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British Suppressing Freedom Activist in Gujaru /Gujadu, Garhwal

British Suppressing Freedom Activist in Gujaru /Gujadu, Garhwal
British Administration in Garhwal -356
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History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -376

History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -1212
By: Bhishma Kukreti (History Student)
British government was bent for suppressing freedom movement by all means in each region big or small. Gujaru /Gujadu region Patwari wrote a letter to District Magistrate Bernardi for deputing force to Gujaru/Gujadu . Bernardi sent a force under Tehsildar Kundan Singh Mall, Kanungo Chandra Singh and other Patwaris.
In October 1942, Te above armed force caught many freedom activists from Badalpur, Sabali, Khatali and Idia Kot and then reached to Gujaru/Gujadu. The Armed force reached to Khuntar . There was battle like struggle between people and armed force. Police killed three men and injured six persons. Police force followed a few freedom fighters till Chami Sald. Due to cooperation from people for activists , police could not catch the activists. Police used various suppressive methods on people there. Police locked houses of suspected people . Police drag them out from house and plantation and bate them. However, activists escape from the region.
Activist Sitaram ied in absconding state in Tanakpur. Activists as Shishram Pokhariyal, Man Singh rawat roamed Ramnagar, Kolagarh and reached to Delhi , there, they met Bhairav dattDhulia.

(Reference Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 8, page 290 )

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018
*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter 1211
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(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

History of British Garhwal, Education , Caste, History of Devalgarh Garhwal , ; History of Badhan Garhwal; Education , Caste History of Barasyun Garhwal; Education , Caste, History of Chandpur Garhwal; Education , Caste History of Chaundkot Garhwal; Education , Caste History of Gangasalan Garhwal; History of Mallasalan Garhwal; Education , Caste, History of Tallasalan Garhwal; Education , Caste History of Dashauli Garhwal; Education , Caste, History of Nagpur Garhwal; Society in British Garhwal. History of British Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith in Chamoli Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith of Pauri Garhwal , Education , Health, Social and Culture History of Rudraprayag Garhwal.

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मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु मध्यम स्तरीय निवेशक सम्मेलन आयोजन ( शिवानंद , रामकृष्ण चिकित्सालय उदाहरण )

मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु मध्यम स्तरीय निवेशक सम्मेलन आयोजन
( शिवानंद , रामकृष्ण चिकित्सालय उदाहरण )

How to Organize Medical Tourism Investment Summit -A Guide
मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेश सम्मेलन आवश्यकता – 3
Investment for Investment Medical Tourism Development -3
उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 166
Medical Tourism development Strategies -166
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 269
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -269

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

मेडकल टूरिज्म विकास हेतु लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन के अतिरिक्त अधिकतर मध्यम श्रेणी व वृहद श्रेणी के निवेशक सम्मेलन होते हैं।
मध्यम श्रेणी मेडिकल टूरिज्म निवेशक सम्मेलन
अधिकतर सामाजिक या धार्मिक संस्थानों /संस्थाओं द्वारा किसी विशेष स्थल पर चिकित्सालय खोलने हेतु जो निवेशक सम्मेलन होते हैं वे प्रायः मध्यम श्रेणी के मेडिकल टूरिज्म निवेशक सम्मेलन होते हैं।
स्वामी शिवानंद चेरिटेबल चिकित्सालय , शिवानंद आश्रम , टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड वास्तव में मेडिकल चिरज्म का जीता जागता नमूना है , डाक्टर कुप्पूस्वामी उर्फ़ शिवानंद महाराज द्वारा स्थापित यह चिकित्सालय ऋषिकेश आये महात्माओं , पर्यटकों , ऋषिकेश वासियों को ही चिकत्सा सुविधा प्रदान नहीं करता अपितु आस पास के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र , पौड़ी गढ़वाल के ढांगू , उदयपुर पत्तियों के मरीजों की भी चिकत्सा करता है।
साधना प्राप्ति पश्चात चिकित्स्क डा कुप्पूस्वामी उर्फ़ स्वामी शिवानंद स्वर्गाश्रम में स्थापित होने के पश्चात जब अप्रैल 1927 में इंस्युरेन्स के पैसे मिले तो उन्होंने लक्ष्मण झूला में ‘सत्य सेवाश्रम ‘ छोटी डिस्पेंसरी खोली। इस डिस्पेंसरी का उद्देश्य महात्माओं व पर्यटकों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करना था। सन 1934 में उन्हें 6 शिष्य मिले जिनकी मानसिकता स्वामी शिवानंद की मानसिकता के साथ मेल खाती थी। उन्होने कई बैठकें कीं (निवेशक सम्मेलन ) और सातों मनीषियों ने 17 जनवरी 1934 को गंगा तट पर एक गौशाला बनवायी व 28 मार्च 1934 से यहां डिस्पेंसरी चलने लगी। छः शिष्यों के मध्य सम्मेलन आज लघु स्तर का सम्मेलन लगता है किन्तु यदि उस काल को समझा जाय तो ये सम्मेलन वास्तव में मध्यम स्तरीय निवेशक सम्मेलन थे। निवेशक का अर्थ धन से नहीं अपितु जो भी विभिन्न प्रकार के संसाधन जुटाए वः निवेशक कहलाता है
इस दौरान शिवा नंद महाराज ने अपने आध्यात्मिक सम्मेलनों में चिकित्सालय की छ्वीं बात भी करते थे। इन सम्मेलनों व व्यक्तिगय छ्वीं बातों से प्रेरित हो कई प्रसिद्ध चिकित्स्क सेवाश्रम में कार्य करने हेतु तैयार होते चले गए।
1947 में स्वामी डा अच्युतानंद , स्वामी ा वेंकटेशानंद शिवा नंद होमियोपैथी चिकित्सालय की ततपश्चात डा ब्रिज नंदन प्रसाद भी इस अभियान से जुड़ गए। इस दौरान औपचारिक व अनऔपचारिक निवेशक सम्मेलन हुए।

