Apr
14

सर्वोत्तम वैदुं गुण

 

 सर्वोत्तम वैदुं  गुण 

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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 

 खंड – १  सूत्रस्थानम नवों  (  खुड्डाक चतुष्पाद  )अध्याय   पद   २१  बिटेन  – तक 

अनुवाद भाग -   ७१ 

गढ़वालीम  सर्वाधिक  अनुवाद करण  वळ अनुवादक  – आचार्य  भीष्म कुकरेती 

  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )

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!!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

विद्या, वितर्क ,विज्ञान, विज्ञत्व , लग्न , क्रिया , चिकित्सा कुशलता जै वैद्यम यी छै   गुण  ह्वावन वैकुण क्वी बि  रोग असाध्य नि छन।  आयुर्वेद विद्या , विशुद्ध बुद्धि , दृढ चिकित्सा , चिकित्सा  हभ्यास, अनेक रोगियों तै रोग मुक्त करणम सफलता , सद्गुरु क आश्रय एक एक गुण  बि वैद पद प्राप्त करणो समर्थ छन।  किन्तु जै  पुरुष म इ  सब गुण  हूंदन वी इ  सच्चेकी वैद  बुले सक्यांद। यी प्राणियों तैं  सुख दिंदेर  हूंद।  २१-२३

आयुर्वेद शास्त्र त उज्यळ करणो ज्योति च अर अपण  बुद्धि आँखि ।  यूँ दुयुं तैं  मिलैक ठीक प्रयोग करी वैद्य बिसर नि सकद।  चिकित्सा का तीन चरण रोग , परिचारक अर द्रव्य सबुं  वैद पर इ आसरो च।  इलै अपण गुणों  तैं  विशेष रूप से  प्राप्ति वास्ता वैद्य तै प्रयत्नशील रौण  चयेंद।  वैदो  ब्यवार  चार प्रकारौ  हूंद -रोगी दगड़ मित्रता अर दया भाव; साध्य रोगीम स्नेह भाव ;मरणासन्न रोगी म उपेक्षा बुद्धि ।  २४-२६

चिकित्सौ  चार  चरण , प्रत्येक चरण का  चार चार गुण,सब गुणोंम भिषक  की भूमिका  प्रधान  च  अर  किलै च ? , वैदुं गुण , वैदुं  चार प्रकारै बुद्धि अर ब्राह्मी बुद्धि यि  सब ‘खड्डाक चतुष्पाद’ बुले गे

नवों  अध्याय   खड्डाक चतुष्पाद  सम्पूर्ण ह्वे।

 

*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य लेन

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ    १२२    ब्रिटेन   तक

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली

Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charaka  Samhita, First-Ever Garhwali Translation of Charaka  Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charaka Samhita

 

Apr
14

Miscellaneous Subjects of other knowledge

Miscellaneous Subjects of other knowledge

Strategies for CEOs of Educational institutions and Social organization, -5

Strategies for CEOs of organizations related to Skill development – 5

Strategies to be known by political leaders, administrators, statesmen for administrating the country

Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer

(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)

(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)

Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 296

Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 296

s= आधी अ

By Bhishma Kukreti (Management Acharya)

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मीमांसा तर्कसान्ख्यानि वेदांतो योग एव च I

इतिहासा: पुराणनि स्मृतयो नास्तिकं मतम्II 6

अर्थशास्त्रं  कामशास्त्रं तथा शिल्पमलंकृति:

काव्यानि देशभाषावसरोक्ति: यावनं मतम्II7

देशादिधर्मा द्वात्रिंशदेता विद्याभि संज्ञिता: I

Same way, Meemansa, Logic, Sankhya, Vedant Yoga , history, Puran, Smriti, Nastik Mata, Economics, Kamashastra, Shilpshastra, Alankarshastra,  Kavya (poetry) , Local languages, sayings, Yavan concepts, customs  available in the locality  are miscellaneous subjects

(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan, 6,7)

References:

1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -213-214

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

Apr
13

बड़ेथ (ढाईज्यूली , थली सैण , पौड़ी गढ़वाल ) के चौहान परिवार भवन में काष्ठ व धातु मिश्रित कला निरीक्षण

  बड़ेथ (ढाईज्यूली , थली सैण , पौड़ी गढ़वाल ) के  चौहान परिवार भवन में  काष्ठ व धातु मिश्रित कला निरीक्षण 

Tibari House Wood Art in House of  Village Bareth, Dhaijyuli , Thalisain  , Pauri Garhwal

गढ़वाल, कुमाऊ के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलदार मकान,,बाखली,खोली ,मोरी,कोटि बनाल ) में  गढवाली  शैली की    काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत ‘  की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -452

( ईरानी , इराकी , अरबी शब्दों की वर्जना प्रयास )

संकलन – भीष्म कुकरेती   

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थलीसैण  क्षेत्र से  कई भवनों की सूचना मिली है।  इसी क्रम में आज बड़ेथ (ढाईज्यूली , थली सैण , पौड़ी गढ़वाल ) के  चौहान परिवार के भव्य आकर्षक भवन  (विनोद सिंह चौहान व त्रिलोक सिंह चौहान ) में  काष्ठ व धातु मिश्रित कला पर चर्चा होगी।  बड़ेथ (थलीसैण ( के   चौहान भवन में काष्ठ  कला से अधिक शैलीगत महत्व है।  बड़ेथ  (थलीसैण ) का चौहान भवन दुपुर -दुखंड है।  भ्यूंतल में बरामदा है व पहले तल में बालकोनी है।    भ्यूं तल  (ground floor ) के दो कक्षों के सिंगाड़ों  में उलटे कमल दल , तब ऊपर ड्यूल व सीधे कमल दल से निर्मित घुंडियां दृष्टिगोचर हो रही हैं।

