Tag Archive: Parashar Gaur Poems

Nov
12

दीप जलाने हो तो ?

दीप जलाने हो तो ?

दीप जलाने हो तो मन के दीप जलाये नफरत की तिमर हटे चेहरों पे मुस्काने आये ! तम का तमस हटे बिश्वासों का शुत्रपात हो जन मांनस के उर में जागे प्रेम मिलन की लो हो जगमग जग हो उजियारा लौ दूर से दिये दिखाये ! बिघ्नो के लौ जले क्षितीज पर नया सबेरा हो …

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Nov
10

दुबिधा

कोई तो पथ मिले मुझे एसा जिस पर गमन करूँ … कोई तो सुरत मिले मुझे ऐसी जिसको नमन करूं !पथभ्रष्ट यहाँ है , पथ और पथिक किसको क्या कहूँ …… दो राहें , चौराहे भ्रमित करते मुझको किस पे बिश्वास करूँघात /प्रतिघातो के आघातों से पीड़ित और बिचलित हूँ ,, शंशय और शंकाओं से …

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Nov
07

अभिन्दन

शिखरों पर फैलती प्रकाश करता भोर का अभिनन्दन बन-उपबन में भेद तम को प्राण फूंकती प्रभाती किरण रात्री का ब्याकुल अकुलाता छण तब करता शुभ प्रभात का अभिनन्दन …………………… ! खग के, कल कल करते कलरब देबाल्यो से आते प्रभाती स्वर ब्योम पर तैरती सिंदूरी रंग देती नव सुबहो को आमंत्रण ! सरिता बहती अल्हड …

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Oct
28

गुंडा -राज

( ये कबिता महाराष्ट्र के बिधान सभा में उस घटना पर है जिस में में हिन्दी में शपथ लेने पर एक उमीदवार को पीटा गया था ) मैंने , देखा – उसने देखा हम सब ने देखा हिन्दी को अपमानित होते अपने से नहीं, अपनों से , महाराष्ट्र के बिधन सभा में सबके सामने सबके …

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Oct
15

एकाकी पन

मत पूछो मुझ से एकाकी पन क्या होता है न गुजरे किसी पर ऐसा छण मेरा मन कहता है ! दिखने मै तो वो यूँ इस युग का लगता है भावनाओं में खोया खोया वो तो , जड चेतन से उखडा उखडा रहता है ! जीवित है वो, जीवित है बस इतना काफी है प्रशन …

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