Jul
13

मलारी गाँव (चमोली गढवाल ) में पंच नाग भक्त की निमदारी में काष्ठ कला , अलंकरण , लकड़ी पर नक्कासी

मलारी गाँव (चमोली गढवाल ) में   पंच नाग भक्त की निमदारी में काष्ठ कला , अलंकरण , लकड़ी पर नक्कासी 

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली  , खोली  , मोरी , कोटि बनाल   ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन, नक्काशी  -218

House Wood Carving Art  from  Malari  , Chamoli

(अलंकरण व कला पर केंद्रित )

संकलन – भीष्म कुकरेती -

सीमावर्ती गाँव  मलारी के कुछ भवनों की फोटो अवश्य मिली हैं किन्तु स्वामित्व की कोई सूचना न मिल सकने के कारण मकानों को संख्या नाम दे  दिया गया है या अलग सा नाम दे दिया है I

आज मलारी में भवन संख्या 3 याने   पंच नाग के एक भक्त के भवन में काष्ठ कला, काष्ठ अलंकरण अंकन /लकड़ी पर नक्कासी पर  चर्चा होगी .

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त का यह मकान पुरातन शैली का मकान है . मलारी  का यह मकान ढाईपुर (1+1 +1/2 मंजिल ) शैली का है व  दुखंड /तिभित्त्या ( आगे पीछे दो कमरों के मध्य एक भीत या दीवाल ) हैI व मकान के पहली मंजिल में निमदारीके जंगले  शायद चारों  ओर है नही तो दो ओर तो  दिख ही रही  है I

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त के मकान के  तल मंजिल में कमरे के दरवाजे व खिड़की पर ज्यामितीय कटान के अतिरिक्त किसी प्राकृतिक, माविय अलंकरण के चिन्ह नही दिखे हैं .

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त के मकान के पहली मंजिल में लकड़ी का छज्जा है व छज्जे की आधार कड़ी व उपरी कड़ी के मध्य गोलाई लिए पत्तेनुमा (जैसे तिमल के या  कंडार के पत्ते हों ) की   आकृतियाँ स्थापित हैं I जिस ओर से भवन दिख रहा है उस ओर कम से कम सामने 30  पत्ते आकृतियाँ लटकीं (? ) या स्थापित हैं व उतने ही पत्तियाँ पीछे भी हैं I इन पत्तियों को धन से देखने से अनुमान लगाया जा सकता है कि पत्ती आकृतियों में धार्मिक या प्राक्रतिक आकृति अंकित रही होगी I

पहली मंजिल में छज्जे के आधार की उपरी  कड़ी पर स्तम्भ  कसे गये गये हैं I स्तम्भ के अध्हर पर ढाई तीन  फिट की ऊँचाई तक दोनों ओर काष्ठ पट्टिकाएं संलग्न है जिससे स्तम्भ आधार मोटा दिखाई देता है I   स्तम्भ इस ओर से तो सीधे  व छपरिका के कड़ी से मिल जाते हैं I किन्तु मकान के दूसरी ओर स्तम्भ के  मिलण  की कड़ी के उपर काष्ठ पट्टिका है जिस पर अलंकरण के चिन्ह दृष्टिगोचर हो रहे हैं I स्तम्भों में सर्पिल बेल बूटे के अलंकरण अंकन  के चिन्ह भी दिखाई देते हैं I

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त के निमदारी की विशेषता यह है कि छज्जे के आधार कड़ी से एक फीट उपर एक कड़ी है व  एक या डेढ़ फीट उपर दूसरी कड़ी है . इन कड़ीयों के मध्य दोनों खंडों में  हर ख्वाळ  में 30 याने (एक ख्वाळ में 60 ) हुक्का नै आकृति लगी हैं जैसे  गमशाली के भवन संख्या 3 (यह भी   पंच नाग भक्त की है ) में निमदारी की रेलिंग में भी हुक्के की नै जैसी आकृतियाँ लगी हैं जब कि मलारी की राशन दुकान निमदारी में बेलन नुमा आकृतियाँ लगी हैं I ये हुक्का नै आकृतियाँ सुन्दरता वृद्धिकारक हैं I

