Tag Archive: अभिनय

Jan
14

विबोध भाव अभिनय: विबोध भावौ पाठ खिलण

  विबोध भाव अभिनय:   विबोध भावौ पाठ खिलण  गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण Performing Awakening   Sentiment  in Garhwali Dramas  ( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )     भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 50 s  = आधी अ भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म …

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Jan
12

अप्पसार भाव अभिनय: अप्पसार/मिर्गी भावौ पाठ खिलण

  अप्पसार भाव अभिनय: अप्पसार/मिर्गी  भावौ पाठ खिलण    गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण Performing Epilepsy Sentiment  in Garhwali Dramas     भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 48 s  = आधी अ भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती  -  तस्य स्फुरित:र्नि: श्वसितोत्कम्पितधावनपतनस्वेदस्तम्भनवदनफेन जिह्वापरिलेहनादिभिरनुभावैरभिनय: प्रयोक्तव्य: I ( ७ ,७२ परवर्ती …

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Jan
11

निद्रा भाव अभिनय: गढ़वाली स्वांगुंम निद्रा भावो पाठ खिलण

निद्रा भाव अभिनय:  गढ़वाली स्वांगुंम निद्रा भावो  पाठ खिलण      जसपुर, गढवाल म खिल्यां स्वांग आधारित उदाहरण Performing Slumber Sentiment  in Garhwali Dramas     भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 47 (गढ़वाली लोक नाटकों से उदाहरण युक्त व्यख्या) s = आधी अ भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म …

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Jan
10

गढवाली नाटकों म औत्सुक्य भाव अभिनय: औत्सुक्य भावौ पाठ खिलण

   औत्सुक्य भाव अभिनय:  औत्सुक्य  भावौ पाठ खिलण  Performing Eagerness Sentiment  in Garhwali Dramas     भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 46 (गढ़वाली लोक नाटकों से उदाहरण युक्त व्यख्या) भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती  – दीर्घनि:श्वसिताधोमुखविचिंतननिद्रातंद्रीशयनाभिलाषादिभिरनुभावैभिनय: प्रयोक्तव्य: (७ , ६९ परवर्ती गद्य ) गढ़वाली अनुवाद – – …

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Jan
09

विषाद भाव अभिनय: विषाद भावौ पाठ खिलण

  विषाद भाव अभिनय:  विषाद  भावौ पाठ खिलण    Performing Dejection  Sentiment  in Garhwali Dramas     भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय – 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 45 (गढ़वाली लोक नाटकों से उदाहरण युक्त व्यख्या ) भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती  – ततभिनयेत्सहाान्वेषणोपायचिंतनोत्साहविघातवैमनस्यनि::श्वसितादिभिरनुभावैरुत्तममध्यमानाम्।  (7 ,67  कु  परवर्ती गद्य ) गढ़वाली अनुवाद …

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