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Sep
28

अपण धरोहर अपण कोशिश: Chandrashila Peak (चंद्रशिला चोटी )

उत्तराखंड, उत्तर भारत में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत और शांत पर्यटन केंद्र है । इस जगह का शुमार देश की उन चुनिन्दा जगहों में है जो अपनी सुन्दरता के चलते दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। ’देवताओं की भूमि’ के रूप में जाना जाने वाला उत्तराखंड अपने शांत वातावरण, मनमोहक दृश्यों और खूबसूरती के कारण पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। इस खूबसूरत राज्य के उत्तर में जहाँ तिब्बत है वहीँ इसके पूरब में नेपाल देश है। जबकि इसके दक्षिण में उत्तर प्रदेश और उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश है। इस राज्य का मूल नाम उत्तरांचल था जिसे बदलकर जनवरी 2007 में  उत्तराखंड कर दिया गया था। राज्य में कुल 13 जिलें हैं जिन्हें प्रमुख  डिवीजनों, कुमाऊँ और गढ़वाल के आधार पर बांटा गया है।

यदि आपके लिये पर्वतीय ट्रैकिंग एक जूनून है तो आपके लिये लिए उत्तराखंड की चंद्रशिला पीक एक आदर्श स्थल है। बर्फीली चोटियों के नजारों, सर्पीले पहाड़ी रास्तों के रोमांच और पल-पल बदलते मौसम का अहसास आपके मन को रोमांच से भर देगा। यदि आपको ट्रेकिंग का शौक है और आपके पास इसके लिये समय है। है तो आप चंद्रशिला जा सकते हैं, जो उत्तराखंड में स्थित है और जिसे चंद्रमा का पर्वत कहा जाता है।

चंद्रशिला बद्रीनाथ और केदारनाथ के बीच बसी एक छोटी-सी चोटी है, जहां से हिमालय के अद्भुत दर्शन होते हैं। सुबह-सुबह सूर्य की पहली किरण जब हिमालय की पर्वतीय श्रंखला पर पड़ती है तो ऐसा महसूस होता है, जैसे हिमालय ने जाग कर अंगड़ाई ली हो। उसके हर पल बदलते रंग कुछ पल के लिए सम्मोहित-सा कर देते हैं। एक चोटी से दूसरी चोटियों को देखना एक अनूठा अनुभव है।

चंद्रशिला तक पहुंचना इतना आसान भी नहीं। यहां तक पहुंचने से पहले चोपता जाना पड़ता है। वहां से कमर कस कर चंद्रशिला की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। चोपता के आस-पास का क्षेत्र गढ़वाल का चेरापूंजी कहलाता है। रह-रह कर वहां बादल उमड़ पड़ते हैं और पल भर बाद सारा इलाका उसमें नहा उठता है। यह भी एक वजह है कि चोपता से चंद्रशिला जाने वाले का जीवट होना जरूरी है। ऊपर से बारिश, नीचे से फिसलन और उस पर तेज सर्द हवाओं के झोंके अपने आप में एक रोमांच है। यहां जाने के लिए साथ में विंटर किट का होना जरूरी है।  ऐसे में रास्ते में पड़ने वाले ढाबे जरूर राहत दिलाते हैं। सैलानी वहां खाने के लिए कम, हाथ सेंकने के लिए ज्यादा रुकते हैं।

चोपता अपने आप में एक दर्शनीय स्थल है। 2,500 मीटर की ऊंचाई पर बसा चोपता हरियाली चरागाहों की जमीं है। किसी भी जगह की ट्रैकिंग के लिए इससे अच्छा बेस कैंप नहीं हो सकता। कुछ देर चलने के बाद अचानक गंगोत्री श्रंखला सामने आ खड़ी होती है। बाईं तरफ केदारनाथ की चोटी और माउंट सुमेरु चमकता नजर आता है। ऐसा लगता है मानो हम किसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ चले जा रहे हैं। ऊपर चोटी तक का रास्ता करीब 6 किलोमीटर लंबा है, पर ये शहरी रास्तों के 6 किलोमीटर नहीं, बल्कि पहाड़ी रास्तों की दूरी है जहां 1 किलोमीटर भी 6 किलोमीटर के बराबर महसूस होता है। अंत में हौसला पस्त होने लगता है, जब डेढ़ किलोमीटर की सीधी चढ़ाई नजर आती है। पर ये पर्वत की ताजी, स्वच्छ, निर्मल हवा का जादू है, जो हमें फिर जल्द ही खड़ा कर ट्रैकिंग के रास्ते पर दोबारा ले आता है।

चंद्रशिला पीक तक पहुँचने के लिये दिल्ली से 230 किलोमीटर दूर ऋषिकेश और फिर वहाँ से 180 किलोमीटर दूर चोपता पहुंचते हैं। उसके बाद वहाँ 7 किलोमीटर दूर तुंगनाथ ट्रैक का बैस कैंप है, जहां से चंद्रशिला आधे घंटे का सफर है। यहाँ की यात्रा के दौरान अपने साथ सर्दी के कपड़े, रेनप्रूफ जैकेट, हाइकिंग बूट्स, सनस्क्रीन, गॉगल्स, दस्ताने और कैमरा अवश्य ले जायें।

चित्र सौजन्य: गूगल

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