Jun
15

तेजपत्ता वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

तेजपत्ता वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Indian bay leaf tree Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
-

सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -18

Community Medical Plant Forestation -18

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 120

-

Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 120

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–223
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग -223

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम Cinamomum tamala ,
Indian Bay Leaf Tree
तेजपत्ता
उतकट , ताम्ल पत्र

पादप वर्णन
सदाबहार , 100 वर्ष तक जीने वाला वृक्ष
क्षेत्र – हिमालयी उष्ण कट बन्धीय क्षेत्र
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई – 300 -2400 मीटर तक
वृक्ष उंचाई मीटर-8 मीटर
तना गोलाई सेंटीमीटर -150
अन्य भाग

फूल व फल

आर्थिक उपयोग
भू संरक्षण -कामयाब वृक्ष , छाया
गरम मसाले , तेल कई मसालों, मिठाईयों , चॉकलेट व औषधि उद्यमों में

औषधि में अंग उपयोगिता
छाल
पत्ती
तेल
औषधि उपयोग
टूथ पौडर . मुखवास , दांत दर्द
कफ स्वास रोधक
यूटेरस बीमारियों में
सूजन या हड्डी /मासंपेशियों के दर्द में छल गुदगी प्रयोग
ट्यूबरकुलसिस में
स्थूलता कम करने हेतु
अंजन या सुगंधित द्रव मिठाई व अन्य भोज्य पदार्थों में प्रयोग
कृमि नाशक
प्रसूति स्राव रोकथाम , एनीमिया में
यकृत व तिल्ली में मूत्रवर्धक उपयोग
नेत्र जलन , स्राव रोकथाम में उपयोग
कई फुंदी जनित रोगों में

जलवायु आवश्यकता
भूमि – बांज बुरांस भूमि व जलवायु उपयुक्त अर्थात उत्तरमुखी जंगलों में उपयुक्त . 27 अंश सेल्सियस तापमान सही याने उष्ण व वास्प आवश्यक। जैविक खाद व भूमि के गुण तेजपत्ता के गुणों को प्रभावित करता है। जमीन दलदली नहीं होनी चाहिए
पत्ते तोड़ने का समय -अक्टूबर -नवंबर
छाल निकालने का समय नवंबर -जनवरी
फूल आने का समय – मई
फल आने /पकने का समय – जून जुलाई
फल तोड़ने का समय -जून -अगस्त
बीज बोन का समय – मानसून , बीजों को फल से तोड़ कर तुरंत बलुई मिट्टी की तैयार क्यारियों में बोया जाता है
मिट्टी – बांज बुरास वाली
रोपण का समय – बीज बोन के 10 – 15 दिन बाद या कुछ अधिक , वृक्ष रोपाई में कम से कम 2 मीटर अंतर्
सीधी बुवाई या पेड़ों से बीज गिरने से अंकुरण का प्रतिशत 10 %
जंगलों से कलियाँ एकत्रित कर भी रोपण किया जाता हैं
कलम व एयर लेयरिंग पद्धति से भी रोपण किया जा सकता है

खाद आवश्यकता -प्रारंभिक आवश्यक -सितंबर व मार्च
सिंचाई आवश्यकता – आवश्यक
वयस्कता समय- पत्ते 8 -9 साल में

कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti 15 /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
-
Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Haridwar Garhwal Uttarakhand ;
Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ;

Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Pauri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Chmoli Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Rudraprayag Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Tehri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Uttarkashi Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Dehradun Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Udham Singh Nagar Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Nainital Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Almora Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ;
Medicinal Plants plantation in Pithoragarh Uttarakhand

Jun
14

मौलसिरी , बकुल वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

मौलसिरी , बकुल वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Spanish Cheery , Bakula Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
-

सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -17

Community Medical Plant Forestation -17

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 119

-

Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 119

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–222
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 222

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम – Mimusops elengi
सामन्य नाम -बकुल या मौलसिरी
पादप वर्णन

