«

»

Oct
01

उत्तराखंड परिपेक्ष में पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी का इतिहास

उत्तराखंड परिपेक्ष में पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी का इतिहास
History of Elephant Ear Yam (Colocasia esculenta) Or Taro in Uttarakhand context
उत्तराखंड परिपेक्ष में सब्जियों का इतिहास – 3

History of Vegetables Agriculture and food in Uttarakhand 3

उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास –27

History of Agriculture Gastronomy, food, recipes in Uttarakhand 27

आलेख : भीष्म कुकरेती

पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण भोजन रहा है। पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी के उत्तराखंड में कई उपयोग हैं। पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी के ट्यूबर से विभिन्न सब्जियां व पत्तों से भी विभिन्न तरकारियाँ उत्तराखंड में बनती हैं।
पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी का मूल स्थान जम्बूद्वीप के मलय (बंगलादेश -मायनार -मलेसिया के बीच का स्थान ) स्थान को माना जाता है। शायद भारत के दक्षिण पूर्व में 10000 वर्ष पहले पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी का उपयोग शुरू हो चुका था. यद्यपि इस सिद्धांत के वरोध में एकाद सवाल उठते हैं किन्तु अभी तक ठोस आधार नही मिले हैं। पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी में जलन पैदा करने वाले रसायन (किंक्वाळी ) इसका का उपयोग केवल आगके बाद ही शुरू हुआ होगा।
ऐसा लगता है कि उत्तर प्रस्तर उपकरण युग में कहीं 6000 BC में पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी उत्तराखंड में आ चुका था और यह कंद मूल वर्ग में एक महत्व पूर्ण खाद्य पदार्थ हो चुका होगा।
डा डबराल डा मजूमदार व पुसलकर का सन्दर्भ देकर लिखते हैं कि कंद -मूल फलों में और साग सब्जियों में से प्याज , बथुआ , हल्दी , कचालू (पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी) , नासपती , अंगूर , अंजीर आदि बनैले रूप में हिमालय की ढालों पर इनमे से कुछ को उगाने का श्रेय भी उसी मानव को मिलना चाहिए।
संस्कृत में पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी को आलू (कंद -मूल ) के श्रेणी में रखा गया है और कच्च भी कहा गया है। याने कि पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी का उपयोग वैदिक काल से पहले हो चुका था।
आइन -ए -अकबरी में भी कचालू का उल्लेख मिलता है।
गढ़वाल में पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी संबंधी एक लोक गाथा है जिसमे भगवान निरंकार पिंडाळु /घुइंया / अरवी /अरबी को श्राप देते हैं कि अरबी पर किंक्वाळी (कच्ची सब्जी या गरम गर्म सब्जी में गले में जलन ) हो जायं।

Copyright @ Bhishma Kukreti 1/10/2013

References

Dr. Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas 1- 9 Parts
Dr K.K Nautiyal et all , Agriculture in Garhwal Himalayas in History of Agriculture in India page-159-170
B.K G Rao, Development of Technologies During the Iron Age in South India
V.D Mishra , 2006, Prelude Agriculture in North-Central India (Pragdhara ank 18)
Anup Mishra , Agriculture in Chalolithic Age in North-Central India
Mahabharata
All Vedas
Inquiry into the conditions of lower classes of population
Lallan Ji Gopal (Editor), 2008, History of Agriculture in India -1200AD
K.K Nautiyal History of Agriculture in Garhwal , an article in History of Agriculture in India -1200AD
Steven A .Webber and Dorien Q. Fuller, 2006, Millets and Their Role in Early Agriculture. paper Presented in ‘First Farmers in Global Prospective’ , Lucknow
Joshi A.B.1961, Sesamum, Indian central Oil Seeds Committee , Hyderabad
Drothea Bradigian, 2004, History and Lore of Sesame , Economic Botany vol. 58 Part-3
Chitranjan Kole , 2007 , Oilseeds
P.S.Mehta, K.S.Negi, S.N. Ojha,2010,Nativa Plant genetic resources and traditional food of Uttarakhand Himalaya …Indian Journal Of Natural Products and Resources, Vol 1(1) March 2010 page 89-96
K.S.Negi and R.D Gaur, 1994 Principal Wild Food Plants of Western Himalaya , Indian Forester
Gopinath Mohanty et all, 2007, Tappasu Bhallika of Orissa : Their Historicity and Nativity
Y .L .Nene ,2006, Indian Pulses Through Millenia, Asian Agri-History, Vol.10,No.3 (179-200)
K.T. Achaya, 1998, A Historical Dictionary of Indian Food
Michael Matern , A.A.Reddy Commercial Cultivation and Profitability in 2007, Lentil: An ancient Crop for Modern Time (edited by Shyam S. Yadav et all)
Danial Zohary et all, 2012, Domestication of Plants in old World: The Origin and Spread ….
Deka R.R. & Sarkar C.R.1990, Nutrient Composition and Anti Nutritional factors of Dolichos lablab,Food Chemistry Vol 38
Mehra K.L, 2000, History of Crop Cultivation in Prehistoric India (In Ancient and Medieval History of Indian Agriculture..)
A. D’ Andrea et All, Early Domesticated Cowpea from central Ghana
William Shurtleff , Akiko Aoyagi 2010, History of Soyabeans and Syfood in South Asia / Indian subcontinent (1665-)
Helaine Selin , 2008, Encyclopedia of History of Science, Technology and Medicines
Watt, G. 1889, Dictionary of Economic Products of India
J.Janick,G.Caneva, 2004,The First Images of Maize in Europe
Amaranth:Modern Prospects for an Ancient Crop, National Research Council (US) s
G.J.H. Grubeen , 2004, Vegetables
Advances in Buckwheat Research (held at University of Agriculture, Prague August 2004)
Permindar Ratan and Priti Kothiyal, 2001, Fagopyrun esculentum , Moench (common buckwheat) edible plants of Himalayas : A review,Asian Journal of Pharmacy and Life Science (Vol-1)
Om Prakash , 2005, Cultural History of India

B.N.Shrivastava ,Potato in The Indian Economy , International Potato Center
Pushkar Nath, 1969, Potato in India
Roots and Tuber Crops , 2010 (edited by:J.E.Bradshaw)
xx xx

Notes on History of Gastronomy in Uttarakhand; History of Gastronomy in Pithoragarh Uttarakhand; History of Gastronomy in Doti Uttarakhand; History of Gastronomy in Dwarhat, Uttarakhand; History of Gastronomy in Pithoragarh Uttarakhand; History of Gastronomy in Champawat Uttarakhand; History of Gastronomy in Nainital Uttarakhand;History of Gastronomy in Almora, Uttarakhand; History of Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Gastronomy in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Gastronomy in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History of Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Gastronomy in Tehri Garhwal Uttarakhand; History of Gastronomy in Uttarakhand Uttarakhand; History of Gastronomy in Haridwar Uttarakhand;

( उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हिमालय में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तर भारत में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.