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Mar
07

धोनीन क्लार्क मा क्या ब्वाल ?

गढ़वाली हास्य-व्यंग्य

सौज सौजम मजाक-मसखरी

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा

धोनीन क्लार्क मा क्या ब्वाल ?

चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती

(s =आधी अ )

” हेलो ! धोनी ! मि ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट कैप्टेन क्लार्क बुलणु छौं।”

” ओ गुड इवनिंग क्लार्क! यो तेरि आवाज तै क्या ह्वाइ? इन लगणु जन बुल्यां तु बीमार ह्वे गे।”

” अरे अबि अबि मीन नेट पर ऑस्ट्रेलियन अखबार पढ़ी।”

” अर अखबार पौढिक त्यार ज्यु बुल्याणु होलु कि अब्याक अबि क्रिकेट कैप्टेंसी ही ना क्रिकेट खिलण इ छोड़ि द्युं।”

” हाँ भै! धोनी !म्यार ज्यू बुल्याणु च ….। अरे हेराल्ड सन अखबारौ पत्रकारन लेखि कि आज ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट की मौत ह्वे गे। अब इन मा कै बि ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटरक ज्यू क्रिकेट मा कनकै लगि सकुद?”

‘ हां हूंद च। जब मेरि टीम ऑस्ट्रेलियाम हारि तो इन्डियन प्रेसन बि इनि कुछ लेखि छौ। वै बगत म्यार बि ज्यू बुल्याइ बल क्रिकेट छोड़ि ‘ मलाया की शराब की एजेंसी ले ल्यूं। अर अब यी अखबारनबीस बुलणा छन बल धोनी जन कैप्टेन आज तलक यीं दुन्याम पैदा इ नि ह्वे।”

” ये धोनी ! पता च जौन कबि क्लब क्रिकेट नि ख्याल वो लिखणा छन कि मि तैं अर वाटसन या वार्नर तैं स्पिन कन खिलण चयेंद। कन ऑफ स्पिन तैं स्पिन होण से पैलि इ खिलण चयेंद ”

” हां भै क्लार्क! इनि होंद जब मेरि टीम तुम ऑस्ट्रेलियन टीम से हारि छे त जौंन गिल्लि डंडा तक नि ख्याल वो हम तै अखबार से नसीहत दीणा छया बल फास्ट बौल कन खिलण, उछ्ल्दि गिंदी पर मिडल बैट कनो अडाण अर बाउंसर पर हुक कनो मारण।”

” अर हाँ धोनी! यू नो ! जौन भारत कबि नि द्याख, जौन कबि नि द्याख कि मार्चम हैदराबादम कनि गरमी, तैंची अर उमस होंद वो लिखणा छन बल म्यार फास्ट बौलर पैटीनसन तै डेढ़ सौ किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार से गिंदी चुलाण चयेंद।”

” क्लार्क ! हूंद च। जब मेरी टीम ऑस्ट्रेलियाम हारणि छे त इन्डियन मीडिया भारतीय पाठकों तैं सिखाणों छौ कि ऑस्ट्रेलिया की आबो हवा मा कन खिलण चयेंद।”

” धोनी !पता च एक ऑस्ट्रेलियाई अखबारन ल्याख कि ऑस्ट्रेलियाई टीम म कुरकरा बिस्किट जन बि जान नी च।”

” हूंद च हूंद च ! रे क्लार्क ! जब मेरि टीम ऑस्ट्रेलियाम हारणि छे तो कथगा इ नौसिखिया पत्रकारुन ल्याख बल भारतीय टीम बालू का टीला है जो एक फास्ट गेंद से ढह जाती है।अर अब वो ही पत्रकार लिखणा छन बल भारतीय क्रिकेट टीम चीन की दीवार है जिसे भेदना किसी के बस में नही है। ”

” धोनी ! गजब त तब ह्वाइ जब एक पत्रकार लिखणु च बल क्लार्क ऑस्ट्रेलियन टीम की फिकर से जादा विज्ञापन की फिकर मा लग्युं रौंद।”

” ओहो क्लार्क ! यो इ होंद जब मेरि टीम ऑस्ट्रेलिया से हरणि छे तों पत्रकार लिखणा छा बल चूंकि धोनी को ध्यान विज्ञापन बटोळण पर हि रौंद ना कि इन्डियन क्रिकेट टीम तै समाळणम तो भारतीय टीम हरणि च ।”

” धोनी ! हद त या च बल कथगा इ कमेंटेटर बुलणा छन बल ऑस्ट्रेलियाई टीम मा एका नी च , यूनिटी की भारी कमी च।”

” क्लार्क ! रुणै जरूरत नी च जब टीम हार्दि च तो लोगुं तै तागत मा बि कमजोरी दिखेंद।”

” यां हे धोनी ! कथगा इ पुराणा क्रिकेटर लिखणा छन बल क्लार्क मा कैप्टेंसी का एक बि गुण नि छन अर मेरि निर्णय शक्ति पर शक करणा छन।”

” अरे क्लार्क भुला! वो इनि होंद। जब मेरि टीम ऑस्ट्रेलियाम हारी छे तो कथगा इ पत्रकार अर मोहिन्दर अमरनाथ अर वैक दिल्ली का दगड्या जन कि कीर्ति आजाद, अशोक मल्होत्रा जनोंन बोलि बल महेंद्र सिंह धोनी तै कैप्टेंसी छोड़ि दीण चयेंद।”

” यार धोनी ! इन मा कैप्टेंसी कनै करे जावो?”

” डियर क्लार्क ! म्यार त एकी सिद्धांत च बल आज हार तो भोळ जीत बि होलि ही।”

Copyright@ Bhishma Kukreti 7 /3/2013

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