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त के मकान की एक अन्य विशेषता बरबस ध्यान खींचती है और वह है  ढाई पुर के ढलवां छत के  आधार पट्टिका /पटला से बाहर एक नक्कासी दार तोरण नुमा आकृति I तोरण में तिपत्ती नुमा मेहराब या चाप हैं व मकान के मूंड (सबसे उपर केंद्र )   बरछानुमा आकृति लटकती नजर आ रही है I संभवतया यह आकृति धार्मिक /आध्यात्मिक प्रतीक है I

मलारी  (चमोली ) के   पंच नाग के एक भक्त के ढाई पुर  (निमदारी ) युक्त मकान में सभी तरह के अलंकरण /कला अंकन हुआ है .

मलारी व गमशाली  चमोली गढवाल के  एक ही क्षेत्र के गाँव हैं और उनकी निम दारियों में अद्भुत  साम्यता है तो दोनों गाँवों में   हर निमदारी की अपनी विशेष  विशेषता (Exclusivity) है I

सूचना प्रेरणा सूत्र  : सुशील बलोदी , झटरी

Internet photo  .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन , लकड़ी नक्काशी श्रंखला जारी

House Wood Carving Ornamentation from  Chamoli, Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation/ Art  from  Joshimath ,Chamoli garhwal , Uttarakhand ;  House Wood Carving Ornamentation from  Gairsain Chamoli garhwal , Uttarakhand ;     House Wood Carving Ornamentation from  Karnaprayag Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation from  Pokhari  Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,नक्काशी ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला, नक्काशी  ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला, नक्काशी , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला, नक्काशी श्रृंखला जारी  रहेगी

 

Jul
13

पज्याण(पौड़ी गढ़वाल ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल के कुमाऊं शैली प्रभावित भवन में काष्ठ कला, अलंकरण अंकन; लकड़ी नक्काशी

पज्याण(पौड़ी गढ़वाल ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के कुमाऊं  शैली प्रभावित भवन में काष्ठ कला, अलंकरण अंकन; लकड़ी  नक्काशी

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली  , खोली  , मोरी ,  कोटि बनाल  ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन; लकड़ी  नक्काशी - 217

Tibari House Wood Art in Pajyan ,  Pauri Garhwal

संकलन – भीष्म कुकरेती

पौड़ी गढ़वाल का चौथान क्षेत्र एक समृद्ध  क्षेत्र रहा है।  चौथान  पट्टी से कुछ तिबारियों  की सूचना मिली है जैसे चौथान पट्टी के पज्याण  गाँव से  स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  निर्मित कुमाऊं प्रभावित मकान की भी सूचना मिली है।   आज  पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन में काष्ठ कला , अलंकरण अंकन या लकड़ी पर नक्काशी की विवेचना होगी।

आयुर्वेद रत्न स्व अमला नंद ढौंडियाल प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्स्क थे।    पज्याण(  चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  का भवन कुमाऊं भवन शैली प्रभावित भवन है।   पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन में खोली व छाज  पूरी तरह कुमाऊं शैली पर  आधारित हैं।   पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन में लकड़ी नक्काशी की विवेचना हेतु तीन स्थलों में टक्क लगानी आवश्यक है – खोळी ; पहली मंजिल में  छाजों  व भवन में खिड़कियों में काष्ठ कला अंकन।

पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन के तल मंजिल में खोळी  में लकड़ी नक्काशी :-

पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन   की खोली  (प्रवेश द्वार ) तल मंजिल के आधार  से  भवन के पहली मंजिल में लगभग छत  आधार के बिलकुल निकट तक है।

