Tag Archive: उत्तराखंडी धार्मिक स्थल

Apr
24

अपण धरोहर अपण कोशिश: श्री राम पादुका एंव राम मंदिर (मासी)

Rampaduka

अल्मोड़ा में राम गंगा नदी के किनारे बसा मासी बाजार से तक़रीबन ढाई किलोमीटर की दुरी पर कोट्युडा ग्राम के निकट भगवान् श्री राम जी का मंदिर है ! माना जाता है कि मुनि विश्वामित्र जी यज्ञ किया करते थे। असुर श्री विश्वामित्र जी को इस रमणीक स्थान को छोड़ने पर मजबूर करने लगे । असुरों के आतंक से चिंतित होकर एक दिन विश्वामित्र जी श्री राजा दशरथ जी के पास गये और भगवान् राम और लक्ष्मण जी को अपने साथ ले जाने की अनुमति मागी थी ! भगवान् राम और लक्ष्मण दोनों भाइयों ने इस देवभूमि में आकर असुरों का सर्वनास कर दिया । श्री विश्वामित्र जी ने प्रभु से कहा । हे प्रभु ! आप यहाँ आ ही गये हो कुछ ऐसा कीजिये जिस से यहाँ के लोग आपकी चरणों की रज पा सके । विश्वामित्र के निवेदन से भगवान राम जी ने अपने चरण पाद छोड़े अविरल बहाने वाली नदी जो भगवान राम के पद चिन्हों को छू कर निकलती है।  रामपदुका के स्पर्श से ही इस का नाम रामगंगा पड़ा ।  इस का वर्णन स्कन्द पुराण में किया गया है । आज भी यहाँ पर इस पौराणिक मंदिर में श्री राम जी के चरण चिन्ह स्थापित हैं । इस जगह को आज भी बहुत बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है । १ गते बैसाखी के दिन यहाँ पर बहुत बड़ा मेला लगता है प्रात: ४ बजे लोग स्नान करने पहुँच जाते हैं और उसे दिन लोग जनेऊ संस्कार व पित्रों का श्राद्ध उठाते हैं । कहते हैं उस दिन जो यहाँ स्नान करता है उस के संकट कम हो जाते हैं (साथियों जीवन में यदि संकट ही न हो तो कैसे पता चलेगा की दुःख और सुख क्या है भगवान की कृपा से रोग-दोष कुछ कम हो जाते हैं ) राम पादुका मंदिर के ठीक सामने श्री इन्द्रेश्वेर प्रभु शिव शंकर जी का मंदिर भी स्थित है कहा जाता है कि जब देवराज इन्द्र को ब्रह्म हत्या का दोष लगा था, तब उन्होंने इसी जगह पर कई वर्षों तक तपस्या की तदोपरांत भगवान शिव ने ब्रह्म हत्या से मुक्त कर इस शिवालय को इन्द्रेश्वर का नाम दिया । चित्र सौजन्य: गूगल 

Apr
13

अपण धरोहर अपण कोशिश: माणागाँव (बद्रीनाथ)

Mana Gaon

हिन्दू धर्म के पावन तीर्थस्थलों में एक वैष्णव तीर्थ बद्रीनाथ के समीप स्थित है- बद्रीनाथ से पांच किलोमीटर आगे है मणिभद्रपुर.. जिसे अब माणा गांव कहा जाता है। माणा गांव, भौगोलिक व सामरिक नजरिए से तिब्बत-चीन सीमा पर स्थित  भारत का आखिरी गांव भी है। यहां भारतीय सेना मुस्तैदी से तैनात है। पहले भारतीय सेना …

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Mar
13

अपण धरोहर अपण कोशिश : माँ भगवती मंदिर पोथिंग (बागेश्वर )

