Tag Archive: Moral verses

Jun
03

एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा

A beautiful poem by Dr. Gauniyal emphasizing on the need of the hour "Population Control" (Photo courtesy:http://www.mountain.org/blog/2012/02/a-solution-to-hunger-starting-with-a-seed/)

एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा. होलि मुश्किल सैंतणा की,निथर तब हे दिदा. बिंडी ह्वाला तब क्य खाला,पुट्गी राली खाली दा. सबि नंगा-भूखा उन्नी राला,तब क्य होलू हे दिदा. ल्यखणु-पढणु, झुल्ला-गफ्फा,आलो कख बिटिकी रे. फिर एक बन्दा अर सौ धंधा,तब क्य होलू हे दिदा. भर्ती हूणू इस्कुलों मा,ह्वैगे मुश्किल यूं दिनों. ढेबरा-बखरा …

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