Tag Archive: garhwal

Nov
21

गढ़वाळम  संस्कृत नाट्य परंपरा

गढ़वाळम संस्कृत नाट्य परंपरा – भीष्म कुकरेती – सैकड़ों साल से चाहे वु क्वी बि कि कत्यूरी राज रै या शाह वंश राज राइ , संस्कृत उत्तराखंड की राजभाषा राइ तबि त शिलालेख अभिलेख अर ताम्र पत्र अधिकतर संस्कृत म इ छन। मध्य अंध युग से ब्रज भाषा दरबारों साहित्यिक ही ना राजाओं व आम …

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Nov
06

गढ़वाल में ईगास बग्वाल की विशिष्ठ परम्परा

गढ़वाल में ईगास बग्वाल की विशिष्ठ परम्परा – डॉ. नंद किशोर हटवाल – दीपावली के ठीक ग्यारह दिन बाद गढ़वाल में एक और दीपावली मनाई जाती है जिसे ईगास बग्वाल कहा जाता है। इस दिन पूर्व की दो बग्वालों की तरह पकवान बनाए जाते हैं, गोवंश को पींडा ( पौस्टिक आहार ) दिया जाता है, …

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Jul
28

गावों में सहकारी उद्यमों की संभावना

गावों में सहकारी उद्यमों की संभावना लेखक ­- जगत सिंह बिष्ट, ग्राम खुटीडा, धुमाकोट, गढवाल गावों में सहकारी उद्यमों की संभावना उत्तराखंड के पहाडी गांवों में न्यूनतम आर्थिकोपार्जन की नहीं बल्कि अच्छी आय की बात अधिक बेहत्तर होगी. हाल ही के वर्षों में हुए प्रयासों और प्रयोगों से लोंगों में एक नए उत्साह का संचार …

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Jun
05

मंदिरों , गुरुद्वाराओं के भंडारे/लंगर व भोग -प्रसाद भी भोजन पर्यटन अंग ही हैं

मंदिरों , गुरुद्वाराओं के भंडारे/लंगर व भोग -प्रसाद भी भोजन पर्यटन अंग ही हैं Bhandra, Bhog from temples are Tourism oriented भोजन पर्यटन विकास -14 Food /Culinary Tourism Development 14 उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 398 Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -398 आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती – अमूनन हिन्दू भारतीय पूजास्थलों में देवताओं …

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May
07

Kanta Dangwal Ghildiyal: Garhwali poetess

Kanta Dangwal Ghildiyal : Garhwali Poetess using Figures of Speech with ease (Chronological History and Review of Garhwali Poetry series -284) Review by Bhishma Kukreti Kanta Ghildiyal published three or four Garhwali poems . However, Kanta Dangwal Ghildiyal gort full praise from editor and critic Madan Duklan and poetry critic Manju Dhoundiyal for Kanta using …

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