BCKukreti

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Name: Bhishma Kukreti
Date registered: April 24, 2012
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Biography

Born in Jaspur, malla Dhangu, Pauri Garhwal MSc (Botany), DBBM, DEIM Throughut worked in Sales and Marketing and Material Management Write in Garhwali, English and Hindi Published Garhwal ki Lok kthayen (Hindi) , Kablat (Garhwali ) and Branding of Seasonal Branding (English) books More than 2000 articles in Garhwali, Hindi and more than 2000 articles in English on Internet and offline media published

Latest posts

  1. खांसी चौमासी” (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत) — April 27, 2017
  2. “मरख्वल्या खाडू….धारा 370″ (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत) — April 27, 2017
  3. बीड़ी — April 23, 2017
  4. गौं — April 23, 2017
  5. दूधौ पराण — April 23, 2017

Most commented posts

  1. History of Upper Caste in Garhwal from 00 to 1500 and Spread of Untouchability and Caste based Slavery — 17 comments
  2. बिन कांडों का नि खिल्दा गुलाब: गढ़वाली कविता — 4 comments
  3. Garhwali Lok Mantra: Useful Book for Preserving Garhwali Culture — 4 comments
  4. Introductory Note for Garhwali Kavitavali by Rai Bahadur Pundit Tara Datt Gairola — 3 comments
  5. Veer Balak Haru Heet: Lyrical Folktale/Folk Song about Adventurous deeds of a Brave Young man — 3 comments

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Apr
27

खांसी चौमासी” (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत)

खांसी चौमासी” (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत) – Satirical Garhwali Poetry by Sunil Bhatt – “खांसी चौमासी” खांसी चौमासी, झूठा सबूत झणी कन कना, रोगी छन रे।। लाटा काऽला, फूलों का ड्वाऽला राज भ्वगणा, भोगी छन रे।। मनखी यू देव्ता, रक्वैड़ी लग्यूँ चा सीणू नी खाणू, कर्मयोगी छन रे।। सीखणा नी यूँसै, द्यखणा नी यूँतैं ठगणौं …

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Apr
27

“मरख्वल्या खाडू….धारा 370″ (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत)

“मरख्वल्या खाडू….धारा 370″ (गढ़वाली व्यंग्य कविता, लोकगीत) – Satirical Garhwali Poetry by Sunil Bhatt – खिलै पिलैई ब्वख्ठ्या बणैया छन, मरख्वल्या खाडू हमरा पल्याँ छन। लताड़ ढांगा सिंग पुड़्यौणा, प्वड़ी प्वड़ी हमतैं आँखा दिखौणा। फक्यादि फौजी, मेरू घौर आलु, तब तेरी मुंडिली, खट्टैंई गंड्डकालु। खाणु जब त्वै द्वी लत्ती द्यालु, दयखुलु तब त्वै, कु जी …

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Apr
23

बीड़ी

बीड़ी – Garhwali Satire by Narendra Kathait – इन पक्कू नि बतलै सकदाँ कि ‘हुक्का अर् चीलम’ से पैली बीड़ी छै कि नी छै। पर हुक्का अर चिलामिन् बि बीड़्यू क्य बिगाड़ दे? आज बि हुक्का अर चीलाम्या दबदबा बीच बीड़्यू रुतबा कम नी ह्वे। बीड़ी, गरीब-अमीर हर कैकि, करबट मा बैठ जांदि। बीड़ी तैं …

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Apr
23

गौं

गौं – (गढ़वाली भाषा की शब्द सम्पदा से गांव की तस्वीर) Villages from Garhwali language vocbullary – By Narendra Kathait – गौं फकत एक जगौ नौ नी होंदू। धारा-पन्द्यारा, ओडा-भीटा, उखड़ी -सेरा अर मल्ली-तल्ली सारौ नौ बि गौं नी होंदू। गौं सि पैली जंै चीजौ नौ सबसि पैली औंदू, वो क्वी न क्वी एक मवासू …

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Apr
23

दूधौ पराण

दूधौ पराण Satire by Narendra Kathait दूधौ पराण त् वे दिन हि खट्टू ह्वे ग्ये छौ जै दिन ‘दै’ जमौणू रख्येे.’ दूधै हमेसा कुगत ह्वे। ‘दूध’ सांजी ‘दै ’ जमी, दै कि छाँछ छुळे त् ‘नौण’ निकळि। नौण फूकी ‘घ्यू’ बणी। चट्वा लोग्वा बीच घ्यू कु स्वाद फैली त् घ्यू कि कीमत बढ़ी । तैं …

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