दृष्टि दान मेडिकल कैम्प

विभिन्न आध्यात्मिक सम्मेलनों में शिवानंद महाराज से प्रेरित हो कई चिकित्स्क आश्रम आने लगे और चिकित्सा सेवा वृद्धि हेउ औपचारिक व अनौपचारिक वार्ता -सम्मेलन करने लगे। इन्ही वार्ताओं व सम्मेलनों का फल था कि एक प्रसिद्ध चक्षु विशेषज्ञ के तहत 1950 में प्रथम चक्षु निरीक्षण कैम्प चलाया गया। इस कैम्प में टिहरी व पौड़ी गढ़वाल के सैकड़ों चक्षु रोगी आये। स्वामी शिवानंद इन चक्षु रोगियों की दुःख से दुखी हुए और फिर प्रत्येक वर्ष दृष्टि दान कैम्प लगने लगे। बाद में शिवानंद चिकित्सालय में विशेष चक्षु कोष्ठ खोला गया। इस लेखक ने भी 1962 में इस चिकित्सालय में अपने चक्षुओं का निरिक्षण करवाया था।

कई सम्मेलन व वार्ताएं
प्रत्येक वर्ष शिवानंद चिकित्सालय में कई व्याधि निवारण कोष्ठ खुलते गए जैसे मलेरिया गोली देना , सर्जरी व्यवस्था , X रे व्यवस्था आदि। इन सभी चिकित्सा सुविधाओं हेतु लघु या मध्यम स्तरीय सम्मेलन हुए व दसियों डाक्टर शिवा नंद हॉस्पिटल से जुड़ते गए।
इसी तरह शिवा नंद आश्रम में आयुर्वेद औषघि निर्माण हेतु भी कई निवेशक सम्मेलन आयोजित हुए जो लघु व मध्यम स्तरीय वार्ताएं व सम्मेलन थे। योग सेंटर खोलने हेतु भी कई निवेशक सम्मेलन हुए

स्वामी रामकृष्ण मिसन हॉस्पिटल कनखल , उत्तराखंड

स्वामी रामकृष्ण मिसन हॉस्पिटल कनखल , हरिद्वार का मेडिकल टूरिज्म इतिहास में स्वर्णिम स्थान है। जब स्वामी विवेकानंद 1893 के शिकागो धर्म सम्मेलन से हरिद्वार आये तो उन्होंने यहां चिकित्सा की बुरी स्थिति देखी और उन्होंने अपने एक शिष्य स्वामी कल्याणा नंद को कनख क्षेत्र में चिकित्सा हेतु भेजा (1901 सन ) बाद में उनसे एक अन्य विवेकानंद शिष्य स्वामी निश्चयानन्द भी मिले और उन्होंने सर्व प्रथम व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की चिकित्सा की बाद में अन्य भागीदारों की सहायता से औपचारिक रूप से स्वामी रामकृष्ण मिशन हॉस्पिल स्थापित किया। इस दौरान वे कई निवेशक /भागीदारों से मिले उनसे वार्ताएं व सम्मेलन हुए। इस चिकित्सालय ने पर्यटकों को कई तरह की चिकित्सा सेवा दी। निवेशकों (दान दाताओं ) के बदौलत ही आज इस चिकित्सालय में 150 बेड हैं।
एक झोपड़ी से रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल की शुरवात हुयी थी और आज 150 बिस्तरों का चिकित्सालय है तो अवश्य ही स्थानीय व अन्य क्षेत्र के के निवेशकों की भागीदारी से ही यह सम्भव हुआ होगा। निवेशक प्रेरणा हेतु कई बार मध्यम स्तरीय सम्मेलन हुए और निवेशकों को जोड़ा गया। निवेशक केवल धन जोडू ही नहीं होते अपितु कई प्रकार के भागिदार होते हैं जिनमे राज्य प्रशासन भी एक इकाई होता है।