खोली के मुख्य सिंगाड़  अथवा स्तम्भ – पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  के खोली मुख्य स्तम्भ (सिंगाड़ )  छह (6 )  उप स्तम्भों के युग्म जोड़ से निर्मित है। उप स्तम्भ दो प्रकार   के  हैं।  एक प्रकार के उप स्तम्भों में आधार से   पर्ण -लता (बेल बूटों )  का अंकन हुआ है ये तीनों उप स्तम्भ सीधे ऊपर जाकर  तीन स्तरों वाले मुरिन्ड की कड़ी बनाते हैं।  एक पर्ण -लता अंकित उप स्तम्भ  मुरिन्ड के सबसे ऊपर स्तर की कड़ी बनाता है , दूसरा  पर्ण  कला अंकन युक्त उप स्तम्भ  मुरिन्ड के मध्य स्तर की कड़ी बनाता है व तीसरा पर्ण   लता अंकित उप स्तम्भ   मुरिन्ड का निम्न स्तर की कड़ी बनता है।

खोली के मुख्य स्तम्भ में दूसरे प्रकार  के तीन  उप स्तम्भ कुछ कुछ गढ़वाल की तिबारियों जैसे ही हैं।  याने इस प्रकार के स्तम्भ आधार में  उलटे कमल दल से कुम्भी बना है , उल्टे  कमल फूल ऊपर  ड्यूल , ड्यूल ऊपर दो कमल फूल व फिर स्तम्भ लौकी आकार ले ऊपर चलता है फिर उल्टा कमल अंकित है जिसके ऊपर ड्यूल व ऊपर सीधा कमल फूल है व फिर प्रत्येक ऐसा स्तम्भ सीधा ऊपर जाकर मुरिन्ड के तीन स्तरों के एक स्तर  ी कड़ी भी बन जाते हैं।

खोली के मुरिन्ड  ( शीर्ष, abacus  जैसा )   के तीन स्तर हैं।  निम्न स्तर में देव मूर्ति बिठाई गयी है व  मध्य स्तर के ऊपर  हिरण के सींग बिठाये गए हैं।  मुरिन्ड की कड़ियों व पटिलों  में ज्यामितीय अथवा प्राकृतिक कला अंकन मिलता है।

पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  में खोली ऊपर छप्परिका  -  डा ढौंडियाल के भवन की खोली के ऊपर छपपरिका है  और   छप्परिका  से शंकु आकृतियां लटकी है।  इसके अतिरिक्त छपरिका  से खोली के दोनों  मुरिन्ड से बाहर व   मुरिन्ड के निम्न स्तर तक (छज्जे तक ) एक एक दीवालगीर स्थापित हैं जिनमे आधार पर दो दो हाथी व ऊपर  S  आकार की आकृति स्थापित है।

पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  के पहली मंजिल में छाजों (झरोखों , ढुड्यार ) में  काष्ठ  कला अंकन , लकड़ी नक्काशी -   पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  के पहली मंजिल में दो छाजों (झरोखे )  की सूचना मिली है।  छाज  के दोनों दरवाजों  के बाहर एक एक स्तम्भ है व एक एक स्तम्भ दो उप स्तम्भों के युग्म से बने हैं।  उप स्तम्भ  कला दृष्ति से बिलकुल खोली के उप स्तम्भों जैसे ही हैं।

छाज के दरवाजों का निम्न तल  पटिल्या (तख्त जैसा ) से ढका है व झरोखा (ढुड्यार ) का  छेद    अंडाकार है व ऊपरी तरफ मेहराब युक्त  है।

खिड़कियों व अन्य कमरों के दरवाजों में ज्यामितीय कला अलंकरण ही  दिख रहा  है।

निष्कर्ष निकलता है कि   पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  के काष्ठ  संरचनाओं  में ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण अंकन हुआ है.

