2/2013

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