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018

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Sep
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मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु निवेशक सम्मेलन आयोजन रणनीतियां उदाहरण सहित – भाग -1 How to Organize Investment Summit मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेश सम्मेलन आवश्यकता – 2 Investment for Investment Medical Tourism Development -2 उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 165 Medical Tourism development Strategies -165 उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 268 Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -268 आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती आपके घर में छोटी सी भी पूजा हो आपको धन की आवश्यकता होती है। बिन धन आप कोई छोटा सा आयोजन नहीं कर सकते हो। उसी तरह मेडिकल टूरिज्म या अन्य टूरिज्म भी बगैर धन के विकसित नहीं हो सकते हैं।धन हेतु निवेश आवश्यक है। आज बद्रीनाथ धाम , ऋषिकेश , हरिद्वार में जो भी टूरिज्म विकसित हुआ है उसमे विभिन्न प्रकार के निवेशकों के निवेश का महत्वपूर्ण स्थान है। बद्रीनाथ धाम में देव प्रयागि पंडों द्वारा दूकान खोलना या प्राचीन काल में बाबा कमली वालों की धर्मशाला निवेश का उम्दा उदाहरण है। ऋषिकेश में शिवा नंद महाराज , महर्षि योगी आदि द्वारा योग शिक्षण या योग विद्या प्रचार हेतु आश्रम खोले गए वे व्ही मेडिकल चिरज्म हेतु निवेश के ही उदाहरण हैं। बाबा कमली वालों या शिवानंद आश्रम में आयुर्वेइक औषधि निर्माण कार्यशाला निर्मित करना भी मेडिकल चिरज्म में निवेशकों का महत्व बतलाता है उसी प्रकार रामकृष्ण आश्रम संस्थान द्वारा चिकित्सालय खोलना भी मेडिकल टूरिज्म का निवेश नमूना ही है। AIMS खुलने हेतु भी बिभिन्न राजकीय संस्थाओं द्वारा निवेश ही हुआ है। टूरिज्म विकास बिना निवेशकों के निवेश के विकसित ही नहीं हो सकता। आज सरकारों के पास उतना धन नहीं है बल वे हर क्षेत्र में निवेश कर सकें अतः निजी निवेशकों की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है जिसके लिए सरकारें निवेशकों को लुभाने या आमंत्रण हेतु निवेशक सम्मेलन आयोजित करते हैं। विभिन्न प्रकार की सेवा हेतु विभिन्न प्रकार के संभावित निवेशकों को एक मंच पर लाकर निवेश हेतु प्रेरित करने को निवेशक सम्मेलन कहा जाता है। निवेशक सम्मिलन को आकार के अनुसार तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन मध्यम स्तरीय निवेशक सम्मेलन वृहद स्तर निवेशक सम्मेलन लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन पर्यटन आधारित लघु निवेशक सम्मेलन ग्राम स्तर पर पर्यटक स्थल विकसित करने हेतु भी लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन किये जाते हैं। जैसे ग्राम मंदिर निर्माण या पुनर्निर्माण , ग्राम स्तर पर कोई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करना , क्षेत्र स्तर कोई महोत्स्व आयोजित करना। जसपुर (ढांगू , पौड़ी गढ़वाल ) में नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण कार्य हेतु भी नब्बे के दशक में निवेशक सम्मेलन किये गए थे। मुंबई के कुछ प्रवासियों ने सोचा बल जसपुर के पुराने मंदिर भवन का पुनर्निर्माण आवश्यक है और नागराजा पूजा में प्रवासियों की भागीदारी आवश्यक है। स्व श्री रमेश कन्हयालाल जखमोला , श्री रमेश चक्रधर कुकरेती , श्री जय प्रकाश कली राम कुकरेती तीनों ने आपस में बैठकर नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण की कल्पना की व श्री चंद्रमोहन गोबरधन प्रसाद जखमोला को भी सहभागी बनाया। नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण की एक मोटा मोटा खाका बनने के पश्चात इन्होने मुंबई में