यह भी निष्कर्ष निकलता है कि पज्याण( चौथान ) में स्व डा. अमलानंद ढौंडियाल  के भवन  शैली डोटी  (पश्चिम नेपाल ) व कुमाऊं भवन शैली से पूरी तरह प्रभावित है।

सूचना व फोटो आभार: उदय ममगाईं राठी 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक  स्थिति व मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं।

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी

Tibari House Wood Art in Kot , Pauri Garhwal ; Tibari House Wood Art in Pauri block Pauri Garhwal ;   Tibari House Wood Art in Pabo, Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Kaljikhal Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Thalisain , Pauri Garhwal ;   द्वारीखाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला, लकड़ी नक्काशी  ;बीरों खाल ,  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; नैनीडांडा  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; लकड़ी नक्काशी पोखरा   पौड़ी  गढवाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; रिखणीखाळ  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; जहरीखाल  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  दुग्गड्डा   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला , लकड़ी नक्काशी ; यमकेश्वर  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   खम्भों  में  नक्काशी  , भवन नक्काशी  नक्काशी,  मकान की लकड़ी  में नक्श

 

Jul
13

तल्ला गुराड़ (एकेश्वर , पौड़ी गढ़वाल ) में वीरांगना तीलू रौतेली बंशजों के मकान, खिड़कियों व खोळी में काष्ठ कला अलंकरण अंकन; लकड़ी नक्काशी

तल्ला गुराड़ (एकेश्वर , पौड़ी गढ़वाल ) में वीरांगना तीलू रौतेली  बंशजों के मकान, खिड़कियों  व खोळी  में काष्ठ कला अलंकरण अंकन; लकड़ी  नक्काशी 

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली  , खोली  , मोरी ,  कोटि बनाल  ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन; लकड़ी  नक्काशी - 216

Tibari House Wood Art in Tlla Gurad   , Pauri Garhwal

संकलन – भीष्म कुकरेती

तपौड़ी गढ़वाल के तल्ला गुराड़ व एकेश्वर से कई विशेष भवनों  की सूचना मिलीं हैं।     पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला, लकड़ी नक्काशी शृंखला में  आज  गुराड़  में वीरांगना तीलू रौतेली के बंशजों  में काष्ठ  कला पर चर्चा होगी।  यह भवन नया भवन है।   मकान के कमरों के दरवाजों पर  ज्यामितीय  कला ,  बड़ी खिड़कियों    से साफ़ जाहिर है  कि मकान  1900  ही निर्मित हुआ है। भवन भव्य  था और आज भव्य  रूप दीखता है।

तीलू रौतेली  बंशजों के ढैपुर  , दुघर मकान  में लकड़ी पर नक्काशी  समझने  स्थानों पर टक्क लगानी आवश्यक है

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में तल मंजिल में खोली , कमरों के दरवाजों के स्तम्भों  व खिड़कियों में   नक्काशी।

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में पहली मंजिल पर कमरों के दरवाजों व  खिड़कियों पर काष्ठ कला , अलंकरण अंकन।

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में तल मंजिल में  कमरों के दरवाजों के स्तम्भों  व खिड़कियों में   नक्काशी  -  तल मंजिल में  पांच से अधिक कमरे हैं व उनके दरवाजे व तल मंजिल में पांच से अधिक  कमरों के दरवाजों पर ज्यामितीय    कटान से ज्यामितीय (चौखट जैसा )  व  शैली में कला अंकन हुआ है।   किन्तु सभी कमरों के दरवाजों  व  खड़िकियों के  मुरिन्ड वास्तव में  मेहराब    आकृति से निर्मित हैं।

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में   पहली  मंजिल में  कमरों के दरवाजों के स्तम्भों  व खिड़कियों में   नक्काशी -  खिड़कियों के दरवाजों का पृष्ह्न है   शैली की ज्यामितीय कटान हुआ है और  मुरिन्ड में मेहराब निर्मित है।  किन्तु कमरों के मुरिन्दों में कोई मेहराब (arch ) नहीं मिलते है।

