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Oct
18

उत्तराखंड में मेडिकल पर्यटन की संभावनाएं

डॉ बलबीर सिंह रावत

ऐतिहासिक पुस्तकें तथ्य बताते हैं की प्राचीन समय से ही उत्तराखंड स्वास्थ्य पर्यटन का केंद्र रहा है. उत्तराखंड की जलवायु स्वयम में स्वास्थ्य का पर्याय होने का बोध कराती है। शीतल और शुद्ध वायु, धरती से छन कर, विभिन्न जडी बूटियों के रस युक्त आता चश्मों का जल, हरेभरे पेड़ पौधों और धवल हिमालय की सुदूर तक फ़ैली चोटियों की नयनाभिराम दृश्यावलियाँ, ताजे फलों और साक-भाजियों का अद्वुत स्वाद। सारे ऐसे आयाम हैं जो हर व्यक्ति के मन को इतना प्रफुल्लित कर देते हैं की उसकी बायोकेमिस्ट्री स्वतः ही धनात्मक हो जाती है।
आज के युग में आयुष विग्यान ने अभूतपूर्व परगति कर ली है और चिकित्सकों, दवाओं, प्रणालियों तथा सुविधाओं को प्रचुर संख्या में हर स्थान में उपलब्ध कर दिया है। उत्तराखंड का सम्पूर्ण पर्वतीय क्षेत्र इन दोनों का अपूर्व संगम स्थल बनाया जा सकता हैं जहा रोगी उपचार के लिए, काम काजे लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए, खिलाड़ी और युवा वर्ग अपनी शारीरिक क्षमता बढाने के स्वर्णिम असर पा सकते हैं। पूरे का पूरा परिवार दिन भर साथ रह कर, आमोद प्रमोद में खुले मन से एक दूरसे को पहिचानने का और परस्पर लगाव को प्रगाढ़ करने का अवसर पा सकते हैं। दुखी मन वाले (असहाय और सामर्थवान दोनों), यहाँ प्रकृति की गोद में बैठ कर, अपने अंतर्मन से परिचित हो कर, अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति को सुदृढ़ करके पूर्ण आत्मविश्वास की प्राप्ति कर सकते हैं।
यहाँ,उन लोगों के लिए, जो औरों के भाग्यविधाता की भूमिका लिए हुए सर्वशक्तिमान बन गए हैं, भी बहुत कुछ है। देव भूमि में आकर वे अपनी उपलब्धियों को, शांत मन से अवलोकन करके, अच्छे बुरे की जो छलनी पाएंगे उसमे छान कर इनमे जो अंतर समझ पायेंगे, उसके बूते पर, अपने लक्ष्यों, आचार-व्यव्हारों में परिवर्तन करने का मार्ग दर्शन पा सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है स्वास्थ्य संबंधी पर्यटन नाना प्रकार के लाभ लेने के इच्छुक व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा क्र सकता है। इस दृष्टि से मेडिकल पर्यटन के निम्न वर्ग हैं:-

अ – भारतीयों हेतु उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवायें
1. बीमारियों का निदान : शीतल वायु और सुद्ध जल वाले दर्शनीय स्थानों पर सारी सुविधायों और विशेषज्ञ प्रवीण डाक्टरों युक्त अस्पतालोन की स्थापना . इसके लिए, स्थल और भूमि चयन करके, सम्बंधित सरकारी विभाग मीडिया में विज्ञापन दे कर निजी सेक्टर की आयुष संस्थाओं, व्यक्तियों को , इस
प्रकार के अस्पताल खोलने के लिए आमंत्रित कर सकती है। वास्तव में करना चाहिए। इस से ऐसे स्थानो में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सारी
सुविधाओं का विकास इस प्रकार हो सकता हैं कि कालांतर में ऐसे स्थान एक सुव्यवस्थित छोटे शहर में विक्सित हो जायं
2. स्वास्थ्य लाभ के सनाटोरियम: इन स्थानों पर वे लोग आते हैं जो लम्बी बीमारी के ठीक होने पर शकिहीन हैं , या किसी अन्य कारणों से,
कमजोरी का भान कर रहे हों . यह स्थान भी स्वास्थ्य वर्धक जलवानु और दृश्यावलियों वाले स्थानों में ही सफल होंगे, साथ में यहाँ पर योग,
पौष्टिक खान पान, सुभह का धूप स्नान, हल्का भ्रमण, समूह में वार्तालाप, सांस्कृतिक प्रोग्राम , व्याख्यान मालाओं की व्यवस्था होने से बहुत
आकर्षक स्थलों में विक्सित किये जा सकते हैं। इनको हमारे उत्तराखंडी प्रवासी अपनी सह्कारी संस्था या कंपनी बना कर भी चला सकते हैं।
इन सनाटोरियमों में न्यूट्रीशनिस्टों और फिजियोठेरापिस्तों की अधिक और विशेषता युक्त डाक्टरों की कम आवश्यकता होती है तो खर्चे भी कम
होते हैं।
3. शारीरिक शक्ति और स्टेमिना बढाने के स्वास्थ्य्बर्धक स्थल: चूंकि यह आवश्यकता युवा वर्ग की होती है तो यह स्थल ऐसी जगहों पर ही उचित होते
हैं जहां पर भौगोलिक परिवेश मानवीय शारीरिक और मानसिक शक्तियों को चरम तक ले जा सकने के योग्य हों।जहां पर आधुनिक व्यायाम्शालों का
प्रबंध किया जा सके, हर एक व्यक्ति को उसकी क्षमता वर्धक खुराक की व्यवस्था के लिए समूची प्रबंध हो। प्रशिक्षकों से मार्गदर्शन की व्यवस्था हो।
4. सम्पूर्ण परिवार के लिए रिसोर्ट : ऐसे पर्यटन स्थलों में एक परिवार के लिए एक कुटीर और कई कुटीरों का पुंज एक ही, सजेसजाये स्थल पर हो। हलके
खेल जैसेबैडमिनटन, हेंडबोंल, कबड्डी, खोखो, शतरंज, कैरम , इत्यादि उपलब्ध हों, सभी अनजान परिवारों को एक दुसरे के करीब लाने के लिए कुछ
सामूहिक कार्यक्रमों, जैसे पिकनिक, लम्बी सैर, पास के गाँव में कोइ भी सुलभ सहभागिता, बृक्षारोपण, बच्चो के स्कूलों में कार्यक्रम, रात को कैंप
फायर में संगीत, निर्त्य ,अन्ताक्षरी, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों, इत्यादि का आयोजन इन्ही स्थलों में आधात्म्य संबंधी प्रवचनों का आयोजन भी
स्थानीय गुरु लोग कर सकते हैं। ऐसे स्थलों पर स्थान विशिष्ट स्मरण प्रतीक वस्तुओं की दुकाने भी लाभ दायक होती हैं। अगर आसपास फलों के बगीचे हैं तो वहाँ स्वयम तोड़ो, खरीदो, लेजाओं पद्धति की बिक्री का चलन शुरू किया जा सकता है। यह एक अति आनंद दायक पर्यटन गतिविधि है।
5. बृद्धावस्था देखभाल केंद्र: यह चलन भारत में तेजी से फ़ैल रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों के धार्मिक महत्व के स्थलों के नजदीक ऐसे कई रमणीक स्थान हैं
जहाँ ऐसे केंद्र सफलतापूर्वक चलाये जा सकते हैं . इन केन्द्रों में मेडिकल और परिचारिक सुविधाए अनिवार्य हैं। चूंकि वरिष्ट नागरिकों के कई आर्थिक
और सामाजिक वर्ग हैं, तो हर एक की अपेक्षाओं के अनुरूप सेवाए देने की व्यवस्था आवश्यक होती है। लेकिन सब को एक स्वास्थ्य वर्धक, लुभावने और आत्मिक शान्ति देनेवाले स्थान की परम आवश्यकता होती है। हमारी देवभूमि में ऐसे स्थलों की प्रचुरता है, केवल उन्हें पहिचान कर सजाने सवारने की आवश्कता है।