सभी जसपुर के प्रवासियों (भागीदारों , स्टेक होल्डर्स ) की एक सम्मलित बैठक बुलाई। इस बैठक में प्रवासियों को नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण हेतु प्रेरित किया गया व आम सहमति बनाई गयी बल मंदिर निर्माण आवश्यक है व किस तरह मंदिर निर्माण सम्पूर्ण होने के बाद हर तीन साल में पूजा होगी। एक दो बैठकें फिर हुईं और सभी प्रवासियों को प्रति माह चंदे (निवेश ) हेउ एक छोटी राशि निर्धारित की गयी। तकरीबन हर महीने प्रवासियों की बैठक होने लगीं , जब मुंबई प्रवासियों की सहमति व धन योगदान पर सहमति बन गयी तो दिल्ली , देहरादून आदि प्रवासियों को सूचना व प्रेरणा पत्र बेहजे गए , सभी ने अपने अपने स्तर पर प्रेरणा संवाद भी स्थापित किये। इसी दौरान गाँव वासियों के नेतृत्व को भी सम्मलित किया गया। तकरीबन सभी जगह बैठकें आयोजित हुईं। कई बैठकें हुईं , कई प्रकार के पत्राचार , कम्युनिकेशन हुए व 91 -92 में मंदिर पुनर्निर्मित होने के पश्चात प्रथम सामूहिक पूजा प्रारम्भ हुयी जो अब तक तीन साल बाद निरंतर चल रही हैं। जसपुर में सामूहिक नागराजा पूजन टूरिज्म विकास का एक सबसे अनूठा उदाहरण है। एक आकलन अनुसार सन 2018 में सभी प्रकार सामूहिक व निजी व्यय लगभग दस लाख से अधिक हुआ है . जसपुर का सरकारी चिकित्सालय व निवेश सम्मेलन मल्ला ढांगू में ग्वील गाँव चावल उत्पादन व शिक्षित गाँव होने के कारण प्रसिद्ध गाँव रहा है। सरकारी महकमे में भी ग्वील वासी प्रभाव शाली पद पर ब्रिटिश काल से ही रहे हैं। लखनऊ में ग्वील प्रवासी के प्रभाव के कारण 1972 -1973 में उत्तर प्रदेश शासन ने ग्वील में सरकारी चिकित्सालय खोलने का निर्णय लिया व पत्र भी बना दिया। सरकारी विभागीय आदेश भी तैयार हो गए थे। किन्तु ग्वील में चिकित्सालय हेतु जमीन नहीं मिल सकी। तब जसपुर में चिकित्सालय खोलने का आदेश मिला क्योंकि तुरंत जसपुर वालों ने जमीन मुहैया कराने की सहमति दे दी। नेपथ्य में जमीन मुहैया कराने हेतु जसपुर में कई औपचारिक अनुपाउचारिक बैठकें हुईं। जमीन भी निवेश का ही हिस्सा है अतः ये सभी बैठकें मेडिकल टूरिज्म में निवेश सम्मेलन के उदाहरण हैं। जखमोला मुंडीत , श्री घना नंद -गोबिंद राम कुकरेती मुंडीत ने लगभग 30 नाळी जमीन चिकत्सालय को मुफ्त में दे दी व लैंसडाउन में रजिस्ट्री कराई गयी। इसी दैरान जसपुर ग्राम सभा के अंतर्गत अन्य गाँवों सौड़ , छतिंड , बाड्यों के लोगों के साथ कई बैठकें हुईं जिसमे श्रम दान व संसाधन दान , (निवेश ) पर बैठकें (सम्मेलन ) हुए और सभी ने श्रम दान की सहमति दी। संसाधनों में जसपुर में कईयों ने अपने खेत से मिटटी , पत्थर निकालने की सहमति बैठकों में दी , कुछ ने अपने पेड़ दान देने पर सहमति जताई जैसे स्व चित्र मणि बहुगुणा के पुत्रों ने अपना २०० साल पुराने सेमल पेड़ दारु हेतु दिया। चिकित्सालय को तीन कमरो का निर्माण हुआ तब जाकर चिकित्सालय शुरू हुआ। आज जसपुर चिकित्सालय ढांगू में आंतरिक चिकित्सा पर्यटन का एक है। हर कार्य हेतु योजना बनीं व कई तरह के कई स्तर की बैठकें हुईं। चिकित्सा पर्यटन में निवेशकों के सम्मेलन के ये बैठकें अनूठा नमूना व उदाहरण हैं कि भागीदारों का सम्मलितीकरण कैसे किया जाता है । ढांगू धार्मिक पर्यटन विकास में झैड़ का योगदान गंगातट पर स्थित झैड़ (तल्ला ढांगू, ) गाँव का आधुनिक ढांगू में धार्मिक पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। 