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में तल मंजिल में खोली में   दिलकश नक्काशी  -     तीलू रौतेली  बंशजों के मकान  में  तल मंजिल की खोली पर  कला अलंकरण अंकन ही   मकान की विशेषता है।    बाहर पत्थर के आयताकार स्तम्भ हैं।   संबंधित , खोली में दोनों ओर मुख्य सिंगाड़  (स्तम्भ)  हैं।  प्रत्येक मुख्य स्तम्भ   दो उप स्तम्भों के युग्म / बना है।  बाहर का उप स्तम्भ  तिबारी जैसे स्तम्भ  जैसे है  याने आधार पर उलटे कमल दल , ड्यूल व सीधा कमल फूल है व फिर स्तम्भ की कड़ी सीधे हो ऊपर चलती है , आंतरिक या नीचे स्तर के मुरिन्ड की ऊंचाई पर कड़ी में उल्टा कमल अंकित है उसके ऊपर  ड्यूल , फिर सीधा कमल फूल है व वहां से कड़ी थांत  आकृति ग्रहण कर लेता है व ऊपरी बाह्य  मुरिन्ड से मिल जाता है।   अंदर के उप स्तम्भ  की कड़ी में  पर्ण -लता  का प्राकृतिक कला अंकन  हुआ है। यह कड़ी /उप स्तम्भ निम्न स्तर के मुरिन्ड से मिल मुरिन्ड की कड़ी बन जाती है।  मुरिन्ड  के तीनों स्तर की कड़ियों में पर्ण -लताओं का अंकन हुआ है , निम्न मुरिन्ड के ऊपर एक मेहराब  है जिसमे  ऊपर एक मेहराब है व  पटिले  में चतुर्भुज देव आकृति स्थित है व पटिले  में  प्राकृतिक अंकन हुआ है। इस पटिले के  ऊपर ही मेहराब है जिसके ऊपर ऊपरी मुरिन्ड है।  मेहराब के स्कंध में  भी अंकन हुआ है।

तीलू रौतेली  बंशजों के मकान   के खोली  के ऊपरी भाग  याने निम्न स्तर के मुरिन्ड के बगल में  बाहर मिट्टी पत्थर के चौखट स्तम्भों के ऊपर  छप्परिका  से नीचे  दोनों ओर दीवालगीरें हैं।  प्रत्येक दीवालगीर   प्राकृतिक कला अंकित स्तम्भ हैं।  छप्परिका  से दोनों और दो दीवालगीर लटके जैसे हैं जिसमें    आधार पर ऊपर दो दो  हाथी  स्थापित हैं।  याने कुल चार हाथी हैं।  छप्परिका से शंकु आकृतियां भी लटकी। हैं

निष्कर्ष निकलता है कि  तीलू रौतेली  बंशजों  का  मकान  भव्य था व खोली  समेत मकान में लकड़ी पर ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण  कला अंकन हुआ है।

सूचना व फोटो आभार : उमेश असवाल

यह लेख  भवन  कला संबंधित   है . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   -

Tibari House Wood Art in Kot , Pauri Garhwal ; Tibari House Wood Art in Pauri block Pauri Garhwal ;   Tibari House Wood Art in Pabo, Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Kaljikhal Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Thalisain , Pauri Garhwal ;   द्वारीखाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला, लकड़ी नक्काशी  ;बीरों खाल ,  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; नैनीडांडा  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; लकड़ी नक्काशी पोखरा   पौड़ी  गढवाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; रिखणीखाळ  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; जहरीखाल  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  दुग्गड्डा   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला , लकड़ी नक्काशी ; यमकेश्वर  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   खम्भों  में  नक्काशी  , भवन नक्काशी  नक्काशी,  मकान की लकड़ी  में नक्श

 

Jul
11

दांतू (दारमा घाटी, पिथौरागढ़ ) के एक भव्य मकान में काष्ठ कला , अलंकरण, नक्काशी

दांतू (दारमा घाटी, पिथौरागढ़  ) के एक  भव्य मकान में  काष्ठ कला , लंकरण, नक्काशी 

House Wood Carving Art  in   house of  Dantu village  of  Pithoragarh

गढ़वाल,  कुमाऊँ , हरिद्वार उत्तराखंड , हिमालय की भवन  ( बाखली  ,   तिबारी , निमदारी , जंगलादार  मकान ,  खोली  ,  कोटि बनाल   )  में काष्ठ कला अलंकरण, लकड़ी  नक्काशी-214