Pothing

उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद से करीब 30 कि०मी० दूर माँ नन्दा भगवती का भव्य मंदिर पोथिंग नामक गाँव में स्थित है। जो कपकोट क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। यह मंदिर क्षेत्रवासियों को ही नहीं बल्कि दूर-दराज के लोगों को भी अपनी भव्यता एवं आस्था से अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद मास यानि अगस्त-सितम्बर में माँ नंदा भगवती की पूजा की जाती है। जिसमें दूर-दूर से भक्तजन इस पूजा में सम्मिलित होने के लिए आते हैं। जिसमें विशाल जन-समुदाय एकत्रित होता है।  अपनी भव्यता और विशालता के कारण अब इस पूजा ने एक मेले का रूप ले लिया है जिसे पोथिंग का मेला नाम से जाना जाता है। यहाँ का मंदिर भले ही नवीन शैली में बना हो लेकिन यहाँ हमें प्राचीन काल से स्थापित मंदिर के अन्दर रखे गए शिलाओं के दर्शन होते हैं। पोथिंग में माँ नन्दा भगवती की पूजा का शुभारम्भ श्रावण महीने के 1 गत्ते यानि हरेले के दिन से ही हो जाता है। इस दिन कपकोट के उत्तरौडा गाँव से भगवती,लाटू, गोलू देवताओं के डंगरियों और स्थानीय निवासियों के द्वारा ‘दूध केले’ का पेड़ लाकर गाँव में ही निर्धारित स्थान पर लगाया जाता है। लगभग १ महीने तक इस केले के पेड़ को गाय के दूध द्वारा सींचा जाता है। भाद्रपद महीने के सप्तमी को इस पेड़ को काटकर अष्टमी के दिन माँ की प्रतिमा बनाने के लिए इस केले के पेड़ का प्रयोग किया जाता है। भाद्रपद के नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन गाँव के भगवती मन्दिर जिसे तिबारी नाम से जाना जाता है में गेहूं भराई के साथ ही देवी भगवती की पूजा प्रारम्भ हो जाती है। इस दिन यहाँ के स्थानीय लोग माँ को अर्पित करने के लिए गेहूं, जौ, तिल इत्यादि लाते हैं और देवी भगवती, साथी लाटू देवता और गोलू राजा के साथ अपने डंगरियों में अवतरित होकर लोगों को दर्शन देती है। सात रात माँ का जागरण रहता है और आठवें दिन पूजा का आयोजन होता है। जिसमें दूर-दूर से लोग माँ के दर्शनार्थ आते हैं। भाद्रपद अष्टमी को पोथिंग (बागेश्वर) में माँ नन्दा के दर्शनार्थ एक विशाल जनसमुदाय उमड़ पड़ता है। यहाँ माँ नन्दा भगवती की पूजा के समय जो पूड़ियाँ बनाई जाती हैं, वो हमेशा की आकर्षण का केंद्र रहती हैं, एक पूड़ी का वजन लगभग 2.50 ग्राम से लेकर 300 ग्राम तक होता है। भक्तजन इस पूड़ी को ही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। माँ भगवती का यह मंदिर पोथिंग गाँव के मध्य में स्थापित है। जहाँ  सिलंग के वृक्षों के फूलों की खुशबू और हरियाली मानव मन को मोह लेती है। यहाँ पर आकर भक्तजन सुकून का अनुभव करते हैं और हर वर्ष यहाँ माँ के दरबार में आकर माँ के दर्शन करते हैं।  यहाँ की महिमा,भव्यता और लोगों की माँ के प्रति आस्था को देखते हुए इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यह स्थल सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुडा हुआ है। मंदिर में अनेक धर्मशालाएं बनी हुयी हैं और यहाँ रहने की अच्छी व्यवस्था है। आभार- विनोद सिंह गडिया  चित्र सौजन्य : गूगल 

Mar
09

अपण धरोहर अपण कोशिश : लाटू देवता मंदिर (चमोली)

Latu Devta

सनातन धर्म में चैतीस करोड़ देवी-देवताओं को अलग-अलग रूप में पूजा जाता है, लेकिन उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लाक में एक ऐसे भी देवता हैं, जिनके दर्शन भक्त तो रहे दूर खुद पुजारी भी नहीं कर सकता। इस देवता के मंदिर के कपाट एक ही दिन के लिए खुलते हैं और पुजारी भी …

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Feb
11

अपण धरोहर अपण कोशिश: उत्तराखंडी धार्मिक स्थल मुक्तेश्वर (Mukteshwar)

आइये उत्तराखंडी धार्मिक स्थल मुक्तेश्वर  से जुड़ी कुछ जानकारी सुने…  नीचे दिए प्लेयर के प्ले बटन पर क्लिक करें…. आप इस जानकारी को अपने संगी साथियों के साथ बांटने के लिए इस ऑडियो को बेडूपाको.कॉम से डाउनलोड भी कर सकते हैं

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