70 -80 दशक में झैड़ के ऋषिकेश व दिल्ली के प्रवासियों ने कई बैठकों में निर्णय लिया बल प्राचीन झैड़ मंदिर का जीर्णोद्धार जाय। मंदिर जीर्णोद्धार हेतु ऋषिकेश , दिल्ली व झैड़ में कई निवेश व योजना सम्मेलन हुए और देवी मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन हुआ। मंदिर पुनर्निर्माण के पश्चात सामूहिक पूजन संपन हुयी जिसमे झैड़ प्रवासी , निवासी नहीं अपितु झैड़ के बेटियों के परिवार भी सम्मलित हुए। अब यह सामूहिक पूजा प्रत्येक चार वर्ष अंतराल में सम्पन होती हैं व जमाई भी परिवार सहित सम्मलित होते हैं। मैं झैड़ कई वृद्ध जमायियों को जानता हूँ जीने परिवार अपने गए किन्तु झैड़ देवी पूजन में अवश्य सम्मलित होते हैं . सामूहिक झैड़ देवी पूजन धार्मिक पर्यटन विकास का एक अनूठा उदाहरण ह। और यह सामूहिक पूजन तब शुरू हुआ जब साधन -संसाधन जुटाने बहुत ही कठिन थे। आज आधुनिक ढांगू में जितने सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान रहे हैं उनके प्रेरणा स्रोत्र झैड़ देवी मंदिर जीर्णोद्धार घटना है। हेतु भी कई छोटे स्तर के निवेश सम्मेलन हुए थे। हीरा मणि बड़थ्वाल व का धार्मिक पर्यटन हेतु भागीदारी सम्मेलन बड़ेथ (मल्ला ढांगू , पौ ग ) के नौगढ़ में स्व श्री हीरा मणि नारायण दत्त बड़थ्वाल व उनके भ्राता श्री ओम प्रकाश नारायण दत्त बड़थ्वाल ने अपने धन से देवी मंदिर निर्माण किया किन्तु उन्होंने मंदिर नींव रखने से पहले अपने गाँव में कई सम्मेलन किये जिससे भागीदार (स्टेक होल्डर्स ) मंदिर से जुड़ सकें। अब यह मंदिर व्यक्तिगत मंदिर नहीं अपितु बड़ेथ का सार्वजनिक मंदिर हो गया है और आंतरिक धार्मिक पर्यटन का उदाहरण है। सत्य प्रसाद बहुगुणा का धार्मिक पर्यटन हेतु निवेश सम्मेलन जसपुर ग्वील (ढांगू , पौ ग ) में कुछ कारणों से देवी मंदिर नहीं था। ढांगू के गुरु वंशीय प्रसाद बहुगुणा के प्रयास से अब जसपुर -ग्वील सीमा में देवी मंदिर स्थापित हुआ है। स्व सत्य प्रसाद खीमा नंद बहुगुणा ने जब देवी मंदिर की कल्पना की तो उन्होंने ग्वील व अन्य गाँवों या स्थानों के अपने यजमानों से सम्पर्क साधा व बैठकें कीं। कई यजमानों ने मंदिर निर्माण में भागीदारी निभायी। देवी मंदिर में एक बड़ा भव्य धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित हुआ जिसमे सत्य गुरु जी के कई यजमानों , मित्रों सहचरों ने भागीदारी निभायी। श्री सत्य प्रसाद गुरु जी ने जिनसे भी सम्पर्क सहा होगा वे पर्यटन विपणन की दृष्टि में निवेश व भागीदारी सम्मेलन के ही उदाहरण हैं। मनोहर जुयाल का ढांगू धार्मिक पर्यटन में योगदान देहरादून के प्रसिद्ध उद्यमी श्री मनोहर जुयाल ने नैरुळ में मंदिर जीर्णोद्धार व आवास निवास , सड़क निर्माण कर ढांगू धार्मिक पर्यटन में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। श्री मनोहर जुयाल ने भी कई स्तर पर भागीदार सम्मेलन आयोजित किये है। गोदेश्वर मंदिर हेतु श्री अतुल कंडवाल का ढांगू धार्मिक पर्यटन विकास में योगदान ऋषिकेश में ठंठोली प्रवासी श्री अतुल कंडवाल भी गोदेश्वर मंदिर पर्यटन वृद्धि हेतु कई प्रकार के सम्मेलन करते हैं जो निवेश सम्मेलन के ही उदाहरण हैं व अतुल जी मंदिर प्रसिद्धि हेतु कार्यरत हैं। ढांगू में धार्मिक पर्यटन की वर्तमान दशा आज धार्मिक व अन्य पर्यटन में ढांगू विकास पथ पर है जैसे ग्वील में प्रवासी सम्मेलन व रामलीला आयोजन , मित्रग्रम में श्रीमद भागवद अनुष्ठान , कठूड़ में देवी पूजा , खंड में देवी पूजन आदि सभी धार्मिक पर्यटन के उदाहरण हैं। इन सभी आयोजन हेतु कई स्तर पर निवेश बैठकें होती हैं जिन्हे पर्यटन विपणन भाषा में लघु स्तर के निवेश सम्मेलन कहा जाता है। अगले अध्याय में मेडिकल टूरिज्म में मध्यम स्तर के निवेश सम्मेलन के बारे में पढ़िए Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018 Examples of Medical tourism Investment Summit , Examples of Medical Tourism Investment Summit , , Uttarakhand; Examples of Medical Tourism Investment Summit , , Garhwal Uttarakhand , Examples of Medical Tourism Investment Summit , Jaspur Village Dhangu , Uttarakhand , Examples of Religious Tourism Investment Summit , Jhairh , Kathur , Nairul, Breth , Kathur , Godeshwar Garhwal , Uttarakhand

मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु निवेशक सम्मेलन आयोजन रणनीतियां उदाहरण सहित – भाग -1

How to Organize Investment Summit
मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेश सम्मेलन आवश्यकता – 2
Investment for Investment Medical Tourism Development -2
उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 165
Medical Tourism development Strategies -165
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 268
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -268

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

आपके घर में छोटी सी भी पूजा हो आपको धन की आवश्यकता होती है। बिन धन आप कोई छोटा सा आयोजन नहीं कर सकते हो। उसी तरह मेडिकल टूरिज्म या अन्य टूरिज्म भी बगैर धन के विकसित नहीं हो सकते हैं।धन हेतु निवेश आवश्यक है। आज बद्रीनाथ धाम , ऋषिकेश , हरिद्वार में जो भी टूरिज्म विकसित हुआ है उसमे विभिन्न प्रकार के निवेशकों के निवेश का महत्वपूर्ण स्थान है। बद्रीनाथ धाम में देव प्रयागि पंडों द्वारा दूकान खोलना या प्राचीन काल में बाबा कमली वालों की धर्मशाला निवेश का उम्दा उदाहरण है। ऋषिकेश में शिवा नंद महाराज , महर्षि योगी आदि द्वारा योग शिक्षण या योग विद्या प्रचार हेतु आश्रम खोले गए वे व्ही मेडिकल चिरज्म हेतु निवेश के ही उदाहरण हैं। बाबा कमली वालों या शिवानंद आश्रम में आयुर्वेइक औषधि निर्माण कार्यशाला निर्मित करना भी मेडिकल चिरज्म में निवेशकों का महत्व बतलाता है उसी प्रकार रामकृष्ण आश्रम संस्थान द्वारा चिकित्सालय खोलना भी मेडिकल टूरिज्म का निवेश नमूना ही है। AIMS खुलने हेतु भी बिभिन्न राजकीय संस्थाओं द्वारा निवेश ही हुआ है। टूरिज्म विकास बिना निवेशकों के निवेश के विकसित ही नहीं हो सकता।
आज सरकारों के पास उतना धन नहीं है बल वे हर क्षेत्र में निवेश कर सकें अतः निजी निवेशकों की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है जिसके लिए सरकारें निवेशकों को लुभाने या आमंत्रण हेतु निवेशक सम्मेलन आयोजित करते हैं।
विभिन्न प्रकार की सेवा हेतु विभिन्न प्रकार के संभावित निवेशकों को एक मंच पर लाकर निवेश हेतु प्रेरित करने को निवेशक सम्मेलन कहा जाता है।
निवेशक सम्मिलन को आकार के अनुसार तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है
लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन
मध्यम स्तरीय निवेशक सम्मेलन
वृहद स्तर निवेशक सम्मेलन
लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन
पर्यटन आधारित लघु निवेशक सम्मेलन ग्राम स्तर पर पर्यटक स्थल विकसित करने हेतु भी लघु स्तरीय निवेशक सम्मेलन किये जाते हैं। जैसे ग्राम मंदिर निर्माण या पुनर्निर्माण , ग्राम स्तर पर कोई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करना , क्षेत्र स्तर कोई महोत्स्व आयोजित करना।
जसपुर (ढांगू , पौड़ी गढ़वाल ) में नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण कार्य हेतु भी नब्बे के दशक में निवेशक सम्मेलन किये गए थे। मुंबई के कुछ प्रवासियों ने सोचा बल जसपुर के पुराने मंदिर भवन का पुनर्निर्माण आवश्यक है और नागराजा पूजा में प्रवासियों की भागीदारी आवश्यक है। स्व श्री रमेश कन्हयालाल जखमोला , श्री रमेश चक्रधर कुकरेती , श्री जय प्रकाश कली राम कुकरेती तीनों ने आपस में बैठकर नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण की कल्पना की व श्री चंद्रमोहन गोबरधन प्रसाद जखमोला को भी सहभागी बनाया। नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण की एक मोटा मोटा खाका बनने के पश्चात इन्होने मुंबई में सभी जसपुर के प्रवासियों (भागीदारों , स्टेक होल्डर्स ) की एक सम्मलित बैठक बुलाई। इस बैठक में प्रवासियों को नागराजा मंदिर पुनर्निर्माण हेतु प्रेरित किया गया व आम सहमति बनाई गयी बल मंदिर निर्माण आवश्यक है व किस तरह मंदिर निर्माण सम्पूर्ण होने के बाद हर तीन साल में पूजा होगी। एक दो बैठकें फिर हुईं और सभी प्रवासियों को प्रति माह चंदे (निवेश ) हेउ एक छोटी राशि निर्धारित की गयी। तकरीबन हर महीने प्रवासियों की बैठक होने लगीं , जब मुंबई प्रवासियों की सहमति व धन योगदान पर सहमति बन गयी तो दिल्ली , देहरादून आदि प्रवासियों को सूचना व प्रेरणा पत्र बेहजे गए , सभी ने अपने अपने स्तर पर प्रेरणा संवाद भी स्थापित किये। इसी दौरान गाँव वासियों के नेतृत्व को भी सम्मलित किया गया। तकरीबन सभी जगह बैठकें आयोजित हुईं। कई बैठकें हुईं , कई प्रकार के पत्राचार , कम्युनिकेशन हुए व 91 -92 में मंदिर पुनर्निर्मित होने के पश्चात प्रथम सामूहिक पूजा प्रारम्भ हुयी जो अब तक तीन साल बाद निरंतर चल रही हैं। जसपुर में सामूहिक नागराजा पूजन टूरिज्म विकास का एक सबसे अनूठा उदाहरण है। एक आकलन अनुसार सन 2018 में सभी प्रकार सामूहिक व निजी व्यय लगभग दस लाख से अधिक हुआ है .
जसपुर का सरकारी चिकित्सालय व निवेश सम्मेलन

मल्ला ढांगू में ग्वील गाँव चावल उत्पादन व शिक्षित गाँव होने के कारण प्रसिद्ध गाँव रहा है। सरकारी महकमे में भी ग्वील वासी प्रभाव शाली पद पर ब्रिटिश काल से ही रहे हैं। लखनऊ में ग्वील प्रवासी के प्रभाव के कारण 1972 -1973 में उत्तर प्रदेश शासन ने ग्वील में सरकारी चिकित्सालय खोलने का निर्णय लिया व पत्र भी बना दिया। सरकारी विभागीय आदेश भी तैयार हो गए थे। किन्तु ग्वील में चिकित्सालय हेतु जमीन नहीं मिल सकी। तब जसपुर में चिकित्सालय खोलने का आदेश मिला क्योंकि तुरंत जसपुर वालों ने जमीन मुहैया कराने की सहमति दे दी। नेपथ्य में जमीन मुहैया कराने हेतु जसपुर में कई औपचारिक अनुपाउचारिक बैठकें हुईं। जमीन भी निवेश का ही हिस्सा है अतः ये सभी बैठकें मेडिकल टूरिज्म में निवेश सम्मेलन के उदाहरण हैं। जखमोला मुंडीत , श्री घना नंद -गोबिंद राम कुकरेती मुंडीत ने लगभग 30 नाळी जमीन चिकत्सालय को मुफ्त में दे दी व लैंसडाउन में रजिस्ट्री कराई गयी। इसी दैरान जसपुर ग्राम सभा के अंतर्गत अन्य गाँवों सौड़ , छतिंड , बाड्यों के लोगों के साथ कई बैठकें हुईं जिसमे श्रम दान व संसाधन दान , (निवेश ) पर बैठकें (सम्मेलन ) हुए और सभी ने श्रम दान की सहमति दी। संसाधनों में जसपुर में कईयों ने अपने खेत से मिटटी , पत्थर निकालने की सहमति बैठकों में दी , कुछ ने अपने पेड़ दान देने पर सहमति जताई जैसे स्व चित्र मणि बहुगुणा के पुत्रों ने अपना २०० साल पुराने सेमल पेड़ दारु हेतु दिया। चिकित्सालय को तीन कमरो का निर्माण हुआ तब जाकर चिकित्सालय शुरू हुआ।
आज जसपुर चिकित्सालय ढांगू में आंतरिक चिकित्सा पर्यटन का एक है।
हर कार्य हेतु योजना बनीं व कई तरह के कई स्तर की बैठकें हुईं। चिकित्सा पर्यटन में निवेशकों के सम्मेलन के ये बैठकें अनूठा नमूना व उदाहरण हैं कि भागीदारों का सम्मलितीकरण कैसे किया जाता है ।