बी- विदेशी पर्यटकों हेतु उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवायें
विदेशों में धनी देशों में स्वास्थ्य सेवायें बहुत मंहगी हैं यथा एक आकलन
-हार्ट बाई पास व्यय अमेरिका में एक लाख तीस हजार रुपया;थाईलैंड में ग्यारह हजार रुपया; सिंगापुर में अठारह हजार रूपये और भारत में दस हजार रुपया है. इसी तरह हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट व्यय अमेरिका में एक लाह साथ हजार रूपये, सिंगापुर में बाढ़ हजार पञ्च सौ रूपये, थाईलैंड में दस हजार रूपये हैं जब की भारत में नौ हजार रूपये हैं।
भारत का विदेशियों हेतु मेडिकल टूरिज्म का विकास टेस प्रतिशत से अधिक है। भारत का मेडिकल टूरिज्म उद्यम सवा दो बिलियन डौलर प्रतिवर्ष का है
और इसी वस्तुस्थिति को ध्यान में रखकर मेडिकल टूरिज्म को उत्तराखंड में बढावा दिया जा सकता है -वेलनेस टूरिज्म; आयुर्वेदिक केंद्र,कोस्मेटिक सर्जरी, वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवायें, आधुनिक स्वास्थ्य सेवायें /एडवांस मेडिकल सेवायें
विदेशियों हेतु मेडिकल टूरिज्म के लिए निम्न बातों का ध्यान आवश्यक है
१- उत्तराखंडी समाज , सरकार और पर्यटन उद्यम सहयोगियों की मेडिकल टूरिज्म हेतु स्पष्ट -पारदर्शी व्यापार नीति, दूर दृष्टी और रणनीति
२-विभिन्न सरकारी विभागों में समन्वयता
३-अस्पताल/चिकित्सा प्रबंधन को आधुनिक बनाना
४-अस्पताल /चिकित्सा प्रबन्धन को विदेशी पर्यटन उद्यम के साथ जोड़ना
५-सही जगहों को मेडिकल टूरिज्म हेतु विकसित करना
६- आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना
७- समाज को मेडिकल टूरिज्म हेतु प्रत्साहन देना व समाज का सरकार पर दबाब बनाना
८- विपणन में आधुनिकता लाना
आधुनिक मेडिकल प्रयटन उत्तराखंड में नया आयाम है, इसलिए इसकी व्यवस्था करना आसान है , हम इसे जो चाहें दिशा दे सकते हैं। सही दिशा देने के लिए व्यापक स्तर पर , सरकार, प्रवासी उत्तराखंडियों की संस्थाएं,स्थानीय प्रमुख अनुभवी विचारक, विशेषग्य इत्यादि के बीच संबाद से ही तय की जाय तो ही यह नया प्रयटन आयाम अपने उद्देश्य की पूर्ती कर पायेगा . इस व्यवसाय में अगर स्थानीय लोगों की हर प्रकार की भागीदारी शुरू से ही सुनिश्चित की जायेगी तो इसके सुखद परिणाम सुदूरगामी होंगे।
अंत में याद दिलाने के लिए, सड़क, बिजली, पानी, बैंक, संचार, द्रुत आवागमन , अम्बुलेंस , और गहर की सी उष्णता का वातावरण किसी भी प्रकार के प्रयत्न के लिए जीवन रेखा है।

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