संकलन – भीष्म कुकरेती

-

दांतू गाँव पिथौरागढ़ में धारचूला तहसील के दारमा घाटी   का महत्वपूर्ण  सीमावर्ती गांव है जो  आदि कैलाश मानसरोवर ट्रैकिंग मार्ग  पर स्थित है।  भारत तिब्बत सड़क  पर  होने से दारमा  घाटी  के सभी गाँव  भारत -तिब्बत के मध्य व्यापार के गाँव  कभी  उत्तराखंड के समृद्ध गाँव थे और समृद्धि मकानों  में झलकती थीं।   आज इन्ही समृद्ध गाँवों में से एक गाँव  दांतू   गाँव के एक मकान में  सन 1 960  से पहले काष्ठ कला अंकन नक्काशी  पर चर्चा होगी।  मकान पूर्ण तया बाखली (लम्बे , एक साथ जुड़े  कई घर ) नही है  किन्तु  खोळी प्रवेशद्वार )  , छाज ( झरोखे ), खिड़कियां  आदि की शैली बाखली समान ही है।   दारमा  घाटी में मकान रिवाज अनुसार इस मकान में भी तल मंजिल  में गौशाला  व् भंडार थे व  ऊपरी मंजिल में  निवास इस्तेमाल  का रिवाज था।

दांतू का यह मकान कुमाऊं शैली व ब्रिटिश शैली के मिश्रण से निर्मित हुआ है ( खोली व खिड़कियों के मुरिन्डों  के ऊपर पत्थर के मेहराब ब्रिटिश शैली के हैं )।

दांतू के इस मकान में काष्ठ कला समझने हेतु मकान के तल मंजिल में कमरों के मुरिन्ड व दरवाजों में , खोळी  में व पहली मंजिल में दो छाजों  में काष्ठ कला पर ध्यान देना होगा।

तल मंजिल के कमरों  के दरवाजों पर ज्यामितीय कटान हुआ है किन्तु  कमरे के सिंगाड़  (स्तम्भ ) व स्तम्भ से मुरिन्ड की बनी कड़ियों में  प्राकृतिक कला (पर्ण लता वा पुष्प , सर्पिल लता  )  अंकन हुआ है।  कमरे के मुनरिन्ड  के मध्य एक बहुदलीय पुष्प की आकृति  खड़ी है जो  भव्य है।

दांतू  गाँव के इस भग्न हुए मकान की खोळी  (ऊपर मंजिल में जाने हेतु आंतरिक प्रवेशद्वार )   आज भी भव्य खोळी है जो  लकड़ी की टिकाऊ होने व नक्काशी की बारीकियों   से ही समझा जा सकता है।

खोली  के दोनों ओर  के सिंगाड़  (स्तम्भ )  चार चार उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से निर्मित है।  दो किनारे के उप स्तम्भों में आधार में कुछ ऊंचाई तक कमल फूल की कुम्भी व ड्यूल  की कला दिख रही है व इसके बाद  सभी चारों उप स्तम्भों में सर्पिल पर्ण लता का ाबंकन दिख रहा है।  सभी उप स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड के चौखट की कड़ियाँ बन जाते हैं।  यहां भी मुरिन्ड कड़ियों में सर्पिल पर्ण लता का अंकन हुआ है।  मुरिन्ड के केंद्र में  चतुर्भुज देव आकृति अंकित हुयी है।   मुरिन्ड के ऊपर दो मेहराब हैं एक मेहराब नक्काशी युक्त लकड़ी का है व दूसरा मेहराब लकड़ी के मेहराब के ऊपर पत्थर का मेहराब है जो ब्रिटिश भवन शैली  का द्योत्तक है।  मुरिन्ड के ऊपर अर्ध गोल स्कंध काष्ठ  कला का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।  मेहराब के इस अर्ध गोल आकृति के अंदर  उठे अंजुली जैसे फूल की पंखुड़ियाों  का  आकर्षक अंकन हुआ है जो नक्काशी के बारीक व शानदार नक्काशी का उम्दा नमूना है।  अर्ध गोल आकृति के अंदर फूल पंखुड़ियों के उठी अंजुली (अंज्वाळ ) के अंदर एक बहुदलीय फूल अंकित है।   खोली में बेहतर दर्जे की नक्काशी हुयी है।  जो शिल्पकार  के कुशल काष्ठ शिल्प व मकान मालिक  के कला प्रेम को दर्शाने में सफल है।