वृक्ष उंचाई मीटर- सामन्य तः 12 -15 मीटर ऊँचा वृसदाबहार वृक्ष किन्तु 30 मीटर तक जा सकता है
तना गोलाई सेंटीमीटर -50 cm या कम
समुद्र तल से भूमि उंचाई – उष्ण कटबंधीय वृक्ष , 600 मीटर मैदानी इलाका , भाभर, तराई क्षेत्र में उगाने लायक अलग अलग प्रकार की मिट्टी में होसकता है , उत्तराखंड बायो डाइवर्सिटी बोर्ड मौलसरी वृक्ष रोपण का धार्मिक वृक्ष बागवानी लगाओ योजना अंतर्गत लोगों मध्य प्रचार भी करता है।
फूल व फल – साल भर आते रहते हैं , सफेद फूल सुबह शाम अच्छी सुगंधित हवा छोड़ते छोड़ते हैं , पीले चिकने अंडकार बीज आकर्षक लगते हैं। चमकदार काले अंडाकार बीज भी करहक होते हैं
आर्थिक उपयोग
धार्मिक उपयोगी व बगीचे में सुगंध हेतु लगाए जाते हैं। सूखे फूल गद्दों व तकियों में रुई के साथ भरे जाते हैं
इमरती , पुल निर्माण , कृषि उपकरण हेतु मजबूत लकड़ी
औषधि उपयोग
मैलसिरि वृक्ष के अंग उपयोगिता
छाल , फूल व फल -बीज
सरदर्द , नाकबंद , हेतु भाप थिरेपी
मुखवास , दांत , मसूढ़े तगड़े करने व गंध हटाने, गरारा करने हेतु छाल, पत्ती , बीजों से औषधि निर्माण
सर्दी जुकाम, बुखार उपचार हेतु औषधि
कीड़ों के काटने या जानवरों के काटने पर छाल , बीज से पेस्ट औषधि
नेत्र औषधि
अधिक मात्रा के उपयोग से हानि हो सकती है अतः चिकित्स्क की सलाह आवश्यक

जलवायु आवश्यकता
भूमि – भाभर की भूमि या कुछ ऊपर की भूमि

फल तोड़ने का समय – वर्ष भर
बीज बोन का समय – बीज निकालने के कुछ समय पश्चात बीज बोना श्रेयकर। भण्डारीकृत अच्छी फसल नहीं देते हैं। बीजों को 24 घंटे तक मंतत /वार्म पानी में भोगोया जाता है फिर तैयार छायादार क्यारियों में बो दिया जाते हैं। थायो यूरिया ट्रीटमेंट से बीज अंकुरण 77 % तक हो पाते हैं
अंकुरण 17 दिन या अधिक देर से आते हैं।
रोपण का समय – अंकुरण के एक माह पश्चात पॉलीथिन बैग में लगाए जाते हैं और जब पौधा एक सवा साल में डमडमा हो जाय तो गड्ढों में लगाए जाते। हैं
सीधे भिगोये बीज भी बोये जा सकते हैं किन्तु अंकुरण प्रतिशत कम – दक्षिण उत्तराखंड में नयार घाटी , या गदन किनारे जहां ऊंचाई 2000 फ़ीट से कम हो, गरम जलवायु हो वहां भी लग सकते हैं
खाद आवश्यकता -प्रारम्भिक काल
सिंचाई आवश्यकता -प्रारम्भिक काल
जड़ कलम या अन्य कलम से भी वृष लगाए जाते हैं।
कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
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Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Haridwar Garhwal Uttarakhand ;
Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ;

Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Pauri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Chmoli Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Rudraprayag Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Tehri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Uttarkashi Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Dehradun Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Udham Singh Nagar Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Nainital Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Almora Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ;
Medicinal Plants plantation in Pithoragarh Uttarakhand

Jun
13

गुप्त काल में व्यापार , वाणिज्य

गुप्त काल में व्यापार , वाणिज्य

Trade in Gupta Era in context History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

हरिद्वार इतिहास , बिजनौर इतिहास , सहारनपुर इतिहास -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग – 235

इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

गुप्त काल में आंतरिक व्यापार व निर्यात समृद्ध था। आंतरिक व्यापार में मसालों , कपड़ों , बर्तनों , अनाज , नमक , रत्नों का व्यापार मुख्य था।
परिहवन के माध्यम पथ व नदियां उपलब्ध थे।
रोम से आयातित वस्तुएं निम्न बंदरगाहों से भारत आते थे और भारत से वस्तुएं निर्यात होती थीं -
कल्याण
छौल
भरुच व कैम्बे
इसके अतिरिक्त निम्न बंदरगाह अन्य देशों के साथ आयात निर्यात के माध्यम थे -
तामलिपती -चीन , जावा
कदुरा , कावेरीपत्तनम , घनसाला , टंडाई
भारत से रत्न , मसाले , कपड़े , सुंगंधित पदार्थ , नील , औषधियां ,नारियल व हाथी दांत , हिमालयी जड़ी बूटियां , जंतु अंग
भारत धातुएं , रेशम , स्पंज , खजूर आयात करता था।
भारत में जलजहाज बनते थे जो 500 मुष्यों को ढोने में सक्षम थे। उत्तराखंड से घोड़े , लकड़ी , जंगली जंतु जंतु खालें , औषधियां व पादप भारत के अन्य भागों को निर्यात होते थे। भाभर हरिद्वार आदि शिकारगाह भी थे

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India 2018

History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur to be continued Part –236

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास to be continued -भाग -

Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Sultanpur, Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar; History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ; Ancient History of Bijnor; seohara , Bijnor History Ancient History of Nazibabad Bijnor ; Ancient History of Saharanpur; Ancient History of Nakur , Saharanpur; Ancient History of Deoband, Saharanpur; Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur; Ancient Saharanpur History, Ancient Bijnor History;
कनखल , हरिद्वार इतिहास ; तेलपुरा , हरिद्वार इतिहास ; सकरौदा , हरिद्वार इतिहास ; भगवानपुर , हरिद्वार इतिहास ;रुड़की ,हरिद्वार इतिहास ; झाब्रेरा हरिद्वार इतिहास ; मंगलौर हरिद्वार इतिहास ;लक्सर हरिद्वार इतिहास ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार इतिहास ;पाथरी , हरिद्वार इतिहास ; बहदराबाद , हरिद्वार इतिहास ; लंढौर , हरिद्वार इतिहास ;ससेवहारा बिजनौर , बिजनौर इतिहास; नगीना , बिजनौर इतिहास; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर इतिहास; देवबंद सहारनपुर इतिहास , बेहत सहारनपुर इतिहास , नकुर सहरानपुर इतिहास Haridwar Itihas, Bijnor Itihas, Saharanpur Itihas

Jun
13

Shilakar , Dalitoddhar Movement in Garhwal

Shilpkar (Harijan) Empowerment in British Garhwal

British Administration in Garhwal -336
-
History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -356
-
History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -1191
By: Bhishma Kukreti (History Student)
Mahatma Gandhi attracted the attention for Harijan Empowerment or improving Harijan’ social conditions .In Garhwal, Shilpkar were under Harijan category (untouchable).. Arya Samaj came forward for empowering Shilpkar for getting their respectful status in Uttarakhand. Aryasamaj conducted a movement for Purification – that means those were forcefully converted into Muslim they could be converted into Hindu. In 1927, Aryasamaj conference decided to empower Shilpkar (Harijan) . Lala hansraj presided the conference and Mahmana Madan Mohan Malvitya , Lala Lajpat Ray attended the meet.
Arya Samaj brought Harijanoddhar Movement in Garhwal too. Araya Samaji activists convinced Shilpkar for tying Janeu (sacred thread). There was hue and cry among Brahmans and Rajpur communities for Shilpkar putting on Janeu. Upper caste people broke Janeu of Shilpkar as happened in Jaspur Mlla Dhangu, Pauri Garhwal.
There was harijanoddhar conference in dogadda where Guna Nand Juyal, Ramprasad Nautiyal attended the meet .,

