«

»

Sep
28

अपण धरोहर अपण कोशिश: Hill Station Chaukori (चौकोरी)

उत्तराखंड में स्थित, यह हिल स्टेशन, किसी भी जगह से सुंदरता में कम नहीं है। हरी-भरी धरती, विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, कहीं घने जंगल तो कहीं धुएं से उठते बादलों के बीच दौड़ते प्राकृतिक दृश्य तो कहीं सन्नाटे को तोड़ती तरह-तरह के पक्षियों की मंत्रमुग्ध करने वाली गूंज, सबकुछ है यहां। लगभग 201 वर्ग कि.मी. में फैला चौकोरी समुद्रतल से लगभग 2010 मी़  की ऊंचाई पर बसा है। जहां से आप खूबसूरत बर्फीली चोटियों को देख सकते हैं। इनमें चौखंभा, त्रिशूल, नंदा देवी और पंचोली आदि शामिल हैं। यहां से आप 45 डिग्री के कोण से हिम चोटियों का नजारा देख सकते हैं, जबकि चौकोरी से इनकी दूरी 30 नॉटिकल मील है। बांज बुरांश और चीड़ के जंगलों व बाग-बगीचों से घिरा है चौकोरी।  पेड़ों के बीच से गुजरती सनसनाती ठंडी-ठंडी हवाओं से आप मदहोश हुए बिना नहीं रह पाएंगे।

चौकोरी आकर कोई उगते व ढलते सूरज को न देखे, ऐसा हो नहीं सकता। यहां बर्फीली चोटियों के बीच सूरज को उगते हुए देख आपके चेहरे पर भी एक अलग-सी चमक आ जायेगी। संकरे पहाड़ी रास्तों पर सुबह-शाम भेड़-बकरियों को चरते अनुशासन से एक कतार में जाते हुए देखा जा सकता है। वहीं मेमनों को गोद मे लेने की आपकी तमन्ना भी यहां पूरी हो सकती है। यहां आपको ट्रैकिंग का भी भरपूर मौका मिलेगा। यहां की रातें भी खूबसूरती बिखेरती नजर आती हैं। यहां का नजदीक शहर है ‘बेरीनाग’, जो यहां से करीब 290 मी़o नीचे की ओर है। चौकोरी से देख ऐसा लगता है मानो आकाश में तो तारे हों, शहर की जलती रोशनी भी तारों जैसी झिलमिलाती दिखाई देती है।

मौसम बरसात का हो तो कब घूमड़-घूमड़ कर बादल बरसने लगेंगे, आपको इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होगा, इसलिए अपनी तैयारियां कुछ इस तरह करके जाएं, जिससे घूमने-फिरने का मजा किरकिरा न हो। दरअसल शहरों की और यहां होने वाली बारिश में बहुत अंतर होता है। आमतौर पर बारिश के बाद मौसम में ठंडक पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। यहां की सुबह-शाम बेहद ठंडी हवाएं लिए होती हैं, फिर भी यहां आकर कोई भी होटल के कमरे में कैद नहीं होना चाहेगा। जब भी सैर-सपाटे पर निकलें तो मौसम के अनुसार कुछ गर्म कपड़े जरूर साथ रखें। चौकोरी अपनी प्राकृतिक छटा व मौसम के लिहाज से देश के खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक है। यह बात भी सच है कि बहुत लोग प्रकृति की गोद में बसे चौकोरी से अभी भी अनजान हैं। दरअसल चौकरी वह स्पॉट है, जहां प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं की गई है। यहां आपको कोई गाइड तो नहीं मिलेगा, मगर यहां के पेड़-पौधे आपसे बातें करने के लिए उतावले लगेंगे, यानी आप प्रकृति के इस वातावरण में खो जाएंगे। कोलकाता से यहां घूमने आए किशोर रॉय ने बताया कि मैंने देश-विदेश के लगभग सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों की सैर की है,  पर चौकोरी के प्राकृतिक सौन्दर्य का जवाब नहीं।

चौकोरी से 9 किमीo दूर है धर्माघर जो सरला बेन के निवास स्थान के लिए जाना जाता है। यहां से कुछ ही दूरी पर हिमदर्शन कुटीर भी है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यहां से हिमालय की श्रृंखलाओं का नजारा देखने लायक होता है।  यहां से 10 किमी़o दूर 1720 मी़o की ऊंचाई पर बेरीनाग स्थित है। सड़क मार्ग से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। यहां से हिमालय का एक अलग नजारा देखने को मिलता है। यह एक छोटा-सा हिल स्टेशन है। इस क्षेत्र में बहुत से नाग मंदिर हैं, मसलन धौरीनाग, फेनीनाग, कालीनाग, बासुकीनाग, पिंगलिनाग और हरिनाग। बेरीनाग वॉटरफॉल के लिए भी जाना जाता है। नदी पार करते हुए खूबसूरत व शांत जंगलों के बीच से गुजरते हुए आप यहां पहुंचेंगे। यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम का बंगला है, इसके आसपास ऊंची पहाड़ियां हैं, जिससे इन पर्वत श्रृंखलाओं को देखना बेहद मनमोहक होता है। जब सुबह-सुबह का वक्त होता है तो लोग बर्फीली पहाड़ियों पर सूरज की किरणें पड़ने और शाम ढलने का नजारा देखने के लिए बेसब्र रहते हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में ठहरने के लिए अग्रिम बुकिंग जरूर करवाएं।

गर्मियाँ और शुरुआती सर्दियाँ, चौकोरी आने के लिए सबसे अच्छा मौसम है क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहावना होता है। चौकोरी से यात्री हल्द्वानी तथा अल्मोड़ा जैसे शहरों तक बसों के द्वारा पहुँच सकते हैं। पिथौरागढ़, बागेश्वर, कौसानी, डीडीहाट तथा नैनीताल से अल्मोड़ा के लिए बसें उपलब्ध रहती हैं। अल्मोड़ा और काठगोदाम नियमित बस सेवा के द्वारा दिल्ली से जुड़े हैं।

चित्र सौजन्य: गूगल

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.