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Oct
18

उत्तराखंड में मेडिकल पर्यटन की संभावनाएं

डॉ बलबीर सिंह रावत ऐतिहासिक पुस्तकें तथ्य बताते हैं की प्राचीन समय से ही उत्तराखंड स्वास्थ्य पर्यटन का केंद्र रहा है. उत्तराखंड की जलवायु स्वयम में स्वास्थ्य का पर्याय होने का बोध कराती है। शीतल और शुद्ध वायु, धरती से छन कर, विभिन्न जडी बूटियों के रस युक्त आता चश्मों का जल, हरेभरे पेड़ पौधों …

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Sep
24

बागनाथ का वरदान (भाग-10)

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आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत सुबह को जब मेहर भाइयुं को पता चला कि राजुला में खाना नहीं खाया है तो वे समझ गए की उसके मन से मालू की याद निकालना आसान नहीं है । सोच विचारकर उन्होंने फैसला किया कि राजुला राह पर तभी आ सकती है जब उससे शादी कर ली जाय …

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Sep
06

Saabdhan, Mero Muluk, Saabdhaan

साबधान, मेरु मुलुक, साबधान !!!! दगिड्यो, आज फेर मुल्कौ आवाहन कनु छौं, इन्टरनेट द्वारा उपलब्ध ये सामाजिक माध्यम द्वारा। हम्थैं नयु राज्य मिलि अब १३ साल ह्वै ग्येनि पण हमरि स्तिथि जख्यातखि च, राज्य बणु छौ पहाडों क वास्ता पण पाडों मा हि कुच नि ह्वै। आज बगत बुनु च कि एक हैंकु आंदोलन चयेणु …

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Sep
04

jaingunu

“जैंगुणु”(जुगनू)  ईं अंध्येरि रातम दयु जलै कु बैठ्युं च? ह्वै यनु चक्रचाल अगास म, लुकि ग्येनि जून अर गैणा, सूढ़-बथों यनु ऐ धरति म, दयुवा कखि बल्याँ नि दिख्येणा, पण यनि बकिबात म बि उज्यलु बलै कु बैठ्युं च? ईं अंध्येरि रातम दयु जलै कु बैठ्युं च? अगास म धै लगै-लगै, अगास म रै घिरये-घिरये, डरोणा, सुणोंणा …

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Sep
03

Bholai bhol dikhye Jaali!!

  भोलै सोचि मि डरु किलै, भोलै, भोल हि दिख्ये जालि, अबि ह्वै जौं अध्म्वरु किलै? काम-धाणी आजै बचिं अबि, जरा वे निमाडि ल्या त पैल, सुबेरो घाम ऐ नि कखि, तुम दिखण लग्याँ अछेल, जै गौं मिन जाण हि नि, वेकु बाटु मि हयरु किलै? भोलै सोचि मि डरु किलै, भोलै, भोल हि दिख्ये जालि, …

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