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India,bjkukreti@gmail.com 13/6/2018
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -1192
-
*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter
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(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

History of British Garhwal, Education , Caste, History of Devalgarh Garhwal , ; History of Badhan Garhwal; Education , Caste History of Barasyun Garhwal; Education , Caste, History of Chandpur Garhwal; Education , Caste History of Chaundkot Garhwal; Education , Caste History of Gangasalan Garhwal; History of Mallasalan Garhwal; Education , Caste, History of Tallasalan Garhwal; Education , Caste History of Dashauli Garhwal; Education , Caste, History of Nagpur Garhwal; Society in British Garhwal. History of British Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith in Chamoli Garhwal, History of Social Structure and Religious Faith of Pauri Garhwal , Education , Health, Social and Culture History of Rudraprayag Garhwal.

Jun
13

Nagkesar Cultivation

नागकेसर वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Indian Rose Chestnut Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
-

सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -16

Community Medical Plant Forestation -16

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) -118

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 118

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–221)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 221

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम -Mesua ferrea
संस्कृत -नागकेशर , नागपुष्प
पादप वर्णन
वृक्ष उंचाई मीटर- 30 -31
तना गोलाई सेंटीमीटर -90 तक
समुद्र तल से भूमि उंचाई मीटर – 1100 -1700
पत्तिययाँ फूल व फल – शुरुवात में पत्तियां लाल , ऊपरी पत्तियां गहरी हरी व नीचे नीला -मटमैला रंग
फल तिकोने अंडाकार जैसे

औषधि उपयोग

नागकेसर के अंग उपयोगिता – पुंकेसर , फल , बीज , फूल , कलियाँ , पत्तियां , छाल उपयोगी
वमन रोकने हेतु व अन्य पेट पीड़ाओं में
ज्वर ,सरदर्द में

यकृत व तिल्ली की बीमारी में
स्वास व पाचन संबंधी बीमारियों में ,मुख का दुर्गंध हटाता है
कई औषधियों का घटक जैसे चवनप्रास
मूत्र रोग में
प्यास कम करता है
सुगंधित तेल

जलवायु आवश्यकता
भूमि – बलुई व स्पंजी , अम्लयुक्त भूमि नागकेसर हेतु हानिकारक , क्षारयुक्त /अल्कलाइन भूमि भी हानिकारक
धूप – सीधी , 7 घंटे
फूल आने का समय – मार्च जून
फल तोड़ने का समय -अक्टूबर नवंबर

नए नए बीजों से सीधी बुआई भी की जाती हैं
यदि फल पके हों तो बीजों को 24 घंटे तक ठंडे पानी में भिगोये जाते हैं . नागकेशर के बीज जमने का प्रतिशत अधिकतर 100 % होता है।
एक हेक्टेयर में 400 पेड़ लग सकते हैं
जड़ या तने की कलम से भी पेड़ लगाए जाते हैं जो 12 साल में फूल दने लगते हैं
रोपण का समय – एक साल पुरानी डमडमी कली 40 -45 सेंटीमीटर ऊँची कली उपरान्त व शीत ऋतू की वारिश सही समय
खाद आवश्यकता – प्रारम्भिक काल , गोबर सही खाद
सिंचाई आवश्यकता – प्रारम्भ में फिर सामन्य
ओस व सूखे सहने की सहनशीलता पेड़ में है

कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
-
Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Haridwar Garhwal Uttarakhand ;
Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Kumaon Uttarakhand ;

Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Pauri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Chmoli Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Rudraprayag Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Tehri Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Uttarkashi Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Dehradun Garhwal Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Udham Singh Nagar Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Nainital Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Almora Kumaon Uttarakhand ; Medicinal Plants Plantation for Medical Tourism in Champawat Kumaon Uttarakhand ;
Medicinal Plants plantation in Pithoragarh Uttarakhand
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