ढांगू धार्मिक पर्यटन विकास में झैड़ का योगदान

गंगातट पर स्थित झैड़ (तल्ला ढांगू, ) गाँव का आधुनिक ढांगू में धार्मिक पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। 70 -80 दशक में झैड़ के ऋषिकेश व दिल्ली के प्रवासियों ने कई बैठकों में निर्णय लिया बल प्राचीन झैड़ मंदिर का जीर्णोद्धार जाय। मंदिर जीर्णोद्धार हेतु ऋषिकेश , दिल्ली व झैड़ में कई निवेश व योजना सम्मेलन हुए और देवी मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन हुआ। मंदिर पुनर्निर्माण के पश्चात सामूहिक पूजन संपन हुयी जिसमे झैड़ प्रवासी , निवासी नहीं अपितु झैड़ के बेटियों के परिवार भी सम्मलित हुए। अब यह सामूहिक पूजा प्रत्येक चार वर्ष अंतराल में सम्पन होती हैं व जमाई भी परिवार सहित सम्मलित होते हैं। मैं झैड़ कई वृद्ध जमायियों को जानता हूँ जीने परिवार अपने गए किन्तु झैड़ देवी पूजन में अवश्य सम्मलित होते हैं . सामूहिक झैड़ देवी पूजन धार्मिक पर्यटन विकास का एक अनूठा उदाहरण ह। और यह सामूहिक पूजन तब शुरू हुआ जब साधन -संसाधन जुटाने बहुत ही कठिन थे।
आज आधुनिक ढांगू में जितने सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान रहे हैं उनके प्रेरणा स्रोत्र झैड़ देवी मंदिर जीर्णोद्धार घटना है। हेतु भी कई छोटे स्तर के निवेश सम्मेलन हुए थे।

हीरा मणि बड़थ्वाल व का धार्मिक पर्यटन हेतु भागीदारी सम्मेलन

बड़ेथ (मल्ला ढांगू , पौ ग ) के नौगढ़ में स्व श्री हीरा मणि नारायण दत्त बड़थ्वाल व उनके भ्राता श्री ओम प्रकाश नारायण दत्त बड़थ्वाल ने अपने धन से देवी मंदिर निर्माण किया किन्तु उन्होंने मंदिर नींव रखने से पहले अपने गाँव में कई सम्मेलन किये जिससे भागीदार (स्टेक होल्डर्स ) मंदिर से जुड़ सकें। अब यह मंदिर व्यक्तिगत मंदिर नहीं अपितु बड़ेथ का सार्वजनिक मंदिर हो गया है और आंतरिक धार्मिक पर्यटन का उदाहरण है।
सत्य प्रसाद बहुगुणा का धार्मिक पर्यटन हेतु निवेश सम्मेलन
जसपुर ग्वील (ढांगू , पौ ग ) में कुछ कारणों से देवी मंदिर नहीं था। ढांगू के गुरु वंशीय प्रसाद बहुगुणा के प्रयास से अब जसपुर -ग्वील सीमा में देवी मंदिर स्थापित हुआ है। स्व सत्य प्रसाद खीमा नंद बहुगुणा ने जब देवी मंदिर की कल्पना की तो उन्होंने ग्वील व अन्य गाँवों या स्थानों के अपने यजमानों से सम्पर्क साधा व बैठकें कीं। कई यजमानों ने मंदिर निर्माण में भागीदारी निभायी। देवी मंदिर में एक बड़ा भव्य धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित हुआ जिसमे सत्य गुरु जी के कई यजमानों , मित्रों सहचरों ने भागीदारी निभायी। श्री सत्य प्रसाद गुरु जी ने जिनसे भी सम्पर्क सहा होगा वे पर्यटन विपणन की दृष्टि में निवेश व भागीदारी सम्मेलन के ही उदाहरण हैं।
मनोहर जुयाल का ढांगू धार्मिक पर्यटन में योगदान
देहरादून के प्रसिद्ध उद्यमी श्री मनोहर जुयाल ने नैरुळ में मंदिर जीर्णोद्धार व आवास निवास , सड़क निर्माण कर ढांगू धार्मिक पर्यटन में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। श्री मनोहर जुयाल ने भी कई स्तर पर भागीदार सम्मेलन आयोजित किये है।
गोदेश्वर मंदिर हेतु श्री अतुल कंडवाल का ढांगू धार्मिक पर्यटन विकास में योगदान

ऋषिकेश में ठंठोली प्रवासी श्री अतुल कंडवाल भी गोदेश्वर मंदिर पर्यटन वृद्धि हेतु कई प्रकार के सम्मेलन करते हैं जो निवेश सम्मेलन के ही उदाहरण हैं व अतुल जी मंदिर प्रसिद्धि हेतु कार्यरत हैं।

ढांगू में धार्मिक पर्यटन की वर्तमान दशा
आज धार्मिक व अन्य पर्यटन में ढांगू विकास पथ पर है जैसे ग्वील में प्रवासी सम्मेलन व रामलीला आयोजन , मित्रग्रम में श्रीमद भागवद अनुष्ठान , कठूड़ में देवी पूजा , खंड में देवी पूजन आदि सभी धार्मिक पर्यटन के उदाहरण हैं। इन सभी आयोजन हेतु कई स्तर पर निवेश बैठकें होती हैं जिन्हे पर्यटन विपणन भाषा में लघु स्तर के निवेश सम्मेलन कहा जाता है।