मकान के पहली मंजिल में  खोली  के आधे में दोनों ओर  बहुत कम चौड़े छज्जे (पौड़ी गढवाल की तुलना म बहुत कम चौड़े )  हैं व दोनों ओर  के छज्जों के उपर एक एक लकड़ी का नक्छाकाशी युक्जत  ( झरोखा ) सजा है।  छाज आम कुमाउंनी छाज (झरोखे , मोरी )  जैसा छाज है।  दोनों छाज  आकृति व कला दृष्टि  से एक समान  हैं।  प्रत्येक छाज दो दरवाजों से बनी है।  प्रत्येक छाज के प्रत्येक दरवाजे  के दोनों ओर मुख्य स्तम्भ हैं जो  तीन तीन उप स्तम्भों के युग्म /जोड़  से बने हैं।  प्रत्येक दरवाजे के बाहर व भीतरी उप स्तम्भ में आधार पर कमल फूल से बनी कुम्भी व ड्यूल आकृतियां  अंकित हैं।   आधार के ऊपरी कमल आकृति के बाद उप स्तम्भ बीच के उप स्तम्भ जैसे सीधे मुरिन्ड से मिलते हैं व मुरिन्ड की कड़ियाँ बन  जाते हैं।  इस दौरान सभी उप स्तम्भों में पर्ण -लता आकृति अंकित हुयी हैं।

मध्य ओर के प्रत्येक दरवाजे का नीची वाला भाग लकड़ी के पटिले (तख्ता ) हैं व ऊपरी भाग में ऊपर मेहराब व नीचे  उल्टा मेहराब हैं और इन दो मेहराबों के मध्य ढुढयार  (छेद  , झरोखे )  है।  दुसरे घर या इसी घर के  दूसरे भाग में खिड़कियों के स्तम्भों में भी नक्काशी हुयी है।

निष्कर्ष निकलता है कि  दांतू गाँव का यह मकान भव्य था व इस मकान में  लकड़ी में दिलकश नक्काशी हुयी है।  कला व अलंकरण दृष्टि से ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण हुआ है।  अब चूँकि यह क्षेत्र चीन युद्ध के बाद तकरीबन बांज ही पड़ गया था तो मकान ध्वस्त हो गए हैं किन्तु  टिकाऊ लकड़ी प्रयोग होने व पत्थर से मकान अभी भी  कुछ ना कुछ सही स्थिति में है।

  सूचना प्रेरणा- बसंत शर्मा

फोटो आभार:प्रसिद्ध फोटोग्राफर व कलाविद लोकेश शाह

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी  ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  नक्काशी ;  House wood Carving art in Pithoragarh  to be continued

Jul
11

कड़ती (ढांगू ) में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी में काष्ठ कला अलंकरण अंकन, नक्काशी

कड़ती (ढांगू ) में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में काष्ठ कला अलंकरण अंकन नक्काशी 

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , खोली  , कोटि बनाल  ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन,  नक्काशी 215  -

Traditional House wood Carving Art of  Kadti, Karti , Silogi , Pauri Garhwal

संकलन – भीष्म कुकरेती

-

पौड़ी गढ़वाल में ढांगू में कड़ती  एक प्रसिद्ध  गांव है और  सिलोगी स्कूल हेतु  जमीन देने हेतु आज भी  कड़ती गाँव याद किया जाता है। कड़ती व  बजारी कठूड़  दो गाँव क्षेत्र फल हिसाब से  मल्ला ढांगू में बड़े गांव माने जाते हैं।  कड़ती का सिलसू देवता तो मल्ला ढांगू के कई गाँवों का लोक देवता है।  ये गाँव धन कटने बाद पूजा हेतु धान व दूध कड़ती पँहुचाते थे।