बल्कोनी में धातु व काष्ठ के मिश्रण से जंलगा बंधा है। बालकोनी के आधार व ऊपर  सपाट काष्ठ   कड़ियाँ हैं।  आधारिक कड़ी से ऊपर की और लगभग १५ से अधिक धातु कड़ी हैं व आधार में धातु जंगला  बंधा है ।

निष्कर्ष निकलता है कि  बड़ेथ  का  चौहान भवन  भव्य , आधुनिक , बीस कक्षों के लगभग बड़ा भवन है जिसमे प्राकृतिक (पद्म पुष्प आदि )  व ज्यामितीय कटान की कला विद्यमान है।  मानवीय कला अलंकरण दर्शन नहीं हुए।

 

सूचना व फोटो आभार: नरेश उनियाल 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   -

 

Tibari House Wood Art in Kot , Pauri Garhwal ; Tibari House Wood Art in Pauri block Pauri Garhwal    Tibari House Wood Art in Pabo, Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Kaljikhal Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Thalisain , Pauri Garhwal ;   द्वारीखाल पौड़ी  गढवा;ल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला, लकड़ी नक्काशी  ;बीरों खाल ,  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; नैनीडांडा  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; लकड़ी नक्काशी पोखरा   पौड़ी  गढवाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; रिखणीखाळ  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; जहरीखाल  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  दुग्गड्डा   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला , लकड़ी  अंकन  ; यमकेश्वर  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   खम्भों  में  अंकन

 

Apr
13

108 करण या शरीर हलण -चलण )

108  करण या शरीर हलण -चलण ) 

भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  चौथो ४  (तांडव लक्षण )   , पद /गद्य भाग  ३४    बिटेन   ५५ तक

(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)

पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग – १०६

s = आधा अ

( ईरानी , इराकी , अरबी  शब्द  वर्जना प्रयत्न  करे गे )

पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित

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गढ़वळिम सर्वाधिक अनुवाद करणवळ अनुवादक -   आचार्य  भीष्म कुकरेती   

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करण १०८ छन – तलपुष्पपुट  ,वर्तित , वलितोरु, अपविद्ध, समनख ,लीन, स्वस्तिकरेचित, मंडलस्वस्तिक,निकुट्टक ,अर्ध निकुट्टक , कटिछिन्न ,अर्द्धरेचित , वक्षःस्वस्तिक , उन्मत्त , स्वस्तिक, पृष्ठस्वास्तिक , दिक्स्वस्तिक, अलात , कटीसम ,आक्षिप्तरेचित , विक्षिप्ताक्षिप्तक , अर्धस्वस्तिक,अंचित,भुजंगत्रासित, उर्घ्वजानु, निकुञ्चित,मत्तल्लि , अधर्मतल्लि,रेचकनिक्कुट , पादपविद्धक, वलित, घूर्णित,ललित, दंडपक्ष , भुजंगत्रस्तरेचित,नूपुर,वैशाखरेचित , भ्र्मर,चतुर,भुजंगाचिंतक,दंडकरेचित,वृष्चिककुट्टित , वृश्चिक,व्यंसित ,पार्श्वनिकुट्टकम्, ललाटतिलक,क्रान्त, कुंचित,चक्रमंडल, उरोमंडल , आक्षिप्त, तलविलासित, अर्गल ,विक्षिप्त , आवृत,दोलपादक , विवृत,विनिवृत,पार्श्वक्रान्त,निशुम्भित,विद्युद्भ्रांत , अतिक्रांत ,विवर्तितक ,गजक्रीड़ित , तलसंस्फोटित , गरुड़प्लुतक ,गंडसूचि, परिवृत,पार्श्वजानु ,गृध्रावलीनक ,सन्नत ,सूची,अर्धसूची ,सूचीविद्ध ,अपक्रान्त,मयूरललित,   सपित,दंडपाद,हरिणप्लुत, प्रेंखोलित, नितम्ब,स्खलित,करिहस्तक प्रसर्पितक ,सिंहविक्रीडित , सिंहकर्षित, उद्वृत्त,उपसृत,तलसंघट्टित , जनित, अवहित्थक , निवेश , एलकाक्रीडित,उरूद्वृत्त ,मदस्खलितक,विष्णुक्रांत,संभ्रांत,विष्कम्भ,उद्धट्टित,वृषभक्रीडित,लोलितक,नागासपिंत , शकटास्य, गंगावतरण

ये प्रकार से मीन १०८ करण (शरीर हलण -चलण ) बतायिन।  ३४ -५५।

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सन्दर्भ – बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ – ८९   -९३

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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई

भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of    Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

 

Apr
13

Ancillary Sciences connected to Vedas

 Ancillary Sciences connected to Vedas

Strategies for CEOs of Educational institutions and Social organization, -4

Strategies for CEOs of organizations related to Skill development – 4

Strategies to be known by political leaders, administrators, statesmen for administrating the country

Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer

(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)

(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)

Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 295

Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 295

s= आधी अ

By Bhishma Kukreti (Management Acharya)

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शिक्षा व्याकरण कल्पो निरुक्तं ज्योतिषं तथा I

छन्द: षडंगानीमानि वेदानां कीर्तितानि हि II

 The ancillary science connected to Vedas (Knowledge) is – Education, Grammar, Kalpa (Period), Nirukta (Etymology or correct interpretation of Sanskrit Words ), astrology, and Chhanda(Vedic Meter).  

(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan, 5)

References:

1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -213

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

 

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