अगले अध्याय में मेडिकल टूरिज्म में मध्यम स्तर के निवेश सम्मेलन के बारे में पढ़िए
Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018
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Sep
09

Migrating for retired Life in Mahabharata

Migration for Passing Retirement Life in Mahabharata Epic
History of Medical Tourism, Health and Wellness Tourism in Mahabharata Epic , India -13
History of Medical Tourism, Health and Wellness Tourism in India, South Asia -22
By: Bhishma Kukreti (Medical Tourism Historian)
From the early time, people have been conscious passing retired life peacefully and practicing spiritual activities. Today, too, people make strategies for retirement life.
There is a separate chapter in Mahabharata for describing four main period of common human being – brahmchary ashram, grihasth ashram, baanprasth ashram and sanyas ashram. I Mahabharata’s Anushashan parva , there is description of activities for passing the last retirement life (SanyasAshram ) ( Sankhipt Mahbharata , Part II, page 1381-1386, Geeta Press India,)
Mahabharata suggests the human being for migrating elsewhere as soon as he/she enters in last phase of life . It is essential to migrate away from home in Sanyas Ashram.
Mahabharata suggests many acts for passing Sanyas Ashram or retired life as –
Simple food, less food, yama, Cleanliness, truthful life, Contently life, not to be afraid of long ife or death, . On the whole the person should be away from home and family and pass life with spiritual activities rather family life. The Sanyasi was suggested to get food by begging (means touring for food).
After Kurukshetra war, King Dhritarashtra, his wife gandhari, queen Kunti and Minister Vidur migrated from Kurukshetra to bank of Bhagirathi (Garhwal Uttarakhand) for passing their retired life (Sanyas Ashram) ( Ibid pages 1933). The story tells that there were other King too those were passing retired life as Sages.
Migration from one place to peaceful place for retired life is nothing but a kind of tour under medical tourism /wellness tourism.

Copyright @ Bhishma Kukreti, //2018
History of Medical, health and Wellness Tourism in India will be continued in –
History of Medical, health and Wellness Tourism in India , North India , South Asia;, History of Medical, health and Wellness Tourism in India , South India; South Asia, History of Medical, health and Wellness Tourism in India , East India, History of Medical, health and Wellness Tourism in India , West India, South Asia; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , Central India, South Asia; ; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , North East India , South Asia; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , Bangladesh , South Asia; History of Medical, health and Wellness Tourism in India, Pakistan , South Asia; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , Myanmar, South Asia; ; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , Afghanistan , South Asia ; ; History of Medical, health and Wellness Tourism in India , Baluchistan, South Asia, to be continued

Sep
09

Revolutionary Material through Hanuman chalisa packets in Garhwal

Revolutionary Material through Hanuman chalisa packets in Garhwal
British Administration in Garhwal -355
-
History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -375

History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -1211
By: Bhishma Kukreti (History Student)
In Quite India Movement period, Bhairav Datt Dhulia dispatched revolution literature through Hanuman Chalisa Packets/ bundles. Dhulia accelerated the speed of movement. Bhairav Datt Dhulia was lecturer in Tabiya college Delhi .His younger brother Yogeshwar Dhulia reached Delhi from Mumbai. Bhairav Datt Dhulia wrote a booklet ‘ Angrejon ko Hindustan se nikalo -Throw Away British from India ‘. It was not possible printing that booklet in Delhi. Friend of Bhairav Datt , Ishwari Prasad Dobriyal printed the booklet in quantity in Mumbai and sent to Dhulia. The booklet was in quarter full scape size and the booklet was of 28 pages. The cover and packet was of hanuman Chalisa and was distributed in South Garhwal.
The main chapters were in the booklet –
Civil disobedience
Open revolt
Quit India
Do and Die
There were other suggestions for Garhwal as -
Cut the telegraph wires
Not to pay taxes
Malgujar /padhan /thokdar should be inspired for resigning
Comple Patwais for resigning
Kill British soldiers as are killed mad dogs
Beat the traitors/ British informers
There were instructions for students to snatch tax from Malgujar or Patwari , Brek piilars of forests, Burn courts, government offices .
Indradev Thapliyal came from Delhi to Dogadda with the literature . Yogesh Dhulia took bundles to Kalsi of Uaypur Patti . Chhawan Singh negi and Double Singh Negi went undergroun for burning Haridwar wood depot.
Hanuman Chalisa Bundles (Revolt literature) were sent through post offices to Makkhan Lal verma and Nain Sinngh Negi in Lansdowne. One bundle was burnt and another was lost somewhere.
(Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 8, page 290 )

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018
*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter 1211
-
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

History of British Garhwal, Education , Caste, History of Devalgarh Garhwal , ; History of Badhan Garhwal; Education , Caste History of Barasyun Garhwal; Education , Caste, History of Chandpur Garhwal; Education , Caste History of Chaundkot Garhwal; Education , Caste History of Gangasalan Garhwal; History of Mallasalan Garhwal; Education , Caste, History of Tallasalan Garhwal; Education , Caste History of Dashauli Garhwal; Education , Caste, History of Nagpur Garhwal; Society in British Garhwal. History of British Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith in Chamoli Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith of Pauri Garhwal , Education , Health, Social and Culture History of Rudraprayag Garhwal.

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