मकानों में लकड़ी पर  हुनर या नक्काशी  संबंधी सिलसिले में आज कड़ती के सिलस्वाल बंधुओं (स्व सिद्ध नंद सिल्सवाल , स्व दौलत राम सिल्सवाल व मोहन लाल सिल्सवाल )  की निमदारी अथवा जंगलेदार मकान में काष्ठ  कला पर चर्चा होगी।

अपने समय में सिलस्वाल बंधुओं की  निम दारी  की अपनी पहचान व  सामाजिक  उपयोग था।  कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  गढ़वाल की आम निमदारियों जैसे ही पहली मंजिल पर स्थापित हैं लकड़ी के चौड़े छज्जे के ऊपर स्थापित है।   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  की गिनती भव्य निमदारियों में होती थी।   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में सोलह स्तम्भ हैं व पंद्रह ख्वाळ हैं। स्तम्भ छज्जे की कड़ी से चलते ऊपर बड़ी कड़ी से मिल जाते हैं।    कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  में  प्रत्येक स्तम्भ के आधार  पर दोनों ओर  से पट्टिकाएं लगी हैं।  जिससे आधार पर स्तम्भ मोटे व सुंदर लगते हैं।    कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी के आधार से दो फ़ीट ऊपर रेलिंग कड़ी है व इस कड़ी व छज्जे की कड़ी पर लोहे की  छड़ियों से जंगला बनाया गया है।

कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  की लकड़ी में ज्यामितीय ढंग से ही कटान हुआ है व अन्य कोई अलंकरण निमदारी में नहीं दीखता है।

निष्कर्ष  निकलता है कि   कड़ती में सिलस्वाल बंधुओं की निमदारी  लम्बी व सोलह सत्रह  काष्ठ स्तम्भों के कारण भव्य निमदारी है और निमदारी में केवल ज्यामितीय कटान हुआ है।  इस निमदारी के शिल्पकार स्थानीय ही थे (कड़ती व कख्वन  व आसपास ) .

सूचना व फोटो आभार:  विशेश्वर सिल्सवाल कड़ती 

यह लेख  भवन  कला,  नक्काशी संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:   वस्तुस्थिति में अंतर      हो स कता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

Traditional House wood Carving Art of West South Garhwal l  (Dhangu, Udaypur, Ajmer, Dabralsyun,Langur , Shila ),  Uttarakhand , Himalaya

दक्षिण पश्चिम  गढ़वाल (ढांगू , उदयपुर ,  डबराल स्यूं  अजमेर ,  लंगूर , शीला पट्टियां )   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलियों  ,खोली , कोटि बनाल  में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण,  नक्काशी  श्रृंखला  -

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,  बाखली , खोली, कोटि बनाल   ) काष्ठ अंकन लोक कला , नक्स , नक्काशी )  -

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya -

Traditional House Wood Carving  (Tibari ) Art of, Dhangu, Garhwal, Uttarakhand ,  Himalaya; Traditional House Wood Carving (Tibari) Art of  Udaipur , Garhwal , Uttarakhand ,  Himalaya; House Wood Carving (Tibari ) Art of  Ajmer , Garhwal  Himalaya; House Wood Carving Art of  Dabralsyun , Garhwal , Uttarakhand  , Himalaya; House Wood Carving Art of  Langur , Garhwal, Himalaya; House wood carving from Shila Garhwal  गढ़वाल (हिमालय ) की भवन काष्ठ कला , नक्काशी  , हिमालय की  भवन काष्ठ कला  नक्काशी , उत्तर भारत की भवन काष्ठ कला , लकड़ी पर नक्काशी , नक्श , नक्काशी

 

Older posts